सांवलियाजी के आसमान में दिखे बांसुरी बजाते कान्हा: 3 साल बाद उड़े 1100 ड्रोन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर से आए श्रद्धालु - Chittorgarh News

Published on 4 सित॰ 2026

जन्माष्टमी पर इस बार कृष्णधाम सांवलियाजी में रात होते ही आसमान में 1100 ड्रोन की रोशनी ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को जीवंत कर दिया।

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तीन साल बाद फिर आयोजित हुए ड्रोन शो को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। मंदिर परिसर से लेकर डोम पार्किंग और यशोदा विहार चौक तक लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। हर किसी की नजर आसमान पर थी।

जैसे-जैसे ड्रोन अलग-अलग आकृतियां बनाते गए, श्रद्धालुओं की तालियां और जयकारे पूरे परिसर में गूंजते रहे। इस बार जन्माष्टमी महोत्सव में परंपरा और आधुनिक तकनीक का ऐसा मेल देखने को मिला, जिसने पूरे आयोजन को और खास बना दिया।

दिन में अखाड़ा, मटकी फोड़ और धार्मिक जुलूस ने माहौल को भक्तिमय बनाया, जबकि रात में ड्रोन शो इस महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया।

तीन साल बाद एक बार फिर से ड्रोन शो का आयोजन किया गया था।

तीन साल बाद एक बार फिर से ड्रोन शो का आयोजन किया गया था।

1100 ड्रोन से आसमान में दिखाई भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की झलकियां

शुक्रवार रात ठीक 8 बजे दिल्ली की बोटलैब डायनॉमिक्स कंपनी ने एक साथ 1100 ड्रोन उड़ाकर करीब 15 मिनट का भव्य शो प्रस्तुत किया। इस शो की तैयारी के लिए कंपनी की 20 सदस्यीय टीम तीन दिन पहले ही सांवलियाजी पहुंच गई थी।

ड्रोन शो को राजस्थान के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले साल 2023 की जन्माष्टमी पर यहां 1000 ड्रोन का शो हुआ था, लेकिन इस बार ड्रोन की संख्या भी बढ़ाई गई और नई थीम भी जोड़ी गई।

मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव ने बताया कि शो की पूरी थीम भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्री सांवलियाजी मंदिर पर आधारित थी। ड्रोन की रोशनी से आसमान में श्रीकृष्ण जन्म, शेषनाग की छत्रछाया, गोवर्धन पर्वत उठाने का दृश्य, बाल कृष्ण का रूप, बांसुरी बजाते कान्हा, महाभारत में अर्जुन के सारथी बने श्रीकृष्ण, कालिया नाग पर नृत्य करते हुए भगवान, माखन खाते बाल गोपाल, राधा-कृष्ण की झलक, श्री सांवलियाजी मंदिर और सांवरा सेठ की आकर्षक आकृतियां उभरीं।

हर दृश्य के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ता गया और पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया।

ड्रो शो की पूरी थीम भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्री सांवलियाजी मंदिर पर आधारित थी

ड्रो शो की पूरी थीम भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और श्री सांवलियाजी मंदिर पर आधारित थी

ड्रोन शो देखने डोम पार्किंग और यशोदा विहार चौक पर उमड़ी भीड़

ड्रोन शो देखने के लिए मंदिर परिसर के आसपास पहले से ही विशेष व्यवस्था की गई थी। डोम वाली पार्किंग और यशोदा विहार चौक को सबसे उपयुक्त स्थान माना गया, जहां शाम से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचने लगे थे। परिवारों के साथ आए लोग खुले आसमान के नीचे बैठकर शो का इंतजार करते रहे।

जैसे ही ड्रोन ने उड़ान भरी, पूरा आसमान रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी ने इस अनोखे दृश्य का आनंद लिया। कई श्रद्धालु अपने मोबाइल से लगातार वीडियो और तस्वीरें बनाते रहे।

शो खत्म होने के बाद भी लोग इसकी चर्चा करते नजर आए। श्रद्धालुओं का कहना था कि उन्होंने पहली बार भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को इतनी अलग और आधुनिक शैली में देखा।

ड्रोन शो के दौरान आकर्षक कलाकृतियां दिखाई गई।

ड्रोन शो के दौरान आकर्षक कलाकृतियां दिखाई गई।

अखाड़े के कलाकारों ने दिखाए करतब

ड्रोन शो से पहले जन्माष्टमी महोत्सव के तहत दिनभर धार्मिक और पारंपरिक कार्यक्रमों की धूम रही। दोपहर बाद श्री सांवलियाजी मंदिर परिसर में उज्जैन जिले के पिपलोदा स्थित द्वारिकाधीश की बजरंग व्यायामशाला के कलाकारों का स्वागत किया गया। मंदिर मंडल अध्यक्ष हजारीदास वैष्णव, सदस्य पवन तिवारी और जन्माष्टमी महोत्सव समिति के विपिन मंडोत सहित अन्य पदाधिकारियों ने कलाकारों का उपरना ओढ़ाकर सम्मान किया।

इसके बाद पहलवान हुकुमचंद गुड्डू के सानिध्य में अखाड़ा प्रदर्शन शुरू हुआ। अर्जुन पहलवान, मुकेश भाई, देवेंद्र जैन, जितेंद्र सोलंकी, बिट्टू सरदार और अन्य कलाकारों ने पारंपरिक व्यायाम और हैरतअंगेज करतब दिखाकर लोगों की खूब तालियां बटोरीं।

कलाकारों ने जुलूस के रूप में गुर्जर चौक, कबूतरखाना, ब्रह्मपुरी, पुराने मंदिर मार्ग और मीरा सर्किल होते हुए यशोदा विहार चौक तक प्रदर्शन किया। पूरे रास्ते लोग उनका स्वागत करते रहे और करतब देखने के लिए बड़ी संख्या में सड़क किनारे खड़े रहे।

मटकी फोड़ की परंपरा निभाई

जुलूस के दौरान गुर्जर चौक, कबूतरखाना, जैन मोहल्ला और पुराने मंदिर मार्ग के प्रमुख चौराहों पर मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में मटकी फोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया।

हर बार मटकी फूटने पर श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए और तालियों से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। छोटे बच्चों और युवाओं में इस कार्यक्रम को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह दिखाई दिया।

कई जगह स्थानीय लोगों ने कलाकारों का फूल-मालाओं से स्वागत किया और जलपान की व्यवस्था भी की। इससे पूरे कस्बे में जन्माष्टमी का उत्सव और भी जीवंत नजर आया।

कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में मटकी फोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया।

कलाकारों ने पारंपरिक अंदाज में मटकी फोड़कर भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को जीवंत किया।

यादगार बना जन्माष्टमी महोत्सव

इस बार सांवलियाजी में जन्माष्टमी महोत्सव सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए एक यादगार अनुभव बन गया। एक ओर अखाड़ा, मटकी फोड़ और पारंपरिक जुलूस ने सालों पुरानी परंपराओं को जीवंत रखा, तो दूसरी ओर 1100 ड्रोन के जरिए भगवान श्रीकृष्ण के जीवन को आधुनिक तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया।

यही वजह रही कि दिनभर मंदिर परिसर और पूरे कस्बे में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। श्रद्धालुओं ने दर्शन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया और रात में ड्रोन शो ने पूरे आयोजन को भव्य समापन दिया। परंपरा, आस्था और तकनीक के इस अनोखे संगम ने जन्माष्टमी महोत्सव को पहले से ज्यादा भव्य और यादगार बना दिया।

दिनभर मंदिर परिसर और पूरे कस्बे में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।

दिनभर मंदिर परिसर और पूरे कस्बे में उत्सव जैसा माहौल बना रहा।