दिन में 6500 रुपये मंथली की नौकरी, रात में अपना बिजनेस... खड़ी कर दी 80 करोड़ रुपये की कंपनी!

Published on 29 सित॰ 2026

अपनी मेहनत और सही सोच के दम पर योगेश शर्मा ने फूड एंड बेवरेज (F&B) इंडस्ट्री में एक नया मुकाम हासिल किया है. आज तमाम लोग योगेश शर्मा की सफलता की कहानी पर बात कर रहे हैं, जो कारीगरी वेंचर्स के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं. 

योगेश शर्मा ने दिल्ली से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद पुणे के प्रतिष्ठित सिम्बायोसिस संस्थान (SIBM) से 'बिजनेस एंड मार्केटिंग मैनेजमेंट' का कोर्स किया. साल 2007 में उन्होंने मुंबई में हिंदुस्तान टाइम्स में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के तौर पर 6,500 रुपये महीने की सैलरी पर नौकरी शुरू की. उस समय सैलरी भले ही कम थी. लेकिन उनके मन में हमेशा अपना बिजनेस खड़ा करने का जुनून था.    

पहला कदम और शुरुआती रेस्टोरेंट वेंचर्स
योगेश ने अपनी नौकरी जारी रखते हुए पिता से 10 लाख रुपये का निवेश लेकर मुंबई में 20 सीटों वाला एक छोटा कैफे खोला. वे दिन में नौकरी करते थे और शाम को कैफे में बैठकर रेस्टोरेंट बिजनेस की बारीकियां सीखते थे. साल 2011 से 2015 के बीच योगेश मुंबई से दिल्ली लौटे और युवाओं को केंद्र में रखकर रेस्टोरेंट्स शुरू किए.

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दिल्ली के कालकाजी में देशबंधु कॉलेज के पास, लक्ष्मी नगर और इडियम मॉल में खुले आउटलेट्स बेहद सफल रहे, जिससे उन्हें 20 लाख रुपये, 40 लाख और 60 लाख रुपये प्रतिमाह तक का राजस्व मिलने लगा. 

इसके बाद उन्होंने 'जंगल जंबूरी' और 'द फ्लाइंग डचमैन' जैसे कॉन्सेप्ट्स में शेयर्स खरीदे और काम किया. केवल यूथ-कैफे तक सीमित रहने के बजाय योगेश पूरे परिवार के लिए कुछ बड़ा और प्रीमियम बनाना चाहते थे, इसलिए 2015 में उन्होंने अपने पुराने वेंचर्स बेच दिए. 

शेफ हरपाल सिंह सोखी से मुलाकात और 'कारीगरी' का जन्म 

इस बीच कोरोना महामारी से ठीक पहले उनकी मुलाकात भारत के प्रसिद्ध सेलिब्रिटी शेफ हरपाल सिंह सोखी से हुई. दोनों ने मिलकर एक शेफ-ड्रिवन फैमिली डाइनिंग ब्रांड बनाने की योजना बनाई. लॉकडाउन के दौरान व्यापक रिसर्च के बाद साल 2021 में नोएडा से 'कारीगरी' रेस्टोरेंट का पहला आउटलेट शुरू किया गया.

कारीगरी की सबसे बड़ी खासियत इसके व्यंजनों के पीछे की कहानियां और उनका अनोखा नामकरण है, जैसे कि दीनानाथ चाट, बेला चमेली शर्बत वगैरह. यह ब्रांड अपने कारीगरों और प्रामाणिक उत्तर भारतीय/मुगलई स्वाद को समर्पित है. 

बिजनेस मॉडल और आज की सफलता

अब नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, चंडीगढ़, इंदौर, देहरादून और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में इनके 12 से अधिक बड़े प्रीमियम आउटलेट्स संचालित हो रहे हैं. कंपनी अपने विस्तार के लिए FOCO (Franchise Owned Company Operated) मॉडल अपनाती है, जिसमें फ्रेंचाइजी फीस करीब 70 लाख रुपये और सेटअप कॉस्ट 4 करोड़ रुपये होती है, जबकि संचालन और क्वालिटी का पूरा नियंत्रण कारीगरी अपने पास ही रखती है.

बता दें, करीब 220 करोड़ रुपये के वैल्यूएशन वाली यह कंपनी अब प्री-आईपीओ चरण की तैयारी में है. आज इस ब्रांड में 500 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं. योगेश शर्मा का मानना है कि हमेशा वही बिजनेस चुनें जिसके प्रति आप अंदर से जुनूनी हों. अपने आंकड़ों और वित्तीय हिसाब-किताब पर पूरी पकड़ रखें. सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है, सही विजन और निरंतर मेहनत ही आपको बड़ा बनाती है.

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