20 दिन से कस्टडी में 22 वर्षीय स्टूडेंट... सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत पर सुनवाई को सहमति दी

Published on 16 सित॰ 2026

20 दिन से कस्टडी में 22 वर्षीय स्टूडेंट… सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत पर सुनवाई को सहमति दी

सुप्रीम कोर्टImage Credit source: PTI (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने 22 साल के कॉलेज स्टूडेंट की नियमित जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए सहमति दे दी है. यह याचिका 22 साल के एक कॉलेज स्टूडेंट ने दायर की थी, जो पिछले 20 दिनों से कस्टडी में है. मामले को जल्द सुनवाई के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और जस्टिस सूर्य कांत, जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच के सामने रखा गया, इसके बाद, कोर्ट ने केस को लिस्ट करने की सहमति दे दी.

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कई फैसलों में यह स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर कुछ भी नहीं है और कोर्ट को जमानत याचिकाओं का निपटारा तेजी से करना चाहिए. कोर्ट ने पहले भी कई मामलों में छात्रों के करियर और परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें अंतरिम या नियमित जमानत देने को प्राथमिकता दी है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्टूडेंट की नियमित जमानत पर अब जल्द ही सुनवाई करेगी.

जमानत याचिका पर जल्द सुनवाई कैसे होती है?

भारतीय न्यायिक प्रणाली में, आरोपी व्यक्तियों, खासकर छात्रों या युवाओं के लिए ‘व्यक्तिगत स्वतंत्रता’ और उनके एकेडमिक करियर को ध्यान में रखते हुए सुनवाई में तेजी लाने के लिए विशेष प्रयास किए जा सकते हैं. बताया जा रहा है कि जब कोई मामला बहुत जरूरी हो, जैसे किसी छात्र की पढ़ाई या परीक्षा का नुकसान होने की संभावना हो, तो वकील कोर्ट से मामले को तुरंत लिस्ट करने का विशेष अनुरोध करते हैं.

फर्जी मेडिकल डिग्री के मामले में याचिका खारिज

वहीं एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नकली और फर्जी मेडिकल डिग्री के मामले में एक वकील द्वारा दायर जनहित याचिका को खारिज कर दिया। खुद पेश होकर, याचिकाकर्ता ने मेडिकल नियमों के ऑडिट और मामले की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बनाने की मांग की थी. जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे ऐसी याचिकाएं बार-बार दायर न करें.

कोर्ट पर अनावश्यक बोझ न डाले

बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह ऐसी याचिकाओं के जरिए कोर्ट पर अनावश्यक बोझ न डाले. अपनी बात के समर्थन में आंकड़े पेश करते हुए, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि हर चार में से कम से कम एक डॉक्टर के पास नकली या जाली डिग्री है. उसने तर्क दिया कि याचिका में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक मुद्दा उठाया गया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.

पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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