प्रेमसंस मोटर धोखाधड़ी केस : डायरेक्टर समेत 4 आरोपियों ने किया सरेंडर, मिली बेल

Published on 14 अग॰ 2026

Ranchi : प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर समेत 4 आरोपियों ने चुटिया 95/2025 केस में सरेंडर कर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरा. इसके बाद मामले के सभी चारों आरोपियों को अपर न्यायुक्त सार्थक शर्मा की कोर्ट ने जमानत प्रदान कर दी. जिन्हें जमानत मिली है उनमें प्रेमसंस मोटर के डायरेक्टर पुनीत पोद्दार के अलावा अवध पोद्दार, कंपनी के नेक्सा शोरूम के सेल्स मैनेजर शैलेश कुमार और जनरल मैनेजर  लिंगराज पट्टाजोशी आरोपी हैं.

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दरअसल, धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में विवेक आर्या ने चुटिया थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में प्रेमसंस मोटर पर ग्राहकों से प्रति कार 1.20 लाख रुपये की ठगी करने का आरोप लगाया है. विवेक ने थाने में दर्ज प्राथमिकी में कंपनी पर ग्राहकों से सालाना 3600 करोड़ रुपये की ठगी का उल्लेख किया है. 

विवेक आर्या के भाई ने प्रेमसंस मोटर से एक कार खरीदने के लिए पैसे का भुगतान किया था. लेकिन कार की डिलीवरी करने के बजाए डील कैंसिल कर पैसे वापस कर दी गई थी. 

क्या है मामला 

विवेक द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में यह कहा गया है कि वह प्रेमसंस मोटर के नेक्सा शोरूम में अपने भाई दयानंद कुमार के नाम पर कार बुक करने गये थे. उन्होंने डेल्टा मॉडल की कार पसंद किया. उन्हें कार की कीमत 13,59,081 रुपये बतायी गयी.

विवेक को पुरानी कार को बदलना था. पुरानी कार की कीमत 6.40 लाख रुपये आंकी गयी. एक्सचेंज बोनस के रूप में 90 हजार रुपये बतायी गयी. एक्सचेंज वैल्यू और पुरानी कार की कीमत को नयी कार की कीमत में घटाने पर उन्हें 6,29,091 रुपये देना था.

इसके बाद उन पर कंपनी के माध्यम से ही इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए दबाव बनाया गया. उन्होंने कुल 3,33,599 (33,599 और 3,00000) रुपये कंपनी में जमा कराया. 

प्राथमिकी में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी पुरानी कार के लिए तय की गयी 6.40 लाख रुपये में से 10 हजार रुपये एडजस्ट नहीं किया जा रहा था. विवाद के इस मुद्दे पर बातचीत चल ही रही थी कि कंपनी ने उनकी अनुमति के बिना ही कार का रजिस्ट्रेशन करा दिया. इसकी जानकारी उन्हें बाद में मिली. 18 अप्रैल 2025 को वह कार की डिलीवरी लेने गये. उस वक्त उनसे 1.70 लाख रुपये जमा कराया गया. 

इसके बाद उन्होंने अपने द्वारा जमा कराये गये पैसों का पूरा बिल मांगा. लेकिन कंपनी ने उन्हें बिल नहीं दिया. बिल के नाम पर रात के आठ बजे तक बैठाये रखा. इसके बाद उन्हें पुरा डिटेल मेल पर भेजने की बात कही गयी. लेकिन दूसरे दिन उन्हें मेल कर कार के सिलसिले में किये गये लेन-देन के रद्द करने की जानकारी दी गयी. 

विवेक ने कंपनी लेन-देन रद्द करने के बाद कंपनी द्वारा दिये गये बिल और लेन-देन के हिसाब को देख कर इस बात की गणना की कि उनसे 1.20 लाख रुपये ज्यादा लिया गया. इस तरह विवेक ने कंपनी की सालाना बिक्री के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि कंपनी सालाना 3600 करोड़ रुपये का घोटाला कर लोगों के साथ ठगी करती है.

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