जिला विधिक सेवा प्राधिकार के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद और अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, दाउदनगर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।
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इसमें कुल 2,594 मामलों का निस्तारण किया गया और करीब 3 करोड़ रुपये का समझौता कराया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार की अध्यक्ष आनंदिता सिंह,
परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार, डीडीसी अनुपम सिंह, एसपी प्रतिनिधि विनोद सिंह, प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल समेत अन्य अधिकारियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, बैंक व बीमा कंपनियों के अधिकारी और पक्षकार मौजूद रहे।

लोक अदालत का उद्घाटन करते अधिकारी
50 रुपये के विवाद में दर्ज केस, लोक अदालत में हुआ समझौता
अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि रफीगंज थाना कांड संख्या 207/24 और जीआर 1512/24 में औरवां रफीगंज निवासी रामदास चौधरी ने 50 रुपये के बकाया को लेकर हुए विवाद के बाद गांधी रजक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
मामले में भादंवि की धारा 341, 323, 504 और 379 के तहत केस दर्ज हुआ था। लंबे समय से चल रहे इस विवाद को शनिवार को दोनों पक्षों ने आपसी सहमति और राजी-खुशी से खत्म कर दिया।
10 साल पुराने भाई-भाई के विवाद का भी निपटारा
रफीगंज थाना कांड संख्या 180/15 और जीआर 2129/15 में खैरा सिहुरी निवासी कृष्णा दास ने अपने भाई अर्जुन दास के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया था। प्राथमिकी के अनुसार, कृष्णा दास सुबह गोशाला गया था। वहां उसने अपने छोटे भाई को जानवरों के साथ मारपीट करते देखा। मना करने पर दोनों के बीच विवाद हुआ और मारपीट में कृष्णा घायल हो गया। मामले में 12 जनवरी 2023 को धारा 341/323 के तहत संज्ञान लिया गया था। शनिवार को दोनों भाइयों ने आपसी सहमति से मुकदमे का निपटारा करा लिया।

2594 मामलों का किया गया निष्पादन
पारिवारिक मामलों में 50 केस निपटे, बताया गया नया रिकॉर्ड
लोक अदालत में पारिवारिक और वैवाहिक मामलों के निस्तारण में 50 मामलों का आपसी सुलह-समझौते के आधार पर निष्पादन किया गया। इसे पारिवारिक मामलों के निस्तारण का अब तक का नया रिकॉर्ड बताया गया। इसके अलावा 532 सुलहनीय आपराधिक मामलों का भी निस्तारण हुआ। 11 चेक बाउंस मामलों में 50 लाख रुपये का समझौता कराया गया। अनुमंडल पदाधिकारी न्यायालय से संबंधित 695 और टेलीफोन से जुड़े 19 मामलों का भी निपटारा किया गया।
प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश आनंदिता सिंह ने कहा कि लोक अदालत में किसी एक पक्ष की जीत और दूसरे की हार नहीं होती। दोनों पक्षों की संतुष्टि ही इसकी सफलता है। उन्होंने लोगों से लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों को सुलह-समझौते से खत्म कराने के लिए लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की।
685 ट्रैफिक चालान निपटे, 11.52 लाख रुपये की वसूली
राष्ट्रीय लोक अदालत में एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना के तहत विशेष कैंप लगाया गया। इसमें 685 लंबित ट्रैफिक मामलों का निष्पादन हुआ और 11 लाख 52 हजार 422 रुपये की वसूली की गई। योजना के तहत 90 दिनों से अधिक समय से लंबित ई-चालानों का निपटारा किया गया।

लोक अदालत में मौजूद लोग
600 बैंक ऋण मामलों में 2.35 करोड़ की राहत
बैंक ऋण से जुड़े 600 मामलों का भी निष्पादन किया गया। इन मामलों में पक्षकारों को कुल 2 करोड़ 35 लाख 96 हजार 56 रुपये की राहत दी गई। वहीं मोटर दुर्घटना से जुड़े दो मामलों में 5.25 लाख रुपये का समझौता कराया गया।
चिकित्सा शिविर में शुगर, बीपी और हीमोग्लोबिन की जांच
लोक अदालत परिसर में चिकित्सा शिविर भी लगाया गया। इसमें शुगर, बीपी और हीमोग्लोबिन की जांच की गई। जरूरत के अनुसार लोगों को दवाएं भी दी गईं।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान ने लोक अदालत की सफलता में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों और अर्धविधिक स्वयंसेवकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि कई दिनों से किए जा रहे सामूहिक प्रयास का परिणाम राष्ट्रीय लोक अदालत की सफलता के रूप में सामने आया है।