बिहार में डिजिटल क्रांति: 3 महीने में यूपीआई से 10.16 लाख करोड़ का लेन-देन - Patna News

Published on 8 अक्टू॰ 2026

पटना24 मिनट पहले

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हर दिन 3.32 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन; 80% खाताधारक कर रहे क्यूआर कोड का इस्तेमाल, औसत पेमेंट ₹340, बैंकों में जमा 6.23 लाख करोड़

बिहार में डिजिटल बैंकिंग और यूपीआई लेन-देन ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के बैंकों में कुल 6,23,768 करोड़ रुपये जमा हैं। लेकिन राज्य के लोगों ने इस साल अप्रैल से जून की महज तीन महीनों की अवधि में ही यूपीआई के जरिए 10 लाख 16 हजार 864 करोड़ का डिजिटल लेन-देन कर डाला है।

यानी बैंकों में पड़ी जमा राशि से कहीं ज्यादा रकम अब लोगों की उंगलियों के इशारों पर घूम रही है। यह क्रांति अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही है। गांवों में भी क्यूआर कोड पहली पसंद बन चुका है। अप्रैल से जून के दौरान बिहारियों ने 2 अरब 98 करोड़ 74 लाख बार क्यूआर कोड स्कैन किया। राज्य में कुल 12 करोड़ 26 लाख एक्टिव बैंक खाते हैं, जिनमें से 10.19 करोड़ खाते आधार से लिंक हैं। यही वजह है कि करीब 80 फीसदी खाताधारक अब यूपीआई का इस्तेमाल कर रहे हैं।

औसतन हर यूपीआई ट्रांजेक्शन 340 रुपये का रहा, जो बताता है कि आम लोग छोटी-मोटी दैनिक खरीदारी के लिए भी पूरी तरह डिजिटल हो चुके हैं। आगामी 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर व्यापारियों पर 0.4% मर्चेंट शुल्क लागू होने की तैयारी है। हालांकि 2,000 रुपये तक के सभी कारोबारी भुगतान और पर्सन-टू-पर्सन पैसे ट्रांसफर पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। इसके अलावा जिन छोटे दुकानदारों की मासिक यूपीआई आय 1 लाख से कम है, उन पर यह शुल्क लागू नहीं होगा। वहीं नई व्यवस्था की आहट के बाद बैंकों ने राज्य में एटीएम की संख्या पुनः बढ़ानी शुरू कर दी है।

राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के ताजा आंकड़ों में खास क्या... 6,23,768 करोड़ ही राज्य के बैंकों में कुल जमा राशि है। 2.98 अरब बार क्यूआर कोड 3 महीने में स्कैन किया। 3.32 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन राज्य में हर दिन औसतन हो रहे हैं। 340 रहा प्रत्येक यूपीआई ट्रांजेक्शन का औसत मूल्य। 12.26 करोड़ कुल क्रियाशील खाते हैं (10.19 करोड़ आधार लिंक्ड)। 80% खाताधारक दैनिक लेन-देन के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। 7,176 हुई एटीएम की संख्या जून 2026 में (दिसंबर 2025 में 6,898 थी)।

कैशलेस बिहार का नया मॉडल ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बिहार वित्तीय समावेशन और डिजिटल साक्षरता में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बैंकों की कुल जमा पूंजी से लगभग डेढ़ गुना ज्यादा डिजिटल कारोबार होना जनता के डिजिटल व्यवस्था पर अटूट विश्वास को दर्शाता है। औसतन ₹340 का छोटा टिकट साइज इस बात की पुष्टि करता है कि रोजमर्रा की छोटी खरीदारी से नकद निर्भरता समाप्त हो चुकी है। 15 अक्टूबर से लागू होने वाले 0.4% मर्चेंट चार्ज से बड़ी खरीदारी पर ऑनलाइन डिस्काउंट में थोड़ी कमी आ सकती है। परंतु 2,000 रुपये तक के मुफ्त भुगतान से आम ग्राहकों और छोटे दुकानदारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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