माता-पिता की मौत,पढ़ाई छूटी, अब NEET में 422वीं रैंक आई: 2020 में सरकारी मेडिकल सीट नहीं मिली तो घर लौटे; 5 साल तक दुकान चलाई - Kota News

Published on 20 जुल॰ 2026

कोटा47 मिनट पहले

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कोटा से नीट की कोचिंग करने वाले अभिषेक कुमार अग्रवाल का आखिरकार डॉक्टर बनने का सपना पूरा हो पाएगा। अभिषेक ने नीट यूजी-2026 में 720 में से 673 अंक हासिल कर ऑल इंडिया 422वीं रैंक हासिल की है।

यहां तक पहुंचने के रास्ते में अभिषेक के जीवन में कई बाधाएं आई। 2020 नीट परीक्षा 600 अंक मिलने पर भी सरकारी मेडिकल सीट नहीं मिल पाई। वे दो राज्यों के डोमिसाइल (मूल निवास) नियमों में फंस गए।

आर्थिक तंगी और निराशा के बीच वे कोटा छोड़कर वापस अपने घर असम चले गए। इस बीच इनके पिता और फिर मां का भी निधन हो गया। अभिषेक पूरी तरह टूट चुके थे। पांच साल पढ़ाई से दूर हो गए थे,तब उनकी सात बहनें सहारा बनी और भाई को वापस पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया। आखिरकार उनका सपना पूरा होता दिख रहा है।

पढ़िए- अभिषेक अग्रवाल के संघर्ष और सक्सेस की कहानी

दोनों राज्यों के कड़े नियमों के कारण सीट नहीं मिली थी

अभिषेक अग्रवाल मूल रूप से असम के रहने वाले हैं। उनका डॉक्टर बनने का सपना है। वे स्कूल के दिनों से होनहार स्टूडेंट्स में रहे हैं। सीबीएसई 10वीं में 9.8 सीजीपीए आए थे। इसके बाद अपना सपना पूरा करने 2020 में कोटा आ गए थे। यहां रहकर उन्होंने नीट की तैयारी शुरू कर दी थी।

कड़ी मेहनत के दम पर 2020 में नीट परीक्षा में 600 अंक हासिल किए थे। पर कहते हैं न कि नियति के आगे किसी की नहीं चलती। अभिषेक की स्कूली शिक्षा राजस्थान से हुई थी और जन्म असम में हुआ था। दोनों राज्यों के कड़े डोमिसाइल (मूल निवास) नियमों के कारण उन्हें राज्य का स्टेट कोटा नहीं मिल सका था।

इसके अलावा 600 अंक आने के बाद भी 15 प्रतिशत ऑल इंडिया कोटा के तहत भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट नहीं मिल पाई थी। आर्थिक तंगी और निराशा के बीच आखिरकार उन्हें कोटा छोड़कर घर लौटना पड़ा।

अभिषेक सात बहनों के इकलौते भाई हैं। जब दुखों के इस भयानक दौर में पढ़ाई की उम्मीद पूरी तरह टूटती दिख रही थी, तब उनकी बहनों ने पढ़ाई में मदद की।

अभिषेक सात बहनों के इकलौते भाई हैं। जब दुखों के इस भयानक दौर में पढ़ाई की उम्मीद पूरी तरह टूटती दिख रही थी, तब उनकी बहनों ने पढ़ाई में मदद की।

माता-पिता का निधन, डॉक्टर बनने का सपना टूट चुका था

अपने घर असम लौटते ही अभिषेक की जिंदगी पूरी तरह बदल गई। वो मान बैठे थे कि उनके डॉक्टर बनने का सपना कभी पूरा नहीं होगा। किताबों की जगह उनके हाथ में हार्डवेयर और केमिकल की पारिवारिक दुकान का बही-खाता आ गया था। साल 2021 में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उनके पिता का निधन हो गया।

पिता को खोने के गम से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि नवंबर 2024 में दिल का दौरा पड़ने से मां का साया भी सिर से उठ गया था। माता-पिता के असमय चले जाने से परिवार की पूरी जिम्मेदारी अभिषेक के कंधों पर आ गई थी। बिजनेस संभालते हुए दिन बीत रहे थे।

7 बहनें बनीं अपने भाई की ढाल

पढ़ाई की उम्मीद पूरी तरह टूटती दिख रही थी। तब अभिषेक की सात शादीशुदा बहनों नीलम, शीतल अग्रवाल, सीमा अग्रवाल, सोनिया गोयल, प्रिया बंसल, पायल पोद्दार और डिंपल अग्रवाल ने अपने भाई की ढाल बनने का फैसला किया।

बहनों ने न केवल अभिषेक का हौसला बढ़ाया, बल्कि कोटा में उनकी पढ़ाई और रहने का पूरा खर्च खुद उठाने की जिम्मेदारी ली। बहनों के इसी अटूट भरोसे और संबल के दम पर फरवरी 2025 में अभिषेक ने जिंदगी का 'री-स्टार्ट' बटन दबाया और मई 2025 में एक बार फिर कोटा आए।

जब नीट यूजी-2026 का परिणाम आया, तो उन्होंने देश के टॉप-500 विद्यार्थियों में अपनी जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया।

जब नीट यूजी-2026 का परिणाम आया, तो उन्होंने देश के टॉप-500 विद्यार्थियों में अपनी जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया।

एम्स से एमबीबीएस करना चाहते हैं अभिषेक

अभिषेक 2025 से लगातार नीट की तैयारी में जुटे थे। अभिषेक ने दिन-रात एक कर मेहनत की और जब नीट यूजी-2026 का परिणाम आया, तो उन्होंने देश के टॉप-500 स्टूडेंट्स में अपनी जगह बनाकर सबको हैरान कर दिया। अब अभिषेक किसी प्रतिष्ठित एम्स से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं। उनका सपना भविष्य में एक सफल न्यूरोसर्जन बनकर समाज की सेवा करना है।

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