कोलार सड़क निर्माण: 4105 पेड़ कटे, अब पौधे लगाने के पैसे पर एनजीटी सख्त - Bhopal News

Published on 8 अक्टू॰ 2026

भोपाल42 मिनट पहले

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कोलार में सड़क निर्माण के दौरान 4105 पेड़ काटे गए, लेकिन उनकी भरपाई के लिए जमा कराए गए पैसों और पौधरोपण का हिसाब अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सवालों के घेरे में है।

नितिन सक्सेना की याचिका पर चल रहे मामले में एनजीटी की भोपाल बेंच ने सुनवाई में भोपाल नगर निगम की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद पौधरोपण और उसके लिए जमा राशि के इस्तेमाल पर सख्ती दिखाई है। मामले में कोलार में सड़क निर्माण के दौरान 4105 पेड़ काटे जाने की शिकायत की गई थी।

एनजीटी के सामने पेश जानकारी के अनुसार भोपाल में वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक विभिन्न विभागों, सरकारी संस्थाओं और निजी एजेंसियों को 6911 पेड़ काटने की अनुमति दी गई। इसके बदले 24,706 पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया। रिकॉर्ड में 19,152 पौधे लगाए जाने की जानकारी दी गई है।

इस दौरान पेड़ कटाई के बदले 3 करोड़ 52 लाख 69 हजार 800 रुपए जमा हुए, लेकिन 1 जनवरी 2026 तक सिर्फ 95 लाख 85 हजार 101 रुपए खर्च किए गए। एनजीटी ने बीएमसी के रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा कि जमा राशि का उचित इस्तेमाल नहीं हुआ और कुछ राशि पौधरोपण के बजाय दूसरे कामों में खर्च हुई। ट्रिब्यूनल ने कहा कि समय पर पौधरोपण नहीं होने से पेड़ काटने के बदले हरित क्षेत्र बढ़ाने का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हुआ।

नए पौधों की जगह पुराने पौधों के बीच भर दिए गैप सुनवाई में यह भी सामने आया कि कुछ जगहों पर नए क्षेत्र में पौधरोपण करने के बजाय पहले से मौजूद पौधों के बीच खाली जगहों में पौधे लगाए गए। एनजीटी ने इसे नया क्षतिपूरक पौधरोपण मानने पर भी सवाल उठाया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि तकनीकी रूप से यह पुराने पौधों की भरपाई है, न कि अतिरिक्त हरित क्षेत्र तैयार करना।

एनजीटी ने कहा कि पौधरोपण मानसून में पूरा होना चाहिए था, लेकिन काम मानसून के बाद किए जाने की बात सामने आई। इसे लेकर ट्रिब्यूनल ने नाराजगी जताई और एक महीने में चिन्हित खुले क्षेत्रों में पौधरोपण पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही पौधों की सिंचाई की व्यवस्था करने को कहा।

जज, याचिकाकर्ता और सरकार की ओर से ये रहे मौजूद:

मामले की सुनवाई न्यायिक सदस्य जस्टिस श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने की। याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना की ओर से अधिवक्ता हरप्रीत सिंह गुप्ता, प्रतिपाल सिंह गुप्ता, सृजन जैन और हेमंत गुप्ता मौजूद रहे। नगर निगम की ओर से गुंजन चौकसे और दीक्षा चौकसे ने पक्ष रखा।

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