पटना32 मिनट पहले
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देश के दूसरे सबसे लंबे 3577 किमी (पोरबंदर से सिलचर) ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर डुमरिया पुल बड़ा अड़ंगा है। गुजरात, राजस्थान, एमपी और यूपी में 80-100 किमी की रफ्तार से दौड़ती गाड़ियों के पहिए गंडक नदी पर थम जाते हैं। गोपालगंज और पूर्वी चंपारण के बीच 2.7 किमी लंबा डुमरिया पुल 20 साल से अटका है।
एनएचएआई 70 के दशक के इस संकरे 2-लेन पुल की जगह नया पुल अक्टूबर 2008 तक नहीं बनवा सका। अब तीसरी बार निर्माण शुरू करने की कोशिश है। हाल ही में बिहार आए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सामने राज्य सरकार ने यह मामला उठाया। अधिकारियों ने चेताया कि 4-लेन हाईवे के बीच जर्जर 2-लेन पुल अत्यंत खतरनाक है। हादसे पर पूरे 3577 किमी कॉरिडोर का यातायात ठप हो जाएगा। इसलिए बगल में नया 4-लेन पुल बनाने का कड़ा आग्रह किया गया है। उखड़ी सतह व टूटी रेलिंग से जर्जर पुल पर रोज घंटों जाम लगता है। भारी मालवाहकों के दबाव से रोज लाखों का ईंधन बर्बाद हो रहा है। अगले महीने नवंबर से गन्ने के ट्रैक्टर गुजरने पर स्थिति और भयावह होगी।
क्यों फंसा काम: 20 साल में 3 करार, 2 एजेंसियां फेल
पहला करार (सितंबर 2005): पीसीएल एजेंसी को काम मिला। अक्टूबर 2008 तक निर्माण न होने पर नवंबर 2013 में एग्रीमेंट रद्द हुआ। दूसरा करार (मार्च 2022): जीआरडी एजेंसी को 137 करोड़ में जून 2027 तक का समय मिला। डिजाइन बदलने पर भी काम न होने से एग्रीमेंट रद्द हुआ। तीसरा करार (सितंबर 2026): अब एसपी सिंगला एजेंसी से सितंबर में एग्रीमेंट हुआ है। इसी महीने काम शुरू करने की तारीख तय हो रही है।
क्या फायदा: देश के लिए क्यों जरूरी है पुल?
समय-लागत में कमी: असम से गुजरात यात्रा का समय आधा होने से लॉजिस्टिक्स लागत व ईंधन घट रहा है। पूर्वोत्तर से जुड़ाव: ‘चिकन नेक’ के पास बेहतर कनेक्टिविटी से उत्तर-पूर्वी राज्य मुख्य अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं। व्यापार सुगम: औद्योगिक शहरों, कृषि केंद्रों व बंदरगाहों के बीच माल परिवहन आसान हुआ है। सीमा पार व्यापार: बांग्लादेश, भूटान व नेपाल सीमाओं के पास होने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ रहा है। सामरिक मजबूती: सेना व उपकरणों को गुजरात से पूर्वी-उत्तरी सीमाओं तक तेजी से पहुंचाने में सहायक है। इस सड़क से यह काम आसानी से हो सकेगा।
लचर कार्यशैली से फंसा मामला
3577 किमी लंबे कॉरिडोर की रफ्तार 2.7 किमी के पुल पर फंसी है। 20 साल में दो एजेंसियों का फेल होना एनएचएआई की लचर कार्यशैली दिखाता है। जर्जर पुल पर भारी ट्रैफिक और मेंटेनेंस की अनदेखी बड़े हादसे का न्योता है। केंद्र व राज्य सरकार को तय समय में नया 4-लेन पुल बनवाकर यह अड़ंगा दूर करना होगा। तभी यह काम जल्द पूरा हो सकेगा।
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