देहरादून में करोड़ों के भूमि घोटाले का मुख्य आरोपी नवीन मित्तल गिरफ्तार, कोर्ट ने 5 दिन की रिमांड में भेजा - Doon Horizon

Published on 7 सित॰ 2026

देहरादून में जाली राजस्व रिकॉर्ड बनाकर करोड़ों की जमीन बेचने वाले सिंडिकेट के मुख्य मास्टरमाइंड नवीन कुमार मित्तल को ईडी ने गिरफ्तार कर 5 दिन की कस्टडी में लिया है।

दून हॉराइज़न, देहरादून (07 सितंबर): राजधानी देहरादून में सरकारी रिकॉर्ड रूम के राजस्व दस्तावेजों में हेराफेरी कर करोड़ों की जमीन बेचने वाले अंतरराज्यीय भू-माफिया सिंडिकेट पर प्रवर्तन निदेशालय ने कड़ा प्रहार किया है।

यह भी पढ़ें : दून की सड़कों पर खुदे गड्ढों से मिलेगी राहत, अब 15 दिन में पूरी करनी होगी मरम्मत

केंद्रीय जांच एजेंसी ने व्यापक स्तर पर सामने आए देहरादून जमीन घोटाला (Dehradun Land Scam) मामले के मुख्य साजिशकर्ता और सबसे बड़े लाभार्थी नवीन कुमार मित्तल को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी 3 सितंबर को अमल में लाई गई, जिसके बाद विशेष पीएमएलए कोर्ट ने आरोपी को पांच दिन की प्रवर्तन निदेशालय (ED) हिरासत में सौंप दिया।

रिकॉर्ड रूम से छेड़छाड़ कर तैयार किए जा रहे थे जाली दस्तावेज

उत्तराखंड पुलिस द्वारा देहरादून के विभिन्न थानों में दर्ज कई मुकदमों के आधार पर ईडी ने यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की थी। राज्य पुलिस दो प्राथमिक मामलों में पहले ही आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है, जिसमें नवीन मित्तल को पूरे नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बताया गया था। जांच में सामने आया कि गिरोह ने रजिस्ट्री दफ्तर और राजस्व अभिलेखागार के मूल रिकॉर्ड से सीधे छेड़छाड़ की। इसके बाद सह-अभियुक्तों को जमीन का असली वारिस या स्वामी दर्शाते हुए जाली स्वामित्व दस्तावेज गढ़े गए।

इन जाली कागजों के आधार पर अनजान खरीदारों को प्लॉट बेचकर उनके पक्ष में फर्जी विक्रय विलेख (Sale Deed) निष्पादित करा दिए गए। पीड़ितों को जब तक अपने साथ हुए धोखे की भनक लगती, तब तक उनकी गाढ़ी कमाई माफिया की जेब में पहुंच चुकी थी।

₹3.24 करोड़ की काली कमाई और सीएफएसएल का बड़ा खुलासा

फर्जी सौदों से हासिल हुई लगभग 3.24 करोड़ रुपये की रकम को सीधे अपने खाते में लेने के बजाय नवीन मित्तल ने सुनियोजित तरीके से सह-आरोपी के नाम पर खोले गए बैंक खातों में पार्क कराया। हालांकि, सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की जांच ने इस पूरे खेल को बेनकाब कर दिया।

फोरेंसिक पड़ताल में तकनीकी रूप से यह सिद्ध हो गया कि सह-आरोपी के नाम वाले बैंक खाते का वास्तविक संचालन खुद नवीन कुमार मित्तल कर रहा था। बाद में इस काली कमाई को अपनी निजी संस्थाओं और कंपनियों में ट्रांसफर कर वास्तविक व्यापारिक आय के रूप में दिखाया गया।

मामले में ईडी पहले ही विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष हुमायूं परवेज, मोहम्मद वकील और मुकेश कुमार गुप्ता के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

गवाहों पर दबाव और डिजिटल साक्ष्यों की बरामदगी

जांच एजेंसी के अनुसार, मित्तल लगातार समन की अनदेखी कर रहा था। न केवल वह पेशी से बचता रहा, बल्कि उसने गवाहों को प्रभावित करने और अपने ही सगे-संबंधियों को बयान दर्ज कराने से रोकने की कोशिश की। अवैध लेनदेन को सही ठहराने के लिए बैकडेटेड कागजात तैयार करने के प्रयास भी पकड़े गए।

अगस्त 2026 में आरोपी के ठिकानों पर ली गई तलाशी में बड़ी संख्या में आपत्तिजनक फाइलें और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए थे। एजेंसी अब रिमांड अवधि के दौरान अन्य विवादित रजिस्ट्रियों और सिंडिकेट में शामिल प्रशासनिक कड़ियों की पड़ताल कर रही है।

यह भी पढ़ें : उत्तराखंड में 2013 की रुकी नियुक्तियों पर उबाल, देहरादून शहीद स्मारक पर धरने के 85 दिन पूरे