नेपाल में पिछले महीने कुदरत का ऐसा कहर टूटा कि कई परिवार हमेशा के लिए बिखर गए. इस भीषण फ्लैश फ्लड को बीते हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
नेपाल में पिछले महीने कुदरत का ऐसा कहर टूटा कि कई परिवार हमेशा के लिए बिखर गए. इस भीषण फ्लैश फ्लड को बीते हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है.
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Nepal flood: नेपाल में पिछले महीने कुदरत का ऐसा कहर टूटा कि कई परिवार हमेशा के लिए बिखर गए. इस भीषण फ्लैश फ्लड को बीते हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए बैठे परिवारों का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. जैसे-जैसे वक्त गुजर रहा है, अपनों के जीवित मिलने की उम्मीद भी धुंधली पड़ती जा रही है, जो परिजनों के लिए किसी बड़े मानसिक आघात से कम नहीं है.
विदेश मंत्रालय की ताजा अपडेट और आंकड़े
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस त्रासद स्थिति पर बात करते हुए बताया कि सरकार लगातार राहत और बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है. आपदा प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी 275 भारतीय नागरिक लापता हैं. राहत और बचाव अभियान के तहत अब तक कुल 166 भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जो अपने-अपने घरों को सकुशल लौट चुके हैं. इसके अलावा, चीन के रास्ते 1,907 भारतीय नेपाल में प्रवेश कर चुके हैं और अब चीन की तरफ कोई भी भारतीय नहीं बचा है. चीन की तरफ से 49 भारतीयों के लापता होने की जो सूचना दी गई थी, वे सभी भारत की तरफ से जारी 275 लोगों की मुख्य सूची में पहले से ही शामिल हैं.
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नेपाल में भारी तबाही और मौत के आंकड़े
नेपाल सरकार की आपदा प्रबंधन एजेंसी (NDRRMA) के अनुसार, इस आपदा ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है. नेपालभर में अब तक 1,287 लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है. इसके अलावा, लगभग 5,083 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें करीब 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. आपदा प्रभावित क्षेत्रों से राहत कर्मियों को सबसे ज्यादा शव चितवन, नवलपरासी, नुवाकोट और रसुवा जिलों से बरामद हुए हैं
.लापता लोगों की खोजबीन के लिए भारत सरकार नेपाल के स्थानीय प्रशासन, राहत एजेंसियों और उन भारतीय राज्यों की सरकारों के साथ लगातार समन्वय स्थापित किए हुए है जिनके नागरिक यात्रा पर वहां गए थे. हालांकि, समय बीतने के साथ बचाव अभियान और अधिक चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं, फिर भी प्रशासन और बचाव दल हरसंभव प्रयास में जुटे हुए हैं.
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