अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर ने गुरुवार को 15वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर संस्थान की स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में हुई प्रगति और उपलब्धियों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही स्टू
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मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने एम्स जोधपुर की 15 वर्ष की यात्रा को अमृत काल और भारत के विकास के व्यापक संदर्भ से जोड़ते हुए कहा कि संस्थानों को प्रभावी, उत्तरदायी और जवाबदेह बनाने के लिए “अधिकतम सुशासन, न्यूनतम सरकार” की भावना के अनुरूप कार्य करना आवश्यक है। उन्होंने सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं, स्वास्थ्य संवर्धन, अनुसंधान, नवाचार और मजबूत स्वास्थ्य ढांचे के महत्व को रेखांकित किया।

मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास ने मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह को संबोधित किया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीकों पर ध्यान देने का किया आह्वान
उन्होंने संस्थान निर्माण पर मजबूत संस्थागत व्यवस्था, पेशेवर नेतृत्व, स्वायत्तता, जवाबदेही और प्रभावी निर्णय लेने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि संस्थान आने वाली पीढ़ियों तक मजबूती से कार्य कर सकें। उन्होंने डिजिटल एम्स को प्रशासनिक दक्षता, स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने वैश्विक अनुसंधान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, ट्रांसलेशनल रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत तकनीकों पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया। उन्होंने मजबूत रिसर्च नेटवर्क, क्लिनिकल कोहोर्ट, नवाचार प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय अकादमिक आदान-प्रदान के माध्यम से एम्स को वैश्विक चिकित्सा अनुसंधान और शिक्षा संस्थान के रूप में विकसित करने की आवश्यकता बताई।
तकनीक के साथ मानवीय संवेदना पर दिया जोर
विशिष्ट अतिथि मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. एम.के. असेरी ने एम्स जोधपुर को 15 वर्ष पूरे होने पर बधाई देते हुए कहा कि यह अवसर उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ-साथ भविष्य के लिए और अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने का भी है।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, प्रिसीजन मेडिसिन, जीनोमिक्स और डिजिटल हेल्थकेयर जैसी तकनीकों के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि चिकित्सा के भविष्य में तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय संवेदना का समन्वय आवश्यक है।
डॉ. असेरी ने भारत की स्वास्थ्य प्राथमिकताओं से जुड़े अनुसंधान, किफायती तकनीक, निवारक चिकित्सा, ग्रामीण एवं सामुदायिक स्वास्थ्य, उभरती बीमारियों और मरीज-केंद्रित सेवाओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

समारोह में 226 विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया।
15 वर्षों में संस्थान का व्यापक विस्तार
एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए एम्स जोधपुर परिवार को 15 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी। उन्होंने बताया कि 15 फैकल्टी सदस्यों और 50 एमबीबीएस विद्यार्थियों से शुरू हुआ एम्स जोधपुर आज लगभग 45 विभागों, 221 फैकल्टी सदस्यों, 1,500 से अधिक विद्यार्थियों और 3,000 से अधिक कर्मचारियों वाला व्यापक चिकित्सा संस्थान बन चुका है।
प्रो. पुरी ने कहा कि किसी भी संस्थान की पहचान और प्रतिष्ठा वर्षों के सतत परिश्रम, समर्पण और प्रतिबद्धता से बनती है। किसी संस्थान का ब्रांड केवल नाम से रातों-रात नहीं बनता, बल्कि इसे वर्षों तक फैकल्टी और रेजिडेंट्स की मेहनत से आकार मिलता है।
226 विद्यार्थियों और 15 कर्मचारियों का सम्मान
स्थापना दिवस समारोह में B.Sc. (Hons.) Nursing और MBBS के 226 विद्यार्थियों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया। इनमें 2021, 2022, 2023 और 2024 बैच के 135 B.Sc. (Hons.) Nursing विद्यार्थी तथा 2021, 2023 और 2025 बैच के 91 MBBS विद्यार्थी शामिल रहे। इसके अलावा विभिन्न विभागों एवं कार्यक्षेत्रों से जुड़े 15 कर्मचारियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

समारोह में मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास मुख्य अतिथि तथा मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जोधपुर के कुलपति डॉ. एम.के. असेरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
समारोह में ये रहे मौजूद
समारोह में मुख्य सचिव वी.श्रीनिवास मुख्य अतिथि तथा मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जोधपुर के कुलपति डॉ. एम.के. असेरी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में एम्स जोधपुर के कार्यकारी निदेशक प्रो. गोवर्धन दत्त पुरी, डीन एकेडमिक्स प्रो. पंकजा रवि राघव, डीन रिसर्च प्रो. प्रदीप भाटिया, डीन एग्जामिनेशन प्रो. स्नेहा आर. अंबवानी, प्रिंसिपल स्कूल ऑफ नर्सिंग प्रो. सुरेश के. शर्मा, आईआईटी जोधपुर के निदेशक प्रो. अविनाश अग्रवाल, संभागीय आयुक्त कन्हैया लाल, जिला कलेक्टर आलोक रंजन, डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. बी.एस. जोधा, उप निदेशक एम्स जोधपुर रश्मि ताहिल्यानी सहित वरिष्ठ संकाय सदस्य, चिकित्सक, नर्सिंग एवं अन्य कर्मचारी, शोधकर्ता और विद्यार्थी उपस्थित रहे।