Umaria News: मध्य प्रदेश में उमरिया जिले का वह गांव जहां 14 जुलाई 1985 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी आदिवासियों का हाल जानने आए थे और पैदल लोगों के घर गए थे. उसके बाद उस गांव में बिजली और सड़क की सुविधा तो मिल गई, लेकिन उस समय मिट्टी की रोड बना दी गई और फिर उसके बाद किसी ने भी मुड़ कर उस गांव की तरफ नहीं देखा. अब वह गांव मानपुर जिला पंचायत के ग्राम पंचायत कोडार में आता है, और 41 वर्षों से विकास की बाट जोह रहा है. ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने आवेदन, निवेदन नहीं किया, अपनी तरफ से हर संभव प्रयास करके ग्रामीण थक चुके हैं. ग्राम पंचायत के सरपंच से लेकर जिले के कलेक्टर और विधायक तक आवेदन देकर थक गये, लेकिन इनकी सुनने वाला कोई नहीं है.
हालांकि, देश ही प्रदेश सभी सरकार अपने आप को आदिवासी हितैषी बताती हैं और उनके उत्थान की बड़ी-बड़ी बात करती हैं. इतना ही नहीं, विशेष संरक्षित जनजाति का दर्जा भी बैगा, भारिया और सहरिया को दिया गया है. यहां तो आदिवासी बैगा जनजाति ही निवास करती है, और यहां की विधायक भी आदिवासी समाज से आती हैं. पूर्व में आदिवासी विभाग की कैबिनेट मंत्री भी रह चुकी है और 6 पंचवर्षीय से लगातार भाजपा की ही सरकार है और भाजपा के ही विधायक का कब्जा है. विधानसभा सीट भी एसटी है उसके बाद आदिवासी समाज सात सौ मीटर सड़क के लिए तरस रहा है. ऐसा नहीं है कि प्रयास नहीं किया गया, जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने भी पत्र लिख कर प्रशासन से मांग की है कि यहां सड़क बनाई जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया. हो सकता है कि यहां तत्कालीन कांग्रेस के प्रधानमंत्री आए थे जिसके कारण भाजपा की सरकार ध्यान नहीं दे रही है.
700 मीटर सड़क के लिए 41 साल से इंतजार
खैर मामला जो भी हो शिक्षा के लिए किस हद तक देश का भविष्य परेशानी झेल रहा है. तस्वीरें खुद बयां कर रही हैं. हर रोज कीचड़ से सनकर स्कूल तक जाना किसी जंग लड़ने से कम नहीं है. करीब 1 किमी का यह रास्ता बच्चों की पढ़ाई पर आड़े आ रहा है. हर साल इस कीचड़ से होकर पढ़ाई करना बच्चों के लिए मुसीबत बन गया है, ऐसा नहीं है कि ग्रामीणों ने शिकायत नहीं दर्ज कराई है, मगर न तो जन प्रतिनिधियों ने इस ओर कदम बढ़ाया और न ही जिला प्रशासन ने कोई पहल की, जिसके कारण तीन पंचायतों के बच्चे बूढ़े और खासकर प्रसूताओं को इस बरसात में परेशानी बढ़ जाती है.
गांव के लोगों ने क्या कहा?
वहीं, गांव के ही रामू बैगा ने बताया कि यहां इतनी परेशानी है कि तीन से चार गांव के लोगों का आना जाना है, कोई डिलीवरी वाली को ले जाना हो तो नहीं हो पाता है. कोई गाड़ी भी नहीं जाती है. हम विधायक जी, कलेक्टर साहब, पंच, सरपंच सभी को आवेदन दिये लेकिन कोई नहीं सुनता तो क्या करें. हम चाहते हैं कि ये रोड बन जाए तो सभी का भला हो.
गांव के गज्जू बैगा ने बताया कि हम कोड़ार पंचायत के आदिवासी हैं. हमको रोड और पानी की परेशानी है. कई साल से परेशान हैं, हर जगह रोड बना है तो हमको भी लगता है कि हमारे यहां भी रोड बन जाए. डिलीवरी वाली महिलाओं को यहीं से ले जाते हैं. गाड़ी रोड में रहती है हम लोग उठा कर ले जाते हैं. यहां हम लोग 15 घर के बैगा समाज के लोग हैं. सरपंच सचिव कुछ नहीं करते हैं, सचिव अपने अकेले घर के लिए रोड बनवा लिया है, लेकिन हम लोग आज भी परेशान हैं.
कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर छात्र
गांव की ही पिंकी यादव बताती है कि रोड बहुत खराब है, आने जाने में दिक्कत होती है. बच्चे स्कूल जाते हैं उनकी ड्रेस और बैग खराब हो जाते हैं. जब से हम जानने लायक हुए हैं तब से रोड खराब है, बहुत कीचड़ होता है. लोग गिरते हैं उनके हाथ पैर टूट जाते हैं हम चाहते हैं कि जल्दी से जल्दी इस रोड का निर्माण हो जाए.
गौरतलब है कि मानपुर विधानसभा क्षेत्र 90 की विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मीना सिंह ने चुनाव के समय दावा किया था कि हमारे विधानसभा क्षेत्र का पूर्ण विकास हो चुका है. अब जनता जो कहेगी वह कार्य किए जाएंगे, लेकिन उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र का यह ग्राम पंचायत उनके विकास को आईना दिखा रहा है कि कितना विकास हुआ है. इस पंचायत को देख कर तो लगता है कि सारे विकास कागजों में हुए हैं.
रिपोर्ट- सुरेंद्र त्रिपाठी/ उमरिया

आशू मोहम्मद
राजनीति से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी, नई चीजों को पढ़ने और सीखने की ललख, पाठकों के सामने सरल भाषा व शब्दों में देश दुनिया से जुड़ी खबरों को परोसने का काम टीवी9 के साथ जारी है. वहीं अगर इससे पहले की बात की जाए तो कानपुर में जन्मे आशू मोहम्मद ने साइंस से ग्रेजुएशन करने के बाद कानपुर यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर, टीवी9 भारतवर्ष से 2022 में करियर की शुरुआत की. डिजिटल मीडिया में करीब एक साल का अनुभव, अभी तक यह सिलसिला टीवी9 भारतवर्ष के साथ जारी है. डिजिटल मीडिया की दुनिया में लिखने-पढ़ने, साथ ही 'न्यू मीडिया' की बारीकियों और चुनौतियों को समझने की कोशिश जारी है.
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