जन्माष्टमी पर कृष्ण बना इकलौता बेटा, गले की माला बनी काल; 6 साल के आर्यन की दर्दनाक मौत

Published on 4 सित॰ 2026

जन्माष्टमी पर कृष्ण बना इकलौता बेटा, गले की माला बनी काल; 6 साल के आर्यन की दर्दनाक मौत

जन्माष्टमी पर माता-पिता ने आर्यन को कान्हा बनाया था.

Rohtas News: बिहार के रोहतास जिले में जन्माष्टमी के दिन एक परिवार की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं. कोचस प्रखंड के भगीरथा गांव में छह साल के बच्चे की मोतियों की माला का एक दाना निगलने से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि मोती बच्चे की श्वासनली में फंस गया, जिससे उसकी सांस रुक गई. मृतक बच्चा अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था.

कृष्ण के रूप में सजाया था आर्यन

देशभर में जन्माष्टमी के मौके पर बच्चों को भगवान श्रीकृष्ण के रूप में सजाया जा रहा था. इसी तरह रोहतास के भगीरथा गांव में रहने वाले विमलेश यादव ने भी अपने छह साल के बेटे आर्यन यादव को कान्हा के रूप में सजाया था. आर्यन को पीले कपड़े पहनाए गए थे और उसके गले में मोतियों की माला पहनाई गई थी. कृष्ण के रूप में सजे अपने इकलौते बेटे को देखकर परिवार के लोग काफी खुश थे. घर में जन्माष्टमी की खुशियां मनाई जा रही थीं.

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माला का एक मोती निगलने के बाद बिगड़ी हालत

बताया गया कि इसी दौरान आर्यन ने गले में पहनी माला का एक मोती निगल लिया. मोती अंदर जाते ही उसकी तबीयत बिगड़ने लगी. परिवार के लोग घबरा गए और आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोचस लेकर पहुंचे. परिजनों को उम्मीद थी कि इलाज के बाद आर्यन ठीक हो जाएगा, लेकिन अस्पताल की इमरजेंसी में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

श्वासनली में फंस गया था मोती

चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अजीत कुमार के मुताबिक, आर्यन की श्वासनली में मोती का दाना फंस गया था. इससे उसकी सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हो गई और दम घुटने से उसकी मौत हो गई. आर्यन के शव को मौत के बाद परिजन अपने साथ ले गए. घटना की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया.

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इकलौते बेटे की मौत से टूटे माता-पिता

आर्यन विमलेश यादव का इकलौता बेटा था. विमलेश यादव भगीरथा गांव में किराये के मकान में परिवार के साथ रहते हैं और मशरूम उत्पादन का कारोबार करते हैं. जन्माष्टमी के दिन जिस बेटे को कृष्ण बनाकर परिवार खुशियां मना रहा था, कुछ ही देर बाद उसकी मौत की खबर से घर में मातम पसर गया. माता-पिता अपने इकलौते बेटे को खोकर बेसुध हो गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.

बच्चों को सजाते समय सावधानी जरूरी

आर्यन की मौत ने बच्चों को सजाने के दौरान सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. बच्चों के गले में माला, मोती, छोटे आभूषण या ऐसी कोई भी चीज पहनाते समय सावधानी जरूरी है, जिसे वे आसानी से मुंह में डाल सकते हैं. जन्माष्टमी पर अपने बेटे को कान्हा के रूप में सजाकर परिवार ने जिस दिन को खुशी के तौर पर यादगार बनाने की सोची थी, वही दिन उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन गया.

मोहित पंडित

मोहित पंडित

मोहित पंडित ने साल 2004 से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की. नई बात, सन्मार्ग, सोनभद्र जैसे अखबारों में वे अपनी सेवा दे चुके हैं. वे सीमांचल के समाचारों को सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करते हैं और स्थानीय घटनाओं को उच्च स्तर पर रिपोर्ट करने में निपुण हैं. उनकी लेखनी में संवेदनशीलता और नैतिकता झलकती है.

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