राजधानी में 18 लाख से ज्यादा वाहनों का ट्रैफिक संभालने के लिए सिर्फ 390 ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात हैं। पुलिस कमिश्नरेट लागू होने के बाद कराए गए सर्वे में ट्रैफिक दबाव, सड़क हादसों और वीआईपी मूवमेंट का आकलन किया गया। रिपोर्ट में शहर के लिए ही 1846 ट्रै
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यानी मौजूदा बल जरूरत के मुकाबले करीब साढ़े चार गुना कम है। वहीं आबादी और वाहनों के आधार पर यह जरूरत करीब 2571 तक पहुंचती है।
शहर में अभी सिर्फ 4 ट्रैफिक थाने स्वीकृत हैं, जबकि 10 से ज्यादा की जरूरत बताई गई है। पुलिस कमिश्नर ने शहर में यातायात व्यवस्था और उपलब्ध बल का सर्वे कर जून में अतिरिक्त बल के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
रायपुर में शासन से पंडरी, पचपेड़ी नाका, टाटीबंध और माना, यानी चार ट्रैफिक थानों को ही मंजूरी मिली है। इनकी अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। ग्रामीण क्षेत्र के खरोरा, मंदिर हसौद और अभनपुर में भी तीन ट्रैफिक थानों की जरूरत बताई गई है।
शासन के पास रिपोर्ट... ट्रैफिक डीसीपी डॉ. अर्चना झा के मुताबिक रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सर्वे रिपोर्ट तैयार की गई है। इसमें अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है।
25 लाख से ज्यादा आबादी; मौजूदा बल जरूरत के मुकाबले करीब साढ़े चार गुना कम
ट्रैफिक पुलिस ने सी श्रेणी के शहर के मानक के आधार पर 1846 जवानों की मांग की है। बीपीआर एंड डी के अनुसार सी श्रेणी में 20 लाख तक आबादी वाले शहर आते हैं। रायपुर जिले की आबादी 25 लाख से ज्यादा और शहर की आबादी करीब 20 लाख है। शहर में 18 लाख से अधिक वाहन पंजीकृत हैं। उपलब्ध मानकों और वाहनों की संख्या के आधार पर करीब 2571 ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की जरूरत बनती है। शहर और वाहनों का दायरा बढ़ने के साथ यह आवश्यकता भी बढ़ेगी।
33 थानों के लिए भी मानक से कम पुलिस बल: कमिश्नरेट क्षेत्र में 21 और रायपुर ग्रामीण में 12 थाने हैं। दोनों में करीब 2750 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं, जबकि स्वीकृत पद 3650 हैं। यानी स्वीकृत पदों के मुकाबले ही करीब 900 पुलिसकर्मियों की कमी है। दोनों क्षेत्रों की संयुक्त आबादी 25 लाख से अधिक है। दिए गए बीपीआर एंड डी मानक के अनुसार इतनी आबादी के लिए 5096 से अधिक पुलिसकर्मियों की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त दोनों इकाइयों में कम से कम 1500 जवान रिजर्व बल के रूप में होने चाहिए।

26 साल में आबादी-वाहन बढ़े, पर उसी अनुपात में नहीं बढ़ा बल
रायपुर में समस्या सिर्फ ट्रैफिक पुलिस तक सीमित नहीं है। 18 लाख से ज्यादा वाहनों के लिए 390 ट्रैफिक जवान हैं, वहीं कमिश्नरेट और ग्रामीण क्षेत्र के 33 थानों में कुल पुलिस बल भी आबादी आधारित जरूरत से काफी कम है। ऐसे में वीआईपी मूवमेंट, कानून-व्यवस्था या किसी बड़ी घटना में अतिरिक्त बल लगाने पर सामान्य ट्रैफिक और थाना व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है।
रायपुर वर्ष 2000 में राज्य की राजधानी बना। उस समय शहर की आबादी करीब 8 लाख थी। उस दौर में जितना पुलिस बल स्वीकृत किया गया था, आज भी उसी के सहारे व्यवस्था संभाली जा रही है। बीते 26 वर्षों में आबादी बढ़कर 25 लाख से अधिक हो गई, लेकिन उस अनुपात में पुलिस बल और संसाधन नहीं बढ़े।