त्रिपुरा से ऑस्ट्रिया-नीदरलैंड भेजा गया 18 मीट्रिक टन जैविक चावल, किसानों को मिल सकता है 40% तक ज्यादा भाव

Published on 3 सित॰ 2026

03 सितंबर 2026, नई दिल्ली: त्रिपुरा से ऑस्ट्रिया-नीदरलैंड भेजा गया 18 मीट्रिक टन जैविक चावल, किसानों को मिल सकता है 40% तक ज्यादा भाव – त्रिपुरा के किसानों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच का नया रास्ता खुला है। 2 सितंबर 2026 को राज्य से एनपीओपी प्रमाणित चावल की 18 मीट्रिक टन खेप ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड के लिए रवाना की गई। इस पहल को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) का समर्थन मिला है। इसका उद्देश्य त्रिपुरा के स्थानीय किसानों को नए बाजार उपलब्ध कराना और उन्हें संगठित निर्यात आधारित उत्पादन से अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना है।

चार पारंपरिक चावल की किस्में होंगी निर्यात

निर्यात की गई खेप में त्रिपुरा की चार पारंपरिक चावल की किस्में शामिल हैं। इनमें सुगंधित काला खासा चावल, सुगंधित हरिनारायण चावल, बिरोन चावल और मैमी हांगा चावल शामिल हैं। बिरोन सफेद चिपचिपा चावल है, जबकि मैमी हांगा काले चावल की किस्म है। यह चावल त्रिपुरा स्टेट ऑर्गेनिक फार्मिंग डेवलपमेंट एजेंसी (टीएसओएफडीए) के सहयोग से संचालित किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) से एकत्र किया गया है।

इस पहल से जुड़े किसानों को घरेलू बाजार की तुलना में 40 प्रतिशत तक अधिक मूल्य मिलने की उम्मीद है। इससे किसानों के लिए संगठित तरीके से उत्पादन करने और निर्यात बाजार से जुड़ने का आर्थिक प्रोत्साहन तैयार होगा। चावल का निर्यात सोनीपत स्थित मैसर्स प्रथिति ऑर्गेनिक फूड्स के माध्यम से किया गया है। यह पहल स्थानीय उत्पादकों और एफपीओ को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के साथ प्रमाणित जैविक उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग में त्रिपुरा की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

रिवर्स बायर-सेलर मीट के बाद मिला निर्यात का मौका

यह निर्यात पिछले महीने त्रिपुरा में एपीडा की ओर से आयोजित रिवर्स बायर-सेलर मीट के बाद हुआ है। इस कार्यक्रम में संभावित अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और स्थानीय उत्पादकों को एक मंच पर लाया गया था। बैठक के जरिए बने बाजार संपर्क अब वास्तविक अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसर में बदलते दिखाई दे रहे हैं।

ऑस्ट्रिया और नीदरलैंड जैसे बाजारों में गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा, प्रमाणन और उत्पाद की जानकारी व ट्रेसेबिलिटी को महत्व दिया जाता है। ऐसे में एनपीओपी प्रमाणित चावल का निर्यात त्रिपुरा के पारंपरिक और जैविक कृषि उत्पादों के लिए नए बाजार की संभावना को मजबूत करता है।

कृषि मंत्री ने जताया गर्व

खेप को त्रिपुरा के कृषि मंत्री रतन लाल नाथ, एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव और त्रिपुरा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अपूर्व रॉय ने रवाना किया। इस दौरान एपीडा की सचिव डॉ. स्वासती बोस, नाबार्ड की महाप्रबंधक तनुश्री भट्टाचार्य, कृषि निदेशक फणीभूषण जमातिया, टीएसओएफडीए के मिशन निदेशक राजीव देबबर्मा, एपीडा के अधिकारी, निर्यातक, लॉजिस्टिक्स साझेदार और प्रगतिशील चावल किसान मौजूद रहे।

कृषि मंत्री रतन लाल नाथ ने कहा कि पारंपरिक एनपीओपी प्रमाणित चावल का अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात गर्व का क्षण है। उन्होंने इसे किसानों, एफपीसी और अन्य हितधारकों की मेहनत का परिणाम बताया। उनके अनुसार, त्रिपुरा में जैविक और पारंपरिक उत्पादों की अच्छी संभावनाएं हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच से किसानों को बेहतर मूल्य तथा टिकाऊ आजीविका के अवसर मिल सकते हैं।

एपीडा अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि यह निर्यात पूर्वोत्तर भारत की जैविक और कृषि निर्यात क्षमता को दर्शाता है। एपीडा किसानों और एफपीसी को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के साथ प्रमाणन, ट्रेसेबिलिटी और गुणवत्ता व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रहा है, ताकि किसानों के लिए संगठित और टिकाऊ निर्यात के अवसर तैयार किए जा सकें। यह पहल एपीडा, त्रिपुरा सरकार और जैविक मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारकों के समन्वित प्रयासों को दर्शाती है। इसका उद्देश्य प्रमाणित जैविक उत्पादों के निर्यात का विस्तार करना और किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़कर उनके लिए नए बाजार अवसर तैयार करना है।

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