Aug 13, 2026 05:59 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- बैंक ऑफ अमेरिका के साथ यह समझौता जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की तीसरी बड़ी वैश्विक साझेदारी है
- इससे पहले कंपनी म्यूचुअल फंड कारोबार के लिए ब्लैकरॉक और बीमा कारोबार के लिए एलियांज के साथ साझेदारी कर चुकी है

जियो फाइनेंशियल और बैंक ऑफ अमेरिका में ₹18000 करोड़ की डील पर क्या बोले अंबानी
मुकेश अंबानी की जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड ने वित्तीय सेवा कारोबार को विस्तार देने के लिए बैंक ऑफ अमेरिका के साथ बड़ी डील किया है। 12 अगस्त 2026 को हुए ज्वाइंट वेंचर एग्रीमेंट के तहत बैंक ऑफ अमेरिका की सहायक कंपनी NB Holdings, जियो क्रेडिट लिमिटेड में कुल 49.9 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगी। इसके लिए बैंक ऑफ अमेरिका करीब 1.9 अरब डॉलर यानी लगभग ₹18,168 करोड़ का निवेश करेगा।इस डील से जियो क्रेडिट का वैल्यूएशन उसकी नेटवर्थ के करीब 2.5 गुना पर होता है। खास बात यह है कि जियो क्रेडिट को शुरू हुए अभी करीब दो साल ही हुए हैं।
मुकेश अंबानी ने क्या कहा?
मुकेश अंबानी ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए ऐसा वित्तीय तंत्र जरूरी है, जो बड़े पैमाने पर काम करने के साथ भरोसेमंद और समावेशी हो। उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल तकनीक और बेहतर गवर्नेंस के जरिए भारतीयों के लिए वित्तीय सेवाओं को आसान बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक विशेषज्ञता और जियो की डिजिटल पहुंच का मेल भारत में क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा।
पहले 26.5% हिस्सेदारी, फिर 49.9% तक पहुंच जाएगा निवेश
समझौते के तहत एनबी होल्डिंग्स पहले प्रेफरेंशियल इश्यू के जरिए जियो क्रेडिट के 4.29 करोड़ इक्विटी शेयर खरीदेगी। इसके लिए करीब ₹6,613 करोड़ का भुगतान किया जाएगा। इससे बैंक ऑफ अमेरिका को शुरुआती तौर पर 26.50 प्रतिशत हिस्सेदारी मिलेगी।
इसके बाद एनबी होल्डिंग्स 7.56 करोड़ वारंट के लिए करीब ₹11,655 करोड़ का निवेश करेगी। इन वारंट को 18 महीने के भीतर इक्विटी शेयरों में बदला जा सकेगा। वारंट के कन्वर्जन के बाद बैंक ऑफ अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 49.90 प्रतिशत हो जाएगी।
महज 2 साल में खड़ा हो गया बहुत बड़ा कारोबार
जियो क्रेडिट, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की NBFC कंपनी है। यह ग्राहकों को अलग-अलग तरह के कर्ज उपलब्ध कराती है। कंपनी ने बहुत कम समय में बड़ा कारोबार खड़ा किया है। करीब दो साल में इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट ₹30,667 करोड़, यानी लगभग 3.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। कंपनी का फोकस डिजिटल तरीके से कर्ज उपलब्ध कराने और भारत में क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने पर है।
क्या रंग लाएगी यह साझेदारी
इस साझेदारी का मकसद जियो फाइनेंशियल की भारत में मजबूत डिजिटल पहुंच और स्थानीय बाजार की समझ को बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ना है। दोनों कंपनियां डिजिटल वित्तीय सेवाओं, नए क्रेडिट उत्पादों, रिस्कक मैनेजमेंट और ग्राहकों तक कर्ज की पहुंच बढ़ाने पर काम करेंगी।
बोर्ड में दोनों कंपनियों की बराबर हिस्सेदारी
डील के बाद जियो क्रेडिट के बोर्ड में जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका को बराबर प्रतिनिधित्व मिलेगा। हालांकि कंपनी की मौजूदा मैनेजमेंट टीम ही इसके रोजमर्रा के संचालन और रणनीति को आगे बढ़ाएगी। जियो क्रेडिट, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज की वित्तीय रिपोर्टिंग में सहायक कंपनी के रूप में बनी रहेगी।
बैंक ऑफ अमेरिका भी भारत को लेकर उत्साहित
बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और सीईओ ब्रायन मोयनिहान ने भारत को दुनिया के महत्वपूर्ण विकासशील बाजारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जियो फाइनेंशियल ने सिर्फ दो वर्षों में उल्लेखनीय पैमाना हासिल किया है। बैंक ऑफ अमेरिका की वैश्विक पहुंच और डिजिटल विशेषज्ञता को जियो फाइनेंशियल के मार्केट पर पकड़ और ग्राहक आधार से जोड़ने से भारत में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
