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- 1036 'digital Watchmen' Installed On 68.5 Km Of Track; The System Will Automatically Apply The Brakes Even If The Loco Pilot Makes A Mistake.
ग्वालियर30 मिनट पहले
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अब धौलपुर से ग्वालियर जंक्शन के बीच अगर किसी वजह से दो ट्रेनें एक ही पटरी पर 100 किमी प्रतिघंटा कि स्पीड में भी आमने-सामने आ जाएं, तब भी नहीं टकराएंगी।
रेलवे द्वारा इस 68.5 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली ‘मानक कवच’ शुरू हो गई है। यह तकनीक खतरा महसूस होते ही लोको पायलट का इंतजार किए बिना खुद ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगा देगी और दुर्घटना टाल देगी।
इसके लिए झांसी मंडल के डीआरएम अनिरुद्ध कुमार लंबे समय से प्रयासरत थे।
इस परियोजना के तहत धौलपुर से ग्वालियर तक पटरियों पर कुल 1036 विशेष आरएफआईडी टैग लगाए गए हैं। ये टैग पटरी पर दौड़ रही ट्रेन की सटीक लोकेशन, स्पीड और सिग्नल की जानकारी लगातार कंट्रोल रूम और ट्रेन के इंजन तक पहुंचाते रहेंगे। ग्वालियर-आगरा रूट पर हर दिन 180 जोड़ी यात्री ट्रेनें गुजरती हैं।
जानें क्या है ‘कवच’, कैसे बचाएगा यात्रियों की जान... ट्रेन ने रेड सिग्नल पार किया तो 2.5 किमी पहले रुक जाएगी
1. मानक कवच क्या है? यह भारत द्वारा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित एडवांस ऑटोमेटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (एटीपी) यानी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है। इसे रेल परिचालन में इंसानी गलतियों के कारण होने वाले हादसों को रोकने के लिए तैयार किया गया है।
2. एक ही ट्रैक पर 2 ट्रेनें आ जाएं तो क्या होगा? मानक कवच प्रणाली सिग्नल और दूरी को खुद-ब-खुद सेंस कर लेती है। अगर एक ही ट्रैक पर आमने-सामने या आगे-पीछे दो ट्रेनें आ जाती हैं, तो यह सिस्टम लोको पायलट के ब्रेक दबाने का इंतजार किए बिना ही ट्रेन में ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेक लगा देगा और दोनों ट्रेनों को सुरक्षित दूरी पर रोक देगा।
ट्रायल सफल: शुक्रवार को धौलपुर-ग्वालियर के बीच एक ही ट्रैक पर दो 100 किमी प्रति घंटा की स्पीड से ट्रेन इंजनों को आमने-सामने दौड़ाकर इसका सफल ट्रायल रेलवे टीम ने किया।
ये 5 मुख्य सुरक्षा कवच जो हादसे रोकेंगे 1 दो ट्रेनें गलती से एक ही पटरी पर आमने-सामने आ जाएं, तो सिस्टम टकराने से पहले रोक देता है। 2 आगे चल रही ट्रेन के रुकने पर पीछे से आ रही ट्रेन में अपने आप ब्रेक लग जाते हैं। 3 ट्रेन को चढ़ाई या ढलान पर बिना ड्राइवर की कमांड के आगे या पीछे खिसकने से रोकता है। 4 स्टेशन या सिग्नल पर रुकी ट्रेन के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाता है, ताकि अनियंत्रित हलचल न हो। 5 अगर धुंध, कोहरे या इंसानी भूल के कारण लोको पायलट लाल (खतरे का) सिग्नल पार करता है, तो सिस्टम खुद गाड़ी रोक देता है।
1036 आरएफआईडी टैग ऐसे काम करेंगे ग्वालियर से धौलपुर रेलखंड के बीच पटरियों के बीच बिछाए गए 1036 आरएफआईडी (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) टैग असल में डिजिटल पहरेदार की भूमिका में रहेंगे। जैसे ही ट्रेन का इंजन इनके ऊपर से गुजरता है, ये टैग लोको के अंदर लगे कवच सिस्टम को ट्रेन की सटीक लोकेशन, स्पीड और अगले सिग्नल की स्थिति डेटा तरंगों के जरिए तुरंत भेज देते हैं।
दावा- ‘कवच’ से खत्म होगी हादसों की गुंजाइश
धौलपुर-ग्वालियर सेक्शन में ‘मानक कवच’ प्रणाली का एक्टिव होना झांसी मंडल में रेल सुरक्षा के एक नए युग की शुरुआत है।यह स्वदेशी तकनीक मानवीय भूल की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म कर देगी।
यदि कभी कोहरे, धुंध या लोको पायलट की चूक के कारण लाल सिग्नल पार होने या दो ट्रेनों के एक ही ट्रैक पर आने जैसी स्थिति बनती भी है, तो यह सिस्टम खुद-ब-खुद ब्रेक लगाकर हादसे को टाल देगा। इस जटिल परियोजना को तय मानकों के अनुरूप ट्रायल सफल रहा। -अनिरुद्ध कुमार, मंडल रेल प्रबंधक (DRM), झांसी मंडल
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