कर्नाटक में नौकरी का बंपर मौका! ₹29,679 करोड़ के प्रोजेक्ट मंजूर, टोयोटा-महिंद्रा समेत ये कंपनी लगाएंगी पैसा

Published on 3 सित॰ 2026

Time Published: Thursday, September 3, 2026, 11:43 [IST]

Karnataka Investment: कर्नाटक में उद्योग और रोजगार को लेकर बड़ा फैसला हुआ है। राज्य सरकार ने 29,679.20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं से राज्य में करीब 66,360 नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इस निवेश में एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स, अक्षय ऊर्जा, जैव ईंधन, डिजिटल ढांचे और वाहन क्षेत्र जैसे कई सेक्टर शामिल हैं।

यह फैसला 2 सितंबर 2026 को हुई राज्य उच्च स्तरीय मंजूरी समिति यानी एसएचएलसीसी की 68वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने की। समिति ने कुल 17 प्रस्तावों को मंजूरी दी। इनमें नौ नए निवेश प्रस्ताव हैं, जबकि आठ मौजूदा निवेश से जुड़े विस्तार या संशोधन प्रस्ताव हैं।

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29,679 करोड़ कहां से आएगा और कितनी नौकरियां बनेंगी?

नौ नए प्रोजेक्ट में कुल 25,710.56 करोड़ रुपये का निवेश होगा। इनसे करीब 64,349 रोजगार मिलने का अनुमान है। बाकी आठ विस्तार और संशोधन वाले प्रस्तावों में 3,968.64 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे। इनसे करीब 2,011 अतिरिक्त नौकरियां बनने की उम्मीद है।

सबसे बड़ा प्रस्ताव हीरो फ्यूचर एनर्जीज का है। कंपनी 9,760 करोड़ रुपये लगाने वाली है। इससे करीब 3,200 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसके बाद निरानी शुगर्स का करीब 4,062.60 करोड़ रुपये का निवेश है। कंपनी से करीब 700 नौकरियां मिलने का अनुमान है। ट्रूऑल्ट बायोएनर्जी करीब 2,988 करोड़ रुपये लगाएगी और इससे 21,436 नौकरियां बनने की संभावना है।

टोयोटा से लेकर महिंद्रा तक, किस कंपनी का क्या प्लान है?

महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर्स कोलार में एयरोस्पेस पार्ट्स और असेंबली बनाने की इकाई लगाएगी। इसमें 2,300 करोड़ रुपये का निवेश होगा और करीब 3,000 रोजगार बनने की उम्मीद है। एक्वस कंज्यूमर प्रोडक्ट्स धारवाड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के कंपोनेंट्स और असेंबली का उत्पादन बढ़ाएगी। कंपनी का निवेश 1,104 करोड़ रुपये है। इससे करीब 4,813 नौकरियां पैदा हो सकती हैं।

टोयोटा किर्लोस्कर मोटर बेंगलुरु के पास बिजनेस इंटेलिजेंस हब स्थापित करेगी। इस प्रोजेक्ट में 1,200 करोड़ रुपये लगाए जाएंगे और करीब 500 लोगों को रोजगार मिलेगा। एप्सिलॉन कैम का प्रस्ताव 1,500 करोड़ रुपये का है। इससे करीब 500 नौकरियां मिलने का अनुमान है। वहीं लाइटहाउस कैंटन अल्टरनेटिव्स एसेट मैनेजर 600 करोड़ रुपये लगाएगा और करीब 200 रोजगार पैदा करेगा।

एक प्रोजेक्ट अकेले देगा 30 हजार नौकरियां!

इस पूरे पैकेज में सबसे ज्यादा चर्चा वाइब्रेंसी रियल एस्टेट्स के प्रस्ताव की है। कंपनी करीब 2,194.94 करोड़ रुपये निवेश करके बेंगलुरु में आईटी और आईटीईएस के लिए कार्यालय परिसर विकसित करेगी। इस एक प्रोजेक्ट से करीब 30,000 नौकरियां मिलने का अनुमान है। यानी कुल नए निवेश से बनने वाली नौकरियों में इसका हिस्सा काफी बड़ा है।

टीवीएस, होंडा और हवेल्स के विस्तार को भी मंजूरी

सरकार ने मौजूदा उद्योगों के विस्तार से जुड़े आठ प्रस्तावों को भी मंजूरी दी है। इनमें एमएसपीएल का 884.25 करोड़ रुपये, एनश्योर रिलायबल पावर सॉल्यूशंस का 250 करोड़ रुपये और होंडा कार्स इंडिया का 437 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

इसके अलावा भीमा फाइन केमिकल्स 605.15 करोड़ रुपये, सैनसेरा इंजीनियरिंग 492.24 करोड़ रुपये, टीवीएस मोटर कंपनी 1,050 करोड़ रुपये और हैवेल्स इंडिया 250 करोड़ रुपये लगाएगी। इन सभी विस्तार परियोजनाओं से करीब 2,011 अतिरिक्त नौकरियां बनने की उम्मीद है।

प्रियंक खड़गे ने बताया कर्नाटक की ताकत

कर्नाटक के गृह, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और ई-गवर्नेंस मंत्री प्रियंक खड़गे ने इन निवेशों को राज्य की बदलती औद्योगिक तस्वीर से जोड़ा। उन्होंने कहा,

"एयरोस्पेस और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से लेकर डिजिटल ढांचे और बिजनेस इंटेलिजेंस तक, कर्नाटक कारोबार और निवेश के लिए भारत की सबसे भरोसेमंद और पसंदीदा जगहों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है"।

यह बयान बताता है कि राज्य सिर्फ पारंपरिक उद्योगों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। सरकार का जोर हाई-टेक और ज्यादा रोजगार देने वाले सेक्टरों पर भी है।

शिवकुमार ने अधिकारियों को दिया ऑडिट का आदेश

निवेश को मंजूरी देने के साथ मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सरकारी मशीनरी को एक अहम निर्देश भी दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक लाइसेंस देने से पहले कंपनियों की परियोजना रिपोर्ट को अच्छी तरह जांचा जाए। वित्त विभाग को प्रोजेक्ट की मंजूरी से पहले ऑडिट की व्यवस्था अनिवार्य बनाने को कहा गया है।

इसके लिए नई ऑडिट टीम बनाने का निर्देश भी दिया गया है। मुख्यमंत्री ने राज्य की औद्योगिक नीति के नियमों का सख्ती से पालन कराने और उद्योगों की स्थापना व विस्तार को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

बेंगलुरु से बाहर भी बनेगा नया औद्योगिक हब?

कर्नाटक सरकार अब औद्योगिक विकास को सिर्फ बेंगलुरु तक सीमित रखने के मूड में नहीं है। पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से बेंगलुरु के अलावा पांच शहरों की पहचान करने को कहा था। इन शहरों में हवाई अड्डे और जरूरी ढांचा उपलब्ध हो, ताकि वहां बड़े निवेश लाए जा सकें और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा हो।

यानी 29,679 करोड़ रुपये के मौजूदा निवेश के साथ सरकार की बड़ी रणनीति दो हिस्सों में दिखती है। पहला बड़े उद्योगों और नए सेक्टरों में निवेश लाना। दूसरा औद्योगिक गतिविधियों को बेंगलुरु से बाहर दूसरे शहरों तक ले जाना। अगर दोनों मोर्चों पर योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो इसका सीधा असर निवेश के साथ रोजगार पर भी दिख सकता है।