पानीपत17 घंटे पहले
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पानीपत के किसान भवन में एकजुट हुए किसान गेहूं के रेट बढ़ाने की जानकारी देते हुए।
पानीपत जिले में गेहूं के भाव में सरकार की ओर से प्रति क्विंटल महज 25 रुपए की बढ़ोतरी किए जाने पर किसानों ने नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन फसल के दाम में नाममात्र की बढ़ोतरी की गई है। किसानों ने गेहूं के भाव में कम से कम 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ोतरी करने की मांग की है।
भाकियू जिला प्रधान दिलबाग बिंझौल समेत किसानों ने कहा कि गेहूं का भाव पहले 2575 रुपए प्रति क्विंटल था, जिसे बढ़ाकर 2600 रुपए किया गया है। यानी किसानों को प्रति क्विंटल सिर्फ 25 पैसे अधिक मिलेंगे। किसानों ने कहा कि प्रति किलो के हिसाब से यह महज 25 पैसे की बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि किसानों को कम से कम दो रुपए प्रति किलो की बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने चवन्नी बढ़ाकर किसानों को निराश किया है।

किसानों को संबोधित करते किसान नेता दिलबाग बिंझौल।
1692 रुपए आता है खर्च, बढ़ाया नाममात्र
किसानों ने कहा कि सी-2 लागत के हिसाब से गेहूं के भाव में करीब 600 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी होनी चाहिए थी। अगर सरकार इतना नहीं बढ़ा सकती थी, तो कम से कम 200 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी करती। किसानों के अनुसार गेहूं की फसल तैयार करने में प्रति क्विंटल करीब 1692 रुपए खर्च आता है। खाद, बीज, दवा, डीजल और अन्य कृषि लागत के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
इसके बावजूद फसल के भाव में केवल 25 रुपये की बढ़ोतरी किसानों की लागत के मुकाबले बेहद कम है।

अनाज मंडी में जाने की तैयारी करते किसान।
करीब 34 करोड़ रुपए गन्ना भुगतान अटका
किसानों ने उत्तराखंड के इकबालपुर स्थित चीनी मिल से गन्ने के भुगतान का मुद्दा भी उठाया। किसानों के अनुसार मिल में भेजे गए गन्ने का करीब 34 करोड़ रुपए भुगतान बकाया है। यह राशि करीब 350 किसानों की बताई गई है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द भुगतान नहीं किया, तो किसान सचिवालय के सामने गन्ना उतारकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
किसानों ने कहा कि लंबे समय से भुगतान अटकने के कारण किसान आर्थिक संकट में हैं।
BJP प्रदेशाध्यक्ष के घेराव की चेतावनी
उन्होंने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता के घर का घेराव करने की भी चेतावनी दी। किसानों ने कहा कि लगातार बढ़ते आर्थिक दबाव के कारण किसान बेहद परेशान हैं और कुछ किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होने की स्थिति में पहुंच रहे हैं। इस दौरान तेजपाल, गाजे सिंह, धर्मबीर, रणवीर गुलिया और जयकिशन समेत अन्य किसान मौजूद रहे।
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