सेना का कैपिटल बजट पूरा खर्च, 2026-27 में 41672 करोड़ का आवंटन

Published on 7 अग॰ 2026

भारतीय सेना ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने कैपिटल बजट का 100 फीसदी इस्तेमाल कर लिया है. रक्षा मंत्रालय ने संसद की समिति को दी गई रिपोर्ट में यह जानकारी दी है. कैपिटल बजट का इस्तेमाल सेना के आधुनिकीकरण, नए हथियारों, सैन्य उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर किया जाता है.

सेना को ₹2.41 लाख करोड़ का रेवेन्यू बजट

वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा मंत्रालय को कुल 7.84 लाख करोड़ का बजट मिला है. इसमें डिफेंस सर्विसेज के लिए करीब 5.84 लाख करोड़ रखे गए हैं. सेना को इस साल रेवेन्यू बजट में 2,41,968.98 करोड़ दिए गए हैं. वहीं, कैपिटल बजट में 41,672.94 करोड़ का आवंटन किया गया है. पिछले साल सेना को रेवेन्यू मद में 2,06,200 करोड़ मिले थे. यानी इस बार इसमें करीब 35,769 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है.

नॉन-सैलरी खर्च भी बढ़ा

सेना के नॉन-सैलरी खर्च के लिए 2026-27 में 85,841 करोड़ दिए गए हैं. पिछले साल यह राशि ₹60,672 करोड़ थी. नॉन-सैलरी बजट से सेना की राशन, ईंधन, परिवहन, सामान और ट्रेनिंग जैसी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी होती हैं.

कैपिटल बजट में सेना को पूरी रकम

सेना ने 2026-27 में कैपिटल बजट के लिए 41,672.94 करोड़ की मांग की थी और उसे पूरी राशि आवंटित कर दी गई है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2023-24 से सेना को कैपिटल बजट में उसकी मांग के मुताबिक 100 फीसदी आवंटन किया जा रहा है. इस फंड से नए और आधुनिक हथियारों की खरीद, सैन्य क्षमता बढ़ाने और सीमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने का काम किया जाता है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद आधुनिक हथियारों पर जोर

संसदीय समिति ने ऑपरेशन सिंदूर में सेना की भूमिका की सराहना की है. समिति ने कहा है कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना के पास आधुनिक हथियार और जरूरी सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर होना बेहद जरूरी है. समिति ने सरकार से कहा है कि आने वाले वर्षों में सेना के कैपिटल बजट को लगातार बढ़ाया जाए, ताकि नई तकनीक और अत्याधुनिक हथियारों को सेना में शामिल किया जा सके.

पड़ोसी देशों के बजट से तुलना

समिति ने सुझाव दिया था कि भारत का रक्षा खर्च पड़ोसी देशों के रक्षा खर्च में बढ़ोतरी के हिसाब से होना चाहिए. हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने कहा कि भारत के रक्षा बजट की तुलना सीधे पड़ोसी देशों के बजट से करना सही नहीं है.

सरकार के मुताबिक बजट तय करते समय सीमा की सुरक्षा स्थिति, सेना की मौजूदा क्षमता और ऑपरेशनल जरूरतों को ध्यान में रखा जाता है. भारतीय सेना ने 2022 से 2032 को ‘Decade of Transformation’ यानी बदलाव का दशक घोषित किया है. इसका मकसद सेना को भविष्य की युद्ध चुनौतियों के लिए ज्यादा आधुनिक और सक्षम बनाना है.

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण

अंजू निर्वाण भारत की लीडिंग डिफेंस पत्रकारों में से एक हैं, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों पर अपनी सटीक रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण के लिए जानी जाती हैं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ, उन्होंने इंडिया टीवी, न्यूज़ 24, ज़ी न्यूज़, इंडिया न्यूज़, ईटीवी और रिपब्लिक भारत जैसे प्रमुख समाचार चैनलों में रिपोर्टर, एंकर, प्रोड्यूसर और खोजी पत्रकार के रूप में काम किया है. सितंबर 2022 से अंजू निर्वाण टीवी9 भारतवर्ष में एसोसिएट एडिटर के रूप में कार्यरत हैं, जहां वह रक्षा मामलों की कवरेज का नेतृत्व करती हैं, भारत के सैन्य आधुनिकीकरण, नौसेना की प्रगति, मिसाइल प्रणालियों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर कवरेज करती हैं. अंजू निर्वाण ने युद्ध क्षेत्रों से रिपोर्टिंग की है, अग्रिम पंक्ति के सैन्य अभ्यासों को कवर किया है और शीर्ष रक्षा अधिकारियों के इंटरव्यू किए हैं.

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