600 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे के आसपास बनेंगे नए औद्योगिक क्षेत्र: इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच मप्र का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनेगा - Bhopal News

Published on 15 अक्टू॰ 2026

भोपाल3 मिनट पहले

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मध्यप्रदेश में पहली बार 3 बड़े शहरों को जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे के आसपास इंडस्ट्रियल कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी है। इंदौर-भोपाल-जबलपुर के बीच प्रस्तावित करीब 600 किमी लंबे एक्सप्रेस-वे के आसपास चुनिंदा जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाएंगे। यानी यह एक्सप्रेस-वे सिर्फ शहरों को जोड़ने का रास्ता नहीं होगा, बल्कि नए उद्योग स्थापित करने का आधार भी बनेगा।

इसके लिए सरकार एक अलग कंपनी (एसपीवी) बनाएगी, जो सड़क के आसपास उद्योगों के लिए उपयुक्त जमीन तलाशेगी। कंपनी को जमीन अधिग्रहण के अधिकार भी दिए जा सकते हैं। प्रस्ताव गुरुवार को कैबिनेट में आ सकता है। मंजूरी मिली तो यह प्रदेश का पहला और सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर होगा।

एक साल में नए निवेश क्षेत्र तय होंगे

1. जबलपुर-भोपाल के बीच धरमपुरा में 954 एकड़ में मल्टी प्रोडक्ट इंडस्ट्रियल पार्क विकसित होगा। इस पर 576 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। यह जबलपुर से 40 किमी, सिवनी से 156 किमी, नागपुर से 260 किमी, भोपाल से 297 किमी दूर होगा।

2. भोपाल-इंदौर के बीच सीहोर जिले के आष्टा में 8,482 हेक्टेयर यानी करीब 21 हजार एकड़ में औद्योगिक पार्क प्रस्तावित है। इसके अलावा बड़ियाखेड़ी और झीलेला में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। यहां 6 हजार एकड़ सरकारी और मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम की जमीन है। 5 हजार हेक्टेयर निजी अधिग्रहीत करेंगे।

3. कैबिनेट की मंजूरी के बाद कंपनी बनेगी उद्योग विभाग ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले जमीन की उपलब्धता व सड़क संपर्क की संभावनाएं तलाश रहा है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अलग कंपनी गठित होगी। यह एक साल में तय करेगी कि एक्सप्रेस-वे के आसपास किन-किन जगहों पर नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा सकते हैं।

इधर, सांदीपनि स्कूलों की बसों का किराया भी बढ़ाने की तैयारी

गुरुवार सुबह 11 बजे कैबिनेट बैठक में निवाड़ी, मैहर, मऊगंज और पांढुर्ना में महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय खोलने और स्टाफ की मंजूरी का प्रस्ताव आएगा। सांदीपनि स्कूलों की बसों का किराया बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।

प्रस्ताव के मुताबिक, किराया राज्य के बजाय कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला समिति तय करेगी। प्रदेश के 19 जिलों में बस संचालन के लिए ऑपरेटर नहीं मिलने से करीब 1.5 लाख बच्चे परेशान हैं। विभिन्न विभागों की योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के प्रस्ताव भी रखे जाएंगे।

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