पहाड़ के इन 4 अनाजों पर ICMR की नजर, मंडुआ से कोदा तक पोषण का राज खोज रहे वैज्ञानिक

Published on 2 सित॰ 2026

उत्तराखंड के मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे पारंपरिक अनाजों के पोषक तत्वों पर ICMR-NIN में शोध जारी है। जानिए वैज्ञानिकों ने बच्चों के खान-पान, मोटापे, एनीमिया और पोषण सुरक्षा को लेकर क्या महत्वपूर्ण जानकारी दी।

उत्तराखंड की पहाड़ी खेती में सदियों से इस्तेमाल होने वाले मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे पारंपरिक अनाज अब वैज्ञानिक शोध के केंद्र में हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान यानी ICMR-NIN में इन स्थानीय कृषि उत्पादों के विशेष पोषक तत्वों को लेकर अध्ययन किया जा रहा है।

पीआईबी देहरादून की ओर से आयोजित हैदराबाद प्रेस दौरे के दूसरे दिन उत्तराखंड के 15 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान का दौरा किया। इस दौरान संस्थान में पोषण अनुसंधान और जन स्वास्थ्य से जुड़े कामों की जानकारी साझा की गई।

मंडुआ, झंगोरा और कोदा के पोषण पर रिसर्च

ICMR-NIN की निदेशक डॉ. भारती कुलकर्णी ने बताया कि उत्तराखंड के मंडुआ, झंगोरा, चौलाई और कोदा जैसे स्थानीय अनाजों के पोषक तत्वों का अध्ययन किया जा रहा है। इन फसलों की पोषण संबंधी विशेषताओं को वैज्ञानिक आधार पर समझने की दिशा में शोध जारी है। उन्होंने रागी यानी फिंगर मिलेट को लेकर चल रहे अध्ययनों का भी जिक्र किया। इसके सेवन का एनीमिया पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसे समझने के लिए नैदानिक और विश्लेषणात्मक अध्ययन किए जा रहे हैं।

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बच्चों में छोटी उम्र से बनें स्वस्थ खाने की आदतें

डॉ. भारती कुलकर्णी ने कहा कि स्वस्थ खान-पान की आदतों का विकास बचपन की शुरुआती अवस्था से ही किया जाना चाहिए। उन्होंने आहार संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए विशेष रूप से दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी से बचने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के सामने कुपोषण का दोहरा बोझ मौजूद है। एक ओर अल्पपोषण और पोषक तत्वों की कमी की चुनौती है, तो दूसरी ओर बच्चों और युवाओं में बढ़ते अधिक वजन और मोटापे की समस्या भी चिंता का विषय बन रही है।

केवल पेट भरना ही पोषण सुरक्षा नहीं

ICMR-NIN के अनुसार भोजन की उपलब्धता और पोषण सुरक्षा एक ही बात नहीं हैं। केवल पर्याप्त खाना मिलने से बेहतर पोषण सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए भोजन में विविधता और स्वस्थ खान-पान की आदतें भी जरूरी हैं। तकनीकी सत्र में संस्थान के वैज्ञानिक-जी डॉ. सुब्बा राव ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी और लोगों की रोजमर्रा की खान-पान की आदतों के बीच मौजूद अंतर को कम करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने खाद्य संबंधी भ्रांतियों से बचते हुए प्रमाण आधारित जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने ICMR-NIN की प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया और खाद्य विश्लेषण व लिपिड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में चल रहे शोध कार्यों को समझा। प्रेस टूर के सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत प्रतिनिधिमंडल ने हैदराबाद के सालार जंग संग्रहालय का भी भ्रमण किया।

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