राजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन फार्मूले के तहत पहली बार हो रहे 309 निकायों के चुनाव का बुधवार को सेमिफाइनल हुआ। 162 शहरों के करीब 57.52 लाख वोटरों ने करीब 20 हजार प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद कर दिया। अब फाइनल बाकी है। फाइनल में शुक्रवार को
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- निकाय चुनाव - पहले चरण में 162 शहरों के 20 हजार प्रत्याशियों का भाग्य ईवीएम में बंद
वहीं 76 प्रतिशत वोटिंग को देखते हुए बीजेपी भी काफी आशावान है। सरकार ने पूरा दम लगा रखा है। सीएम खुद रोड शो कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस को एंटी इनकंबेंसी के फायदे का भरोसा है। निर्दलीय से नैया पार लगने की आशा भी है। वहीं बुधवार शाम ढलते ढलते फाइनल की जंग का प्रचार भी थम गया। अब घर घर दस्तक के दौर के साथ 30 घंटे बाद फाइनल होगा। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, कोटा सहित बड़े शहरों के वोटर भी शुक्रवार को वोट डालेंगे।
4 निगमों के चुनाव पूरे, 6 के बाकी : पहले फेज में भीलवाड़ा, बीकानेर, भरतपुर व अलवर नगर निगम के कुल 279 वार्डों के लिए मतदान हुआ। पहले चरण में शामिल 32 वार्डों में निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। पहले फेज में 39 जिलों की 131 नगरपालिका, 27 नगर परिषद व चार नगर निगमों के चुनाव पूरे हुए। अब जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, पाली नगर निगम के चुनाव अगले चरण में होंगे।
पहले गहलोत ने बाड़ेबंदी कराई, अब 6 साल बाद फिर जोड़-तोड़
पिछली सरकार में जुलाई 2020 में अशोक गहलोत सरकार की बाड़ेबंदी हुई थी। सभी कांग्रेसी विधायक 2 माह होटलों में रहे। अब शहरी निकाय चुनाव के अंतिम फेज की शुक्रवार शाम वोटिंग पूरी होते ही फिर 6 साल बाद बाड़ेबंदी देखने को मिलेगी। दोनों दलों ने संभावित जोड़-तोड़ और क्रॉस वोटिंग रोकने के लिए पार्षदों को एकजुट रखने की तैयारी की है।
अभी के 162 निकाय, पहले थे 89, 2 प्रतिशत वृद्धि से कांटे की टक्कर
अभी 162 निकाय हैं, पूर्व में 89 थे। पिछले चुनाव में करीब 74.03% मतदान हुआ था। हालांकि बीजेपी कांग्रेस की सीटों में हिस्सेदारी बराबर सी थी। पिछली बार से तुलना करें तो दो प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। चुनाव आयोग के अनुसार ये आंकड़े सुबह तक और बढ़ेंगे। वोट प्रतिशत बढ़ने की वजह प्रति वार्ड औसत चार गुना प्रत्याशी भी है।
भाजपा की हार साफ, कांग्रेस के पक्ष में माहौल : डोटासरा
पीसीसी चीफ गोविंदसिंह डोटासरा ने कहा कि पूरे प्रदेश में कांग्रेस के पक्ष में माहौल है। भाजपा की हार साफ दिखाई दे रही है। इसी बौखलाहट के चलते सीएम लगातार रोड शो कर रहे। रोड शो में पूरा प्रशासनिक अमला चल रहा, जनता के नाम पर 100 लोग भी नहीं आए। इससे बड़ी राजनीतिक विफलता क्या होगी। प्रदेश में ऐसी कभी परंपरा नहीं रही कि सीएम निकाय चुनाव में रोड शो करे। आखिर ऐसी क्या नौबत आ गई?