पोस्टल एजेंट को करोड़ों के गबन में 7साल की जेल: 1.49 करोड़ जुर्माना लगाया, फर्जी अंगूठे और साइन कर किया था फर्जीवाड़ा - Jalore News

Published on 25 जुल॰ 2026

जालोर के औद्योगिक क्षेत्र उप-डाकघर में 441 खातों से करोड़ों रुपए के गबन के तीन मामलों में जोधपुर महानगर सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मुख्य साजिशकर्ता और पूर्व पोस्टल एजेंट रमेश कुमार गहलोत को 7 साल के कठोर कारावास और 1.49 करोड़ रुपए जुर्

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441 खातों से करोड़ों रुपएके गबन का मामला

पीठासीन अधिकारी भूपेन्द्र कुमार सनाढ्य की अदालत ने जालोर औद्योगिक क्षेत्र उप-डाकघर में 441 खातों से करोड़ों रुपए के गबन के तीन अलग-अलग मामलों में यह फैसला सुनाया। मुख्य साजिशकर्ता और पूर्व पोस्टल एजेंट रमेश कुमार गहलोत को 7 साल के कठोर कारावास और 1.49 करोड़ रुपए जुर्माने की सजा दी गई।

दूसरे मुख्य आरोपी की ट्रायल के दौरान हुई मौत

इस घोटाले के दूसरे मुख्य आरोपी तत्कालीन उप डाकपाल गणपतसिंह देवड़ा की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो गई थी। हालांकि शुरुआती जांच में 841 खातों से कुल 2.30 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आया था।

एफएसएल रिपोर्ट में फर्जी अंगूठे और हस्ताक्षर की पुष्टि

कोर्ट में एफएसएल और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ की रिपोर्ट में साबित हुआ कि एजेंट ने अनपढ़ खाताधारकों के आहरण पत्रों पर खुद ही दाएं और बाएं हाथ के अंगूठे लगाए थे। कई मामलों में लक्ष्मी और मदनलाल सहित अन्य खाताधारकों के नाम बदलकर फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए। एफएसएल ने इन विवादित हस्ताक्षरों को सीधे एजेंट रमेश कुमार गहलोत से जोड़ा।

जालोर डाकघर का (फाइल फोटो)

जालोर डाकघर का (फाइल फोटो)

जांच शुरू होने पर 35 लाख रुपएलौटाए

एजेंट रमेश कुमार गहलोत (एजेंसी कोड 760) अपनी पत्नी हेमलता के नाम आवंटित महिला प्रधान बचत योजना एजेंसी का काम भी खुद देखता था। उसने तत्कालीन उप डाकपाल गणपतसिंह देवड़ा के साथ मिलकर सैकड़ों आरडी और एमआईएस खाताधारकों के फर्जी आहरण पत्र तैयार किए। उप डाकपाल ने मूल हस्ताक्षरों का मिलान किए बिना इन निकासियों को मंजूरी दे दी।

विशिष्ट लोक अभियोजक भगवानसिंह भंवरिया ने अदालत को बताया कि एजेंट ने गबन की राशि से कई संपत्तियां खरीदीं। विभागीय जांच शुरू होने पर तत्कालीन उप डाकपाल गणपतसिंह देवड़ा ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए 35 लाख रुपए डाकघर में वापस जमा कराए थे।

कोर्ट बोला- सह आरोपी की मौत से अपराध खत्म नहीं होता

बचाव पक्ष ने दलील दी कि लोक सेवक उप डाकपाल की मृत्यु के बाद अकेले निजी एजेंट को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) और आपराधिक साजिश के मामले में सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि सह-साजिशकर्ता की मृत्यु से जीवित आरोपी का अपराध समाप्त नहीं हो जाता।

अदालत ने माना कि रमेश कुमार ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोक सेवक के साथ मिलकर राजकोष को भारी नुकसान पहुंचाया। हालांकि उसे खातों के मिथ्याकरण के आरोप से बरी किया गया, क्योंकि तकनीकी और कानूनी रूप से खातों और पासबुक में प्रविष्टि करने का अधिकार केवल पोस्टमास्टर यानी लोक सेवक के पास था, एजेंट के पास नहीं। अदालत ने माना कि उसने सीधे खाताधारकों से नहीं, बल्कि डाकघर की व्यवस्था के जरिए गबन किया।

जोधपुर महानगर सीबीआई कोर्ट- फाइल फोटो

जोधपुर महानगर सीबीआई कोर्ट- फाइल फोटो

तीन मामलों में इतने खातों से गबन साबित

सिरोही मंडल के तत्कालीन डाकघर अधीक्षक की शिकायत और विभागीय ऑडिट के बाद सीबीआई ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी। अदालत में तीनों मामलों में निम्न गबन साबित हुआ-

पहला केस (सेशन केस 02/2015): 5 एमआईएस और 41 आरडी यानी कुल 46 खातों से 5,41,741 रुपए का गबन साबित हुआ।

दूसरा केस (सेशन केस 03/2015): 4 एमआईएस और 68 आरडी यानी कुल 72 खातों से 14,86,734 रुपए का गबन साबित हुआ।

तीसरा केस (सेशन केस 06/2015): 323 आरडी खातों से 1,34,32,537 रुपए के गबन का मामला साबित हुआ।