नेपाल में 6 दिन में 100 रेसक्यू; कौन हैं जिंदगी बचाने वाली 'उड़ती फरिश्ता' प्रिया अधिकारी?

Published on 3 सित॰ 2026

Nepal Flood: नेपाल दशकों की सबसे भीषण बाढ़ और भूस्खलन आपदा झेल रहा है। पानी, कीचड़ और मलबे ने पूरे समुदायों को घेर लिया है। ऐसे में नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा के तिमुरे क्षेत्र में फंसे लोगों के लिए हेलीकॉप्टर ही जीवनरेखा बने हुए हैं।

नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन प्रिया अधिकारी ने देश की सबसे भीषण बाढ़ और भूस्खलन आपदाओं में से एक के बीच महज छह दिनों में करीब 100 बचाव अभियान पूरे किए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले के तिमुरे क्षेत्र में फंसे लोगों के लिए आसमान से उतरते हेलीकॉप्टर अक्सर बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता बन गए। पानी, कीचड़, मलबा और संकरी हिमालयी घाटियों के बीच ये उड़ानें सामान्य बचाव कार्य नहीं, बल्कि लगातार जोखिम भरा अभियान है।

दरअसल, नेपाल इन दिनों दशकों की सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक झेल रहा है। बाढ़ और भूस्खलन ने गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को तहस-नहस कर दिया। तिमुरे जैसे इलाकों में जमीन पर पहुंचना लगभग असंभव हो गया। ऐसे में हेलीकॉप्टर जीवनरेखा बन गए। संकरी घाटी और उसके आसपास करीब 20 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए। कभी-कभी एक ही जगह पांच या छह विमान एक साथ उतरकर बचे लोगों को निकाल रहे थे। अधिकारी इन्हीं अभियानों में लगभग लगातार उड़ान भर रही हैं।

कीचड़ में लैंडिंग, हवा में भीड़

तिमुरे पहुंचने जितना मुश्किल था, वहां हेलीकॉप्टर उतारना उससे भी खतरनाक साबित हुआ। सीएनएन के एंडरसन कूपर से बात करते हुए अधिकारी ने बताया कि हवा से जो सतह ठोस जमीन जैसी दिखती है, वह अक्सर मोटी और अस्थिर कीचड़ होती है। हेलीकॉप्टर उसमें धंस सकता है। इसलिए पायलटों को लैंडिंग के बाद इंजन तुरंत बंद करने के बजाय विमान को चालू रखना पड़ता है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत उड़ान भरी जा सके।

हवा में स्थिति और जटिल थी। एक ही संकरी घाटी में लगभग 20 हेलीकॉप्टर उड़ रहे थे। पायलटों को लगातार रेडियो पर बात करनी पड़ती थी, अपनी स्थिति बतानी पड़ती थी और लैंडिंग पॉइंट का समन्वय करना पड़ता था। अधिकारी ने कहा कि जरा कल्पना कीजिए कि उस घाटी में 20 हेलीकॉप्टर लगातार एक-दूसरे से बात करते हुए उड़ रहे हैं। नेविगेशन, रेडियो संवाद और दूसरे विमानों की स्थिति पर नजर रखना एक साथ करना पड़ता था। एक छोटी चूक भी टकराव या दुर्घटना का कारण बन सकती थी।

यह 2015 से भी बड़ा है

हवाई दृश्य से जो तबाही दिखी, वह अधिकारी के लिए भी चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा कि यह घटना कई मायनों में नेपाल के 2015 के भूकंप से भी बड़ी लगती है, क्योंकि विनाश एक छोटी घाटी में केंद्रित था। लोग खत्म हो गए। शव बिखरे पड़े थे। बचे हुए लोग हेलीकॉप्टर का इंतजार कर रहे थे, जो उनके लिए बाहर निकलने का आखिरी सहारा था।

उन्होंने बताया कि पहले दो दिनों में ही तिमुरे से 200 से अधिक लोगों को निकाला गया। इस काम में नेपाली सेना के अगस्ता हेलीकॉप्टर समेत कई विमान शामिल थे। उन्होंने कहा कि सब कुछ खत्म हो गया है। पांच जलविद्युत परियोजनाएं चली गईं, जीवन चला गया। फिर भी जो लोग बच गए, उन्हीं को देखकर मुस्कान आती है।

वो पल जो आगे बढ़ाते हैं

कॉकपिट से अधिकारी ने मौत और बर्बादी के साथ-साथ जिंदगी के अधूरे संकेत भी देखे। उन्होंने कहा कि हर बार लैंडिंग पर आसपास लोग दिखते हैं तो वे हाथ हिलाकर अभिवादन करती हैं और कहती हैं- आप बच गए। कई बार हेलीकॉप्टर में लेटे लोग मुश्किल से आंखें खोल पाते हैं। फिर भी बचे हुए लोगों की मुस्कान उन्हें थकान के बावजूद आगे बढ़ने की वजह देती है।

बातचीत में अधिकारी ने आपदा में फंसी अमेरिकी-भारतीय महिला राधिका के माता-पिता को खोजने की कोशिशों का जिक्र किया। उन्होंने दो नेपाली पुरुषों की भी तलाश की। उनमें से एक ईशा फाउंडेशन में स्वयंसेवा कर रहा था और दूसरा तिमुरे के एक बैंक में काम करता था। उन्होंने कहा कि वे मेरे रिश्तेदार नहीं हैं। लेकिन ऊपर से देखे गए दृश्य ने ऐसा जुड़ाव पैदा कर दिया जिसे आसानी से तोड़ा नहीं जा सकता।

उन्होंने एक और तत्काल जरूरत की ओर इशारा किया, वह है शवों को ले जाने वाले बैग। बचाव दल तबाह इलाकों से पीड़ितों के शव निकालना जारी रखे हुए थे। जिंदा लोगों को निकालने के साथ-साथ मृतकों को सम्मान के साथ वापस लाना भी अभियान का हिस्सा बन गया।

केबिन क्रू से कैप्टन तक

पुरुष प्रधान विमानन क्षेत्र में अधिकारी का सफर आसान नहीं था। उन्होंने पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई की और शुरुआत में केबिन क्रू के रूप में काम किया। एक हेलीकॉप्टर की रोमांचक उड़ान ने उनमें उड़ान भरने की इच्छा जगाई। इसके बाद उन्होंने फिलीपींस जाकर हेलीकॉप्टर प्रशिक्षण लिया, पेशेवर पायलट बनने के लिए जरूरी उड़ान घंटे पूरे किए और 2017 में पूर्णकालिक हेलीकॉप्टर पायलट बन गईं।

इसके बाद उन्होंने हिमालय में उच्च ऊंचाई वाले खोज और बचाव अभियानों में विशेषज्ञता हासिल की। उनके काम में घायल पर्वतारोहियों को बचाना शामिल रहा है, जिनमें करीब 6,200 मीटर तक की ऊंचाई वाले अभियान भी हैं। करियर की शुरुआत में मिली शंकाओं को तोड़ते हुए वे नेपाल की पहली महिला हेलीकॉप्टर कैप्टन बनीं। ऊंचाई, खराब मौसम और दुर्गम इलाकों में उड़ान का लंबा अनुभव होने के बावजूद उन्होंने कहा कि इस आपदा के पैमाने के लिए पूरी तरह तैयार होना मुश्किल था।

'हमें इसी के लिए प्रशिक्षित किया गया है'

बातचीत के दौरान अधिकारी ने स्वीकार किया कि ज्यादातर पायलट लगातार उड़ानों से बहुत थके हुए हैं। लेकिन उन्होंने अपने काम को असाधारण करिश्मा नहीं बताया। उनके और साथी पायलटों के लिए यह वही काम है जिसके लिए उन्हें प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि हमें इसी के लिए प्रशिक्षित किया गया है।