2030 तक 200 अरब डॉलर का हो जाएगा आटो कंपोनेंट उद्योग - केंद्रीय मंत्री - india auto component industry target 200 billion turnover by 2030 says h d kumaraswamy

Published on 3 सित॰ 2026

केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्‍वामी ने ऑटो कंपोनेंट उद्योग पर बड़ा बयान दिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि 2030 तक यह उद्योग 200 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता के दौर में जब सप्लाई चेन को लेकर भी भारी अस्थिरता का माहौल है तब भारत के आटोमोबाइल कंपोनेंट उद्योग को कारोबार बढ़ाने की नई संभावनाएं दिख रही हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के बाद भारत के आटो कंपोनेंट उद्योग की मांग में 12 फीसद की वृद्धि हुई है। भारत विश्व स्तर पर आटो क्षेत्र के कल-पुर्जों का आपूर्ति करने वाला एक प्रमुख देश बन चुका है। इस उद्योग ने वित्त वर्ष 2030 तक करीब 200 अरब डॉलर (लगभग 17.6 लाख करोड़ रुपये) का टर्नओवर हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह बात ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसीएमए) के वार्षिक अधिवेशन में जारी रिपोर्ट में कही गई है।

आटो उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ

सम्मेलन में आटो उद्योग के दिग्गजों ने कहा कि अब भारत को तकनीक और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ विश्व का प्रमुख ऑटो हब बनना होगा। सोसाइटी आफ इंडियन आटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अध्यक्ष शैलेश चंद्रा ने कहा कि आटो उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ है और इसमें वैश्विक नेतृत्व की क्षमता है। वाहनों के उत्पादन में हर साल यहां रिकार्ड बना रहा है तो निर्यात में भी भारतीय कंपनियों की धाक जम रही है। भारत दुनिया के लिए महत्वपूर्ण विनिर्माण और तकनीक केंद्र बन रहा है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े आटो बाजारों में शामिल

एक्मा के अध्यक्ष विक्रमपति सिंघानिया ने कहा कि भारत पहले से दुनिया के सबसे बड़े आटो बाजारों में है। भारत की मैन्यूफैक्चरिंग क्षमता व इंजीनियरिंग क्षमता दुनिया में पहचानी जा रही है।“भारतीय आटो उद्योग का मकसद अब सिर्फ आयात को कम करना नहीं है बल्कि भारत में डिजाइन करने, भारत में ही विकसित करो, भारत में निर्माण करने व निर्यात करने के मंत्र पर काम करना चाहिए।”


इस अवसर पर बीसीजी-एक्मा की संयुक्त रिपोर्ट जारी की गई। इसके अनुसार पिछले दस वर्षों में यह उद्योग 17 फीसद की वार्षिक दर से बढ़ा है और वित्त वर्ष 2026 में 86 अरब डालर तक पहुंच चुका है। भारत में आटो कंपनियों की स्थानीयकरण 70 फीसद से अधिक हो चुका है, यानी 70 फीसद तक उपकरण घरेलू स्तर पर ही निर्मित होने लगे हैं। ऐसे में अगला चरण सिर्फ क्षमता बढ़ाने का नहीं, क्षमताओं को मजबूत करने पर होना चाहिए। हालांकि इस उद्योग के समक्ष चुनौतियां भी कम नहीं है। कच्चे माल और ऊर्जा की बढ़ती लागत, कुशल श्रम की कमी और मांग में उतार-चढ़ाव लक्ष्य प्राप्ति में बाधा बन सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन जोखिमों के खिलाफ लचीलापन बढ़ाए बिना 200 अरब डालर का लक्ष्य मुश्किल होगा।