रोहतक5 घंटे पहले
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रोहतक में कार्यक्रम में महामंडलेश्वर स्वामी राघवेंद्र भारती को सम्मानित करते हुए।
रोहतक की जनता कॉलोनी स्थित माता धनपति देवी चैरिटेबल ट्रस्ट पिछले 20 सालों से गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का काम कर रहा है। ट्रस्ट ने अपना स्थापना दिवस समारोह मनाया, जिसमें बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया।
ट्रस्ट के चेयरमैन हरिप्रकाश गुप्ता ने बताया कि माता धनपति देवी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 2006 में 17 बच्चों के साथ की गई थी। लेकिन आज ट्रस्ट में 320 बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे है। अभाव ग्रस्त बच्चों को शिक्षित करके समाज की मुख्य धारा में लाने का जो उद्देश्य रखा गया था, वो आज सार्थक हो रहा है।

ट्रस्ट के चेयरमैन हरिप्रकाश गुप्ता।
300 बच्चे अच्छे पदों पर कार्यरत
हरिप्रकाश गुप्ता ने बताया कि ट्रस्ट से शिक्षा ग्रहण करने वाले 300 के करीब बच्चे सरकारी व प्राइवेट नौकरियों में अच्छे पदों पर काम कर रहे है। इनमें डॉक्टर, इंजीनियर व सरकारी नौकरी में अधिकारी भी शामिल है। ट्रस्ट में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को सैलरी मिलती है, जबकि बच्चे निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते हैं।

समाजसेवी गोबिंदराम सिंघल।
युवा पीढ़ी को ट्रस्ट कर रहा संस्कारित
समाजसेवी गोबिंदराम सिंघल ने कहा कि शिक्षा व संस्कार देकर ट्रस्ट युवा पीढ़ी को सही दिशा देने का काम करता है। हरिप्रकाश गुप्ता ने अपने घर के कमरे से शुरूआत की थी, आज एक बिल्डिंग भी बन गई और बच्चों को सभी सुविधाएं भी मिल रही है, क्योंकि शिक्षा से बड़ा कोई दान नहीं है। आज 300 से अधिक बच्चों को शिक्षित व संस्कारवान बनाया जा रहा है।

ट्रस्ट के सदस्य सतीश भारद्वाज।
बच्चों के सपनों को मिल रही उड़ान
ट्रस्ट के सदस्य सतीश भारद्वाज ने बताया कि ट्रस्ट के माध्यम से बच्चे अपने सपनों को पूरा करके देशहित में अपनी सेवाएं दे रहे है। सरकारी नौकरियों के साथ प्राइवेट नौकरी में भी अच्छे पदों पर है। नौकरी के बाद भी बच्चे ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं और अन्य बच्चों को शिक्षित करने के लिए अपना योगदान भी दे रहे हैं।

ट्रस्ट के सेक्रेटरी अजेश गुप्ता।
ट्रस्ट ने अपने उद्देश्य को किया सार्थक
ट्रस्ट सेक्रेटरी अजेश गुप्ता ने बताया कि ट्रस्ट का उद्देश्य यही है कि बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाए। जो बच्चे आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई को बीच में छोड़ देते हैं या उनके अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजते, ऐसे बच्चो को ट्रस्ट शिक्षा देने का काम करता है। यहां तक कि उनके स्कूल की फीस भी ट्रस्ट ही वहन करता है। ट्रस्ट के बच्चे बोर्ड परीक्षाओं में भी अच्छे अंकों से पास होते हैं।
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