नर्मदापुरम में नर्मदा किनारे बसे नानपा, कुल्हड़ा और कजलास के 2375 ग्रामीण 4 साल से खराब सड़क की मार झेल रहे हैं। नानपा से कुल्हड़ा तक 3.26 किमी सड़क भारी वाहनों की आवाजाही से बुरी तरह क्षतिग्रस्त है।
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बारिश में यह कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते में बदल जाती हैं। इसी रास्ते से स्कूली बच्चे, किसान, महिलाएं, मरीज और नर्मदा परिक्रमा वासी गुजरते हैं। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर है क्योंकि सड़क सुधार की सरकारी फाइल भी रेत परिवहन के कारण अटक गई।
24 दिसंबर 2025 को अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सामने अपग्रेडेशन का प्रजेंटेशन हुआ। इसमें इसी मार्ग से अवैध रेत परिवहन की वजह से सड़क क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई। इसके बाद स्वीकृति होल्ड कर दी गई।
विभाग के मुताबिक, खदान वैध होने के बाद ही सड़क अपग्रेडेशन की फाइल आगे बढ़ेगी। यानी सड़क की बदहाली दूर करने की प्रक्रिया उसी वजह से रुक गई, जिसे सड़क खराब होने का कारण बताया गया है।
तीन तस्वीरें देखिएगा…

रास्ते में बारिश के समय कीचड़ की कीचड़ हो जाता है।

परिवहन के कारण रास्ते में बड़े गड्ढे हो चुके हैं।

रेत खनन से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ चुका है।
रोज 100 ट्रॉलियां निकलने का दावा ग्रामीणों के मुताबिक नानपा और कजलास की रेत खदान का ठेका कई वर्षों से नहीं हुआ, इसके बावजूद रेत निकाली जा रही है। उनका दावा है कि दिन-रात लोडर और पोकलेन चलती हैं और रोज करीब 100 ट्रॉलियां रेत ले जाती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार रेत से भरे वाहन डोलरिया और आंवलीघाट-हथनौरा तक जाते हैं, जहां से डंपरों के जरिए दूसरे शहरों में रेत भेजी जाती है।
100 ट्रॉलियों के आधार पर ग्रामीण करीब 6.40 लाख रुपए प्रतिदिन और 1.92 करोड़ रुपए महीने के रेत कारोबार का अनुमान लगाते हैं। हालांकि वास्तविक मात्रा और शासन को होने वाले राजस्व नुकसान की पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही होगी।

ट्रैक्टर-ट्रॉली को इस तरह से रेत का परिवहन करते ले जाया जाता है।
2020 में बनी सड़क, 2023 से शिकायतें नानपा-कुल्हड़ा की 3.26 किमी सड़क वर्ष 2020 में एमपीआरसीपी योजना के तहत 90.97 लाख रुपए में बनी थी। निर्माण 30 जून 2020 को पूरा हुआ। ठेकेदार की पांच साल तक मरम्मत और संधारण की जिम्मेदारी थी।
लेकिन 2023 तक सड़क कई जगह खराब होने लगी। मरम्मत नहीं होने पर 2 दिसंबर 2024 को ठेकेदार गोविंद राय का अनुबंध निरस्त कर दिया गया।

ग्रामीणों ने कहा- 4 साल से सड़क की यही हाल
रोज 100 ट्रॉलियां रेत लेक निकलती हैं नानपा के ही रजत राजपूत ने बताया कि रेत खदान पर दिन-रात लोडर और पोकलेन से रेत निकाली जाती है। रोज करीब 100 ट्रॉलियां रेत लेकर निकलती हैं। ड्राइवर इतनी तेज रफ्तार से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां ले जाते हैं कि सामने से कोई वाहन आ जाए तो बचने की जगह नहीं मिलती।
कार्रवाई की टीम आती है तो कई बार सड़क पर ही रेत खाली करके भाग जाते हैं। रेत परिवहन से सड़क लगातार खराब हो रही है।

वहीं ग्रामीण अर्पित मालवीय ने बताया कि

बारिश के दिनों में सड़क पर चलना बहुत मुश्किल हो जाता है। कीचड़ के कारण वाहन फिसलते हैं और कई बार गाड़ियों के चैंबर तक फूट जाते हैं। सड़क खराब होने से गांव वालों के साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।


रेत का खनन करने के लिए जेसीबी की भी मदद ली जाती है।
दो साल से फाइल घूमी, फिर एसीएस ने रोक दी सड़क के अपग्रेडेशन का प्रस्ताव 27 अक्टूबर 2023 को भोपाल भेजा गया था। 5 मार्च 2024 को तकनीकी समिति की बैठक हुई और कमियां बताकर संशोधन के निर्देश दिए गए। इसके बाद प्रस्ताव 26 नवंबर 2024 और 15 मई 2025 को फिर भेजा गया।
26 नवंबर 2025 को तकनीकी समिति ने दोबारा निर्देश दिए। संशोधन के बाद 26 और 28 नवंबर को प्रस्ताव मुख्य महाप्रबंधक को भेजा गया। फिर 24 दिसंबर 2025 को एसीएस के सामने प्रजेंटेशन हुआ। यहीं रेत परिवहन का मुद्दा सामने आने के बाद स्वीकृति होल्ड कर दी गई।

सड़क गई तो मूंग खरीदी भी अटकी खराब रास्ते का असर खेती पर भी पड़ा है। इसी मार्ग के निजी वेयरहाउस को मूंग उपार्जन केंद्र बनाया गया था, लेकिन संचालक ने सड़क की स्थिति का हवाला देकर खरीदी से असमर्थता जताई और किसानों से दूसरे केंद्र पर स्लाइड बुक करने को कहा।
ग्रामीणों के अनुसार अब किसानों को 15 से 20 किमी दूर दूसरे केंद्रों पर जाना पड़ सकता है।
परिक्रमा पथ पर श्रद्धालु भी परेशान टिगरिया से कजलास, नानपा, कुल्हड़ा होते हुए आंवलीघाट-हथनौरा जाने वाला मार्ग नर्मदा परिक्रमा पथ का हिस्सा है। बारिश में कीचड़ के कारण पैदल चलने वाले परिक्रमा वासियों को भी परेशानी होती है।

रेत का खनन करके ले जाने की तैयारी करते हुए।
खदान वैध करने की फाइल डेढ़ साल से लंबित नानपा और कजलास की नर्मदा किनारे स्थित रेत खदानों के 15-15 हेक्टेयर क्षेत्र को वैध करने के लिए जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम ने 11 मार्च 2025 को मप्र राज्य खनिज निगम के प्रबंध संचालक को पत्र भेजा था। करीब डेढ़ साल बाद भी प्रक्रिया लंबित है। इस बीच ग्रामीणों का आरोप है कि खनन और परिवहन जारी है।

इस तरह बड़े-बड़े वाहनों से अवैध खनन किया जा रहा है।
परिक्रमापथ के रूप में तैयार हो सकता है नानपा रोड कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने 15 दिन पहले कलेक्ट्रेट स्थित सभाकक्ष में नर्मदा परिक्रमा पथ पर सड़क बनाने और पथ किनारे पौधा रोपण करने के लिए कई सामाजिक समितियों, जनप्रतिनिधि और जिले में कार्य कर रही कम्पनियों से आगे आकर सहयोग करने की अपील की। ऐसे में नानपा कुल्हड़ा रोड उन्नयन भी परिक्रमा पथ के रूप में हो सकता है।
जिला खनिज अधिकारी देवेश मरकाम ने बताया कि

डोलरिया तहसील की नानपा और कजलास में 15-15 हेक्टेयर क्षेत्र को रेत खदान के रूप में वैध करने के लिए प्रस्तावित किया गया है। इसके लिए आवश्यक कार्रवाई के संबंध में मप्र राज्य खनिज निगम को पत्र भेजा गया है। वहां से आगामी प्रक्रिया होना बाकी है। फिलहाल खदानों को वैध करने की स्वीकृति नहीं मिली है।

