जोधपुर संभाग ड्रग पेडलर्स (तस्करों) का मुख्य केंद्र बन गया हैं। इनमें बाड़मेर, पाली, जालौर और जोधपुर शामिल हैं। यह क्षेत्र एमडी (मेफेड्रोन), स्मैक और अफीम तस्करी का सबसे बड़ा हॉटस्पॉट है। यहां की भौगोलिक स्थिति और गुजरात बॉर्डर नजदीक होने से तस्कर सब
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- जोधपुर संभाग बना ड्रग पेडलर्स का केंद्र
भास्कर टीम ने इन ड्रग पेडलर के ठिकानों पर 10 दिन तक निगरानी की तो महिला पेडलर्स स्मैक व गांजा बेचते मिलीं। बीकानेर जोन में गंगानगर और हनुमानगढ़ पंजाब बॉर्डर से सटे होने से ‘चिट्टा’ (हेरोइन) और नशीली गोलियों-कैप्सूल की तस्करी का मुख्य केंद्र है। चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ अफीम बेल्ट है। एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी बताया कि तस्करों के खिलाफ सख्ती बरती जा रही है। अब तक करीब 100 करोड़ की प्रॉपर्टी सीज की जा चुकी है। आने वाले दिनों में हम करीब 300 करोड़ की प्रॉपर्टी तस्करों की सीज करेंगे। अगर कहीं नशे की खेप बिक रही है तो कार्रवाई करेंगे।
भास्कर टीम के कैमरे में कैद हुईं महिला ड्रग पेडलर
खरीदार सहमा तो बोलीं-आराम से लो, कोई डर नहीं
सीन 1.... दो महिलाएं बैठी थी

खाट पर बैठी आमने-सामने दो महिलाएं और पास में एक मासूम बच्ची। टीम ने एक महिला से पूछा- गांजा है तो उसने तपाक से थैली में से दो पुड़ियां निकाल कर दे दी। जब यह पूछा कि स्मैक मिल जाएगी क्या? तो सामने बैठी महिला ने कहा कि हां, मिल जाएगी। पर एक पुड़ी के दो सौ रुपए लगेंगे। यह पूछने पर कि कितनी है, उसने अपने कपड़ों में से चने से भी छोटी एक पुड़िया निकालकर दिखाई। इसी दौरान वहां स्मैक खरीदने आए एक अन्य युवक डरते हुए बोला कि जल्दी दे दो, पुलिस आ गई तो...। महिला ने कहा- कोई डर नहीं, आराम से लो, यहां कोई नहीं आता।
सीन 2.... गांजा बेचती मिली

सांसी कॉलोनी की एक गली में घुसते ही पलंग पर बैठी महिला गांजा बेच रही है। उसने एक पुड़िया गांजे के पचास रुपए लिए। पास में भीड़भाड़ और युवाओं की आवाजाही। किसी भी इंसान के गली में आने पर वहां खड़े युवक और औरतें शक की नजरों से घूरने लगते हैं।
सीन 3...युवक आया पुड़िया दे गया

इसी कॉलोनी में एक महिला खाट पर बैठी है। पीछे उसके एक युवक नशे में पड़ा। एक युवक ने जैसे ही इशारा किया, उसने बुलाया और पुड़ियां थमा दी। पूछने पर बोली-यहां सब मिल जाएगा।
इसलिए महिला पेडलर... क्योंकि कम संदेह के घेरे में आती हैं एक्सपर्ट के मुताबिक, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां आमतौर पर पुरुषों के मुकाबले महिलाओं पर कम शक करती हैं। भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे स्कूल, कॉलेज या पब के पास महिलाएं आसानी से बिना किसी संदेह के ड्रग्स सप्लाई कर पाती हैं। कानूनी नियमों के अनुसार, किसी महिला की शारीरिक तलाशी केवल महिला पुलिसकर्मी ही ले सकती है। कई बार हर नाके या चेकिंग पॉइंट पर महिला पुलिसकर्मी तैनात नहीं होतीं, जिसका फायदा उठाकर ड्रग माफिया महिलाओं को ‘ड्रग म्यूट’ या कोरियर के रूप में इस्तेमाल करते हैं।