Aug 25, 2026 10:23 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

केरल में गाड़ियों को मॉडिफाई करवाने वालों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। केरल हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मोटर वाहन विभाग (MVD) अवैध रूप से मॉडिफाइड गाड़ियों के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू कर दिया है।

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केरल में गाड़ियों को मॉडिफाई करवाने के शौकीनों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। केरल हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद मोटर वाहन विभाग (MVD) और पुलिस ने पूरे राज्य में अवैध रूप से मॉडिफाइड गाड़ियों के खिलाफ एक बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। अदालत के सख्त आदेशों के बाद अब हर एक गैर-कानूनी मॉडिफिकेशन के लिए 5,000 रुपये का भारी जुर्माना लगाया जा रहा है। हाल ही में बाढ़ राहत कार्य में लगी एक मॉडिफाइड थार पर जुर्माना ठोके जाने के बाद यह पूरा मामला विवादों में आ गया और कोर्ट तक पहुंच गया। आइए जानते हैं पूरी खबर के बारे में विस्तार से।
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अब कोई ढील नहीं बरती जाएगी
इस नई कार्रवाई के तहत सिर्फ चालान काटकर छोड़ नहीं दिया जाएगा, बल्कि गाड़ी मालिकों को पसीने छूटने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, चालान भरने के अलावा मालिकों को गाड़ी में से सारे अवैध पार्ट्स और मॉडिफिकेशन हटाकर उसे दोबारा पुरानी हालत में लाना होगा। इसके बाद ही वाहन को फिर से इंस्पेक्शन के लिए पेश करना होगा। यानी हरी झंडी मिलने के बाद ही उसे सड़क पर चलाने की इजाजत मिलेगी। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि नियमों को ठेंगा दिखाने वालों के खिलाफ अब कोई ढील नहीं बरती जाएगी।
कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी
हाईकोर्ट ने खास तौर पर सड़कों पर दूसरे चालकों की आंखें चौंधियाने वाली चौड़ी टायरों, तेज एलइडी लाइट बार और लाल-नीली स्ट्रोब लाइटों पर कड़ी नाराजगी जताई है। इसके अलावा, सड़कों पर कानफोड़ू आवाज निकालने वाले और साइलेंसर से आग की लपटें छोड़ने वाले आफ्टरमार्केट एग्जॉस्ट पर भी सख्त पाबंदी की बात कही गई है। कोर्ट का मानना है कि ऐसे बदलाव बाकी लोगों के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसी को देखते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर ने सभी आरटीओ से 3 सितंबर तक पिछले तीन महीनों में हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
जांच के दायरे में इन्फ्लुएंसर्स भी
इस कार्रवाई की आंच अब उन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स तक भी पहुंच रही है जो ऐसी मॉडिफाइड गाड़ियों के वीडियो और रील्स बनाकर उन्हें बढ़ावा देते हैं। अधिकारियों से ऐसे लोगों पर ली गई कार्रवाई की अलग से रिपोर्ट मांगी गई है। हालांकि, दूसरी तरफ राज्य सरकार का रुख थोड़ा नरम दिखाई दे रहा है। केरल के परिवहन मंत्री सी. पी. जॉन ने हाल ही में कहा है कि सरकार 100 दिनों के भीतर गाड़ियों में छोटे-मोटे और जरूरी बदलावों को कानूनी मंजूरी देने पर विचार कर रही है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
क्या कहता है नियम?
भारत में मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 52 के तहत गाड़ियों के ओरिजिनल लुक या बनावट में बदलाव करना मना है। लेकिन केरल सरकार ने युवाओं से वादा किया था कि वे सुरक्षित मॉडिफिकेशन को हरी झंडी देंगे। पहले जारी की गई 18 'सुरक्षित बदलावों' की सूची से लोग खुश नहीं थे, इसलिए अब एमवीडी ने एक पब्लिक सर्वे शुरू किया है। इस सर्वे के जरिए जाना जा रहा है कि लोग किस तरह के बदलाव चाहते हैं। अगर सबकुछ ठीक रहा तो सरकार आने वाले समय में कुछ जरूरी और सुरक्षित बदलावों को फीस लेकर मंजूरी दे सकती है।
