सागर2 घंटे पहले
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मरीजों की आंखों की जांच करते स्वास्थ्य कर्मी।
सागर के बंडा में दूषित और जहरीली शराब पीने से बीमार हुए मरीजों की हालत अब धीरे-धीरे सुधर रही है। इलाज के बाद मरीजों को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेजा जा रहा है। घटनाक्रम के दौरान बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (BMC) में कुल 102 मरीज भर्ती हुए थे। इनमें 75 मरीजों को आंखों से जुड़ी परेशानी हुई थी, जबकि 22 मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई थी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया ने बताया कि 6 सितंबर को बंडा मामले में बीएमसी में भर्ती 102 मरीजों में से 75 में आंखों से संबंधित लक्षण पाए गए थे। चिकित्सकीय जांच के अनुसार, संभवतः मिथाइल अल्कोहल के सेवन से शरीर में बनने वाले फॉर्मिक एसिड के कारण ऑप्टिक नर्व में एक्सोनल इंजरी और सूजन हुई।
17 मरीजों की हालत में तेजी से सुधार
डॉक्टरों के अनुसार इस तरह की परेशानी सामान्यतः 3-4 से 4-6 सप्ताह में ठीक होने की संभावना रहती है। शुरुआत में जिन 22 मरीजों की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई थी, उन्हें मिथाइल प्रेडनिसोलोन थैरेपी दी गई।
इलाज के बाद इनमें से 17 मरीजों के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ। इसके बाद उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बाकी 5 मरीजों का विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में इलाज जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन मरीजों की हालत में भी सुधार की उम्मीद है।
प्रभावित गांवों में लगाए जा रहे स्वास्थ्य शिविर
बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में अमानक शराब पीने से बीमार हुए लोगों की जांच और उपचार के लिए जिला प्रशासन ने चिह्नित गांवों में 7 दिवसीय स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाए हैं। इन शिविरों में बंडा क्षेत्र के पाटन, चौका, बमूरा और छापरी सहित शाहगढ़ विकासखंड के नौराज, गूगरा खुर्द, डिलोना, खटोरा खुर्द, बुढना और धुरमार गांव शामिल हैं।
शिविरों में मेडिकल ऑफिसर, नेत्र चिकित्सक, नेत्र सहायक और सीएचओ की ड्यूटी लगाई गई है। अब तक स्वास्थ्य परीक्षण शिविरों में 213 लोगों की जांच की गई। इनमें 64 मरीज नेत्र संबंधी बीमारी से प्रभावित मिले, जबकि 149 लोगों में अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पाई गईं। सभी मरीजों का उपचार किया जा रहा है।
19 सितंबर तक जारी रहेंगे स्वास्थ्य शिविर
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बंडा और शाहगढ़ के चिह्नित गांवों में स्वास्थ्य परीक्षण शिविर 16 से 19 सितंबर तक आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में प्रभावित लोगों की जांच कर जरूरत के अनुसार उपचार और आगे की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
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