छत्तीसगढ़ की जेलों में रक्षाबंधन का पावन पर्व समारोहपूर्वक हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। सनातन मूल्यों और अटूट संबंधों का अनुपम संगम दिखा।
जेल में बंद भाइयों को राखी बांधती बहनें
- Published: 28 Aug 2026, 07:34 PM IST
- Last Updated: 28 Aug 2026, 07:34 PM IST
रायपुर। छत्तीसगढ़ की जेलों में रक्षाबंधन का पावन पर्व शुक्रवार को समारोहपूर्वक हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। विशेष इंतजामों के बीच सनातन मूल्यों और अटूट संबंधों का अनुपम संगम जेलों में दिखा।
प्रदेश भर की जेलों में मनाए गए इस पर्व को लेकर डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बताया कि, छत्तीसगढ़ की 5 केंद्रीय, 22 जिला जेलों एवं 6 उप जेलों में आज रक्षाबंधन का त्यौहार असीम उत्साह, सद्भाव और सनातन परंपराओं के अनुरूप गरिमामय वातावरण में मनाया गया। इस पावन अवसर पर कुल 24,257 बहनों तथा भाइयों ने जेल में निरुद्ध 8689 बंदियों/बंदिनियों को जेल में राखी बांधी।
छत्तीसगढ़ की जेलों में रक्षाबंधन का पावन पर्व समारोहपूर्वक हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। सनातन मूल्यों और अटूट संबंधों का अनुपम संगम दिखा। #RakshaBandhan @CGPoliceDept pic.twitter.com/my2KqGpZSm
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24110 बहनों ने 8597 बंदियों को बांधी राखी
कुल 24110 बहनों द्वारा 8597 बंदियों को राखी बांधी गयी। महिला जेल में निरुद्ध 92 महिला बंदिनियों द्वारा अपने 147 भाइयों को राखी बांधी गयी। इस अवसर पर जेल परिसरों में बहनों ने अपने निरुद्ध भाइयों की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुरक्षित और सुखी जीवन की कामना की, वहीं बंदियों ने भी अपनी बहनों को सुरक्षा और सत्मार्ग पर चलने का वचन दिया।
सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन केवल सूत का धागा नहीं
सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन केवल सूत का धागा बांधने का पर्व नहीं, बल्कि यह 'रक्ष धर्म' का प्रतीक है, जो स्नेह, समर्पण और आत्मिक शुद्धि का संदेश देता है। यह पर्व याद दिलाता है कि, कोई भी परिस्थिति मनुष्य के मूलभूत मानवीय मूल्यों और पारिवारिक संवेदनाओं को समाप्त नहीं कर सकती। जेलों में आज का यह दृश्य सनातन परंपरा की उस भावना को चरितार्थ कर रहा था, जहाँ अपराध बोध के स्थान पर पश्चाताप, भाईचारे और सुधार की अलख जागृत होती है।

रक्षा-सूत्र का प्रभाव सलाखों की सीमाओं से परे : हिमांशु गुप्ता
डीजी जेल हिमांशु गुप्ता ने बताया कि, सनातन परंपराओं के यह पर्व बंदियों में मानसिक शांति और नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। यह भावुक क्षण यह संदेश देता है कि, रक्षा-सूत्र का प्रभाव सलाखों की सीमाओं से परे है, जो जीवन में नए सवेरे और सुधार की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएँ:
- पारंपरिक रीति-रिवाज: बहनों का स्वागत तिलक, अक्षत और आरती के साथ किया गया। जेल प्रशासन द्वारा पूजा सामग्री एवं मिठाई की विशेष व्यवस्था की गई थी।
- दृढ़ सुरक्षा एवं व्यवस्था: परिजनों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष प्रतीक्षालय, पेयजल और सहायता काउंटर बनाए गए थे।
- सुधारत्मक वातावरण: बंदियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहे हैं।
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