नेपाल में जमा हुआ इतना मलबा कि 22,000 ट्रक भर जाएं, सफाई में लगेंगे सालों!

Published on 2 सित॰ 2026

UNDP की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाढ़ उन इलाकों में आई है, जहां की आबादी पहले से ही आजीविका और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही थी। 6 जिलों की 17 नगर पालिकाओं के 84,270 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

नेपाल की भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में 26 अगस्त को ग्लेशियर ढहने के बाद आई विनाशकारी बाढ़ से तबाही का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के शुरुआती आकलन के अनुसार, प्रभावित इलाकों में कम से कम 22 लाख टन मलबा जमा हो गया है। अगर आसान भाषा में समझना हो तो एक अनुमान के हिसाब यह इतना मलबा कि उसे भरने के लिए 22,000 ट्रक लगेंगे।

नेपाल सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस त्रासदी में 1,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

मलबा हटाने में ही लग जाएंगे सालों?

नेपाल की बाढ़ के बाद जो मलबा बचा है, UNDP ने उसका अनुमानित वजन करीब 22 लाख टन बताया है। इसको आप ऐसे समझिए कि इतना मलबा भरने के लिए करीब 22,000 बड़े ट्रक लगेंगे। यानी अगर आप एक के बाद एक ट्रक खड़े करें, तो यह कतार कई किलोमीटर लंबी होगी।

एक और तरीके से समझें- एक ओलंपिक स्विमिंग पूल (जो 50 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा होता है) में करीब 2,500 घन मीटर पानी या मलबा भर सकता है। 22 लाख टन मलबे को अगर ऐसे पूल में भरा जाए, तो करीब 440 पूल भर जाएंगे। हालांकि, इस तरह की तुलना सिर्फ एक अनुमान है। क्योंकि इसका को सटीक आंकड़ा नहीं है।

सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह मलबा सिर्फ मिट्टी नहीं है- इसमें टूटी इमारतें, चट्टानें, पेड़-पौधे, और कंक्रीट के टुकड़े सब कुछ मिला हुआ है। इसे हटाने के लिए भारी मशीनें, हजारों ट्रक, और बहुत सारे मजदूर चाहिए। सरकार का अनुमान है कि इसकी सफाई और पुनर्निर्माण में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि कई इलाकों में रास्ते टूटे हैं और वहां पहुंचना मुश्किल भी है।

22 लाख टन मलबे में क्या-क्या शामिल है?

यूएनडीपी ने अपने 'RAPIDA' (रैपिड असेसमेंट एंड एनालिसिस फॉर इमीडिएट रिकवरी) सिस्टम और यूरोपियन सैटेलाइट डेटा के जरिए मलबे का खाका तैयार किया है।

5.5 लाख टन इमारती मलबा: सैटेलाइट डेटा में 2,359 ढहे हुए मकानों का पता चला है, जिससे केवल 5,56,200 टन कंक्रीट और ईंटों का मलबा पैदा हुआ है।

प्राकृतिक और घरेलू कचरा: बाकी मलबे में विशालकाय चट्टानें, गाद, पेड़-पौधे और बह गए घरों का सामान शामिल है।

बचाव कार्य में अड़चन: यह मलबा केवल तबाही का आंकड़ा नहीं है, बल्कि इसके नीचे सैकड़ों लोग दबे हुए हैं, जिससे रेस्क्यू टीमों के लिए रास्ते साफ करना बेहद जोखिम भरा हो गया है।

सबसे कमजोर और कृषि-निर्भर आबादी पर सबसे बड़ी मार

यूएनडीपी की रिपोर्ट के अनुसार, यह बाढ़ उन इलाकों में आई है, जहां की आबादी पहले से ही आजीविका और बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही थी। 6 जिलों की 17 नगर पालिकाओं के 84,270 लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में 67.4% लोग कृषि पर निर्भर हैं। जून से सितंबर के बीच नेपाल का मुख्य मॉनसून बुवाई का सीजन होता है। ऐसे वक्त में फसल, पशुधन और कृषि भूमि के तबाह होने से खाद्य सुरक्षा पर गंभीर संकट पैदा हो गया है।

431.1 मेगावाट क्षमता वाले 11 हाइड्रो पावर और 1 सोलर प्लांट ठप हैं। इसके अलावा निर्माणाधीन 15 दूसरे हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (470 MW) भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं।

पुनर्निर्माण का रास्ता लंबा और कठिन: UNDP

नेपाल में यूएनडीपी की आवासीय प्रतिनिधि क्योको योकोसुका ने कहा, "त्रिशूली कॉरिडोर के समुदायों के लिए यह एक विनाशकारी आपदा है। लोगों ने अपनों को, अपने घरों और आजीविका को खो दिया है। हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि राहत सबसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे और वे सुरक्षित रूप से फिर से अपना जीवन शुरू कर सकें।"