मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर 1993 के पुलिस गोलीकांड का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है। ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश की 1993 गोलीकांड पर जांच आयोग की रिपोर्ट (फोटो- पीटीआई)
HighLights
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पेश की 1993 गोलीकांड पर जांच आयोग की रिपोर्ट
पिछली तृणमूल सरकार ने आयोग की सिफारिशों पर अमल नहीं करने का लगाया आरोप
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर 1993 के पुलिस गोलीकांड का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया है।
सोमवार को विधानसभा में पुलिस गोलीकांड की जांच करने वाले न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी आयोग की रिपोर्ट पेश करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग ने अपनी रिपोर्ट 2024 में ही राज्य सरकार को सौंप दी थी, लेकिन तत्कालीन तृणमूल सरकार ने न तो उसे सार्वजनिक किया और न ही उसकी महत्वपूर्ण सिफारिशों को लागू किया।
आयोग ने गोलीकांड में जान गंवाने वाले 12 शहीदों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये और प्रत्येक घायल को पांच लाख रुपये का मुआवजा देने की सिफारिश की थी, जबकि मृतकों के परिवारों को केवल दो लाख और घायलों को मात्र 15,000 रुपये देकर उनके साथ धोखाधड़ी की गई।
उल्लेखनीय है कि 21 जुलाई, 1993 को मतदाता पहचान पत्र को पहचान दस्तावेज के रूप में अनिवार्य करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर युवा कांग्रेस के राइटर्स बिल्डिंग अभियान के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की मौत हुई थी। उस समय ममता बनर्जी बंगाल युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं और इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही थीं।
मृतकों के परिवार को 25-25 लाख देने की घोषणा मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मौजूदा सरकार प्रभावित परिवारों के चाहने पर घटना के संबंध में नई एफआइआर दर्ज करने का मौका देगी।
मांग करने पर मृतकों के परिवार को 25-25 लाख और घायलों को पांच लाख का मुआवजा भी मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा।
ममता को तलब नहीं किए जाने पर उठाया प्रश्न शुभेंदु ने कहा कि आयोग के समक्ष गवाही देने वालों में 44 प्रमुख लोगों के नाम शामिल थे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बुद्धदेव भट्टाचार्य व तत्कालीन मुख्य सचिव मनीष गुप्ता भी शामिल थे जबकि इस घटना की प्रमुख प्रत्यक्षदर्शी ममता बनर्जी को आयोग ने कभी तलब नहीं किया।
शुभेंदु ने आरोप लगाया कि आरोपित मनीष गुप्ता को ममता ने मंत्रिमंडल में जगह दी। आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि मामले की उचित जांच नहीं हुई। आरोपितों को बचाने के लिए फाइलें और दस्तावेज गायब कर दिए गए।