पेट्रोल पंपों पर बढ़ सकता है कैश का चलन: 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 5 रुपये एमडीआर के विरोध में डीलरों ने दी चेतावनी - Up18 News

Published on 16 सित॰ 2026

नई दिल्ली। यदि आप अपने वाहन में ईंधन भरवाने के लिए किसी पेट्रोल पंप पर जाने का मन बना रहे हैं, तो अपनी जेब में नकदी (कैश) रखना बेहद जरूरी हो सकता है। देश भर के पेट्रोल पंप डीलरों ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे यूपीआई के जरिए डिजिटल भुगतान लेना बंद कर सकते हैं।

दरअसल, यह पूरा विवाद 2,000 रुपये या उससे अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर प्रस्तावित 5 रुपये के मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर खड़ा हुआ है। डीलरों ने दो टूक चेतावनी दी है कि अगर उन्हें प्रत्येक बड़े लेन-देन पर फिक्स्ड एमडीआर शुल्क चुकाना पड़ा, तो वे मजबूरन 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान स्वीकार करना बंद कर देंगे और केवल कैश पेमेंट ही लेंगे।

​पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर मिलने वाला उनका कमीशन या मार्जिन पहले से ही बेहद सीमित है, ऐसे में प्रत्येक बड़े डिजिटल लेन-देन पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क थोपना उनके लिए भारी आर्थिक संकट पैदा कर देगा।

डीलरों और संघों का क्या है मुख्य तर्क?

​’फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स’ के प्रवक्ता मोंटी सहगल का इस संबंध में कहना है कि यदि ईंधन विक्रेताओं (फ्यूल रिटेलर्स) को इस शुल्क से छूट नहीं दी जाती है, तो उन्हें अपनी व्यावसायिक लागत बचाने के लिए 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान रोकने ही होंगे। इसके अलावा, कर्नाटक के पेट्रोलियम डीलरों के आधिकारिक संगठन ने भी केंद्र सरकार और सरकारी तेल विपणन कंपनियों को पत्र लिखकर मांग की है कि पेट्रोल पंपों को एमडीआर के दायरे से पूरी तरह मुक्त रखा जाए।

डीलरों का मुख्य तर्क यह है कि देश में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दाम तेल कंपनियां तय करती हैं, और डीलर अपनी मर्जी से कीमतें बढ़ाकर डिजिटल भुगतान का खर्च आम ग्राहकों से वसूल नहीं सकते। वहीं, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मुंबई और राजस्थान के डीलरों का संयुक्त रूप से यह कहना है कि उन्हें प्रति लीटर केवल 2.40 से 3.40 रुपये के आसपास का बहुत कम मार्जिन मिलता है, जो सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां तय करती हैं। ऐसे में इस मामूली मार्जिन पर किसी भी प्रकार का एमडीआर चार्ज उनके लिए एक बड़ा वित्तीय बोझ बन जाएगा।

​एनपीसीआई (NPCI) ने दी है अपनी सफाई

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) के जरिए पेट्रोल पंपों पर लागू होने वाले एमडीआर चार्ज को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। एनपीसीआई के अनुसार, यदि कोई ग्राहक यूपीआई के जरिए 2,000 रुपये तक का ईंधन भुगतान करता है, तो उस पर एमडीआर पूरी तरह से शून्य (फ्री) रहेगा। हालांकि, यदि भुगतान 2,000 रुपये की सीमा को पार करता है, तो पेट्रोल पंप के ऐसे लेन-देन पर 5 रुपये का फ्लैट कंसेशनल चार्ज लागू किया जाएगा।

​एनपीसीआई का अपना तर्क है कि इस 5 रुपये के फ्लैट शुल्क का उद्देश्य बड़े फ्यूल ट्रांजैक्शन पर लगने वाले भारी-भरकम प्रोसेसिंग शुल्क से पेट्रोल पंप ऑपरेटरों को राहत देना है। इसके बावजूद, पेट्रोलियम डीलरों के विभिन्न संघों का मानना है कि पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक का ईंधन डलवाना आम बात है, इसलिए यह शुल्क उनके लिए लगातार बढ़ता हुआ और असहनीय खर्च बन जाएगा।

गौरतलब है कि अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर में कुल 1,03,023 पेट्रोल पंप संचालित हो रहे हैं। इनमें से 90 फीसदी से अधिक पंप देश की तीन प्रमुख सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के अंतर्गत आते हैं। इसके अलावा नायरा, जियो-बीपी और शेल जैसी निजी कंपनियां भी देश के विभिन्न हिस्सों में अपने रिटेल आउटलेट चला रही हैं।