अमेरिका ने ईरान से जुड़े नए प्रतिबंधों की घोषणा की है, जो 16 व्यक्तियों और 10 संस्थाओं को निशाना बनाते हैं। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य तेहरान के कथित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क, शैडो बैंकिंग ऑपरेशनों और उन माध्यमों को बाधित करना है, जिनका इस्तेमाल वह अपनी सेना और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को फंड देने के लिए करता है।
इन प्रतिबंधों की घोषणा गुरुवार (स्थानीय समय) को की गई। दोनों देशों के बीच जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आ रही बाधाओं के बीच, वाशिंगटन तेहरान पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ा रहा है।
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अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने क्या कहा?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा, 'ईरान की अर्थव्यवस्था पर शिकंजा कसता जा रहा है। ईरान के तथाकथित सहयोगी भी उसे नहीं बचा सकते। वित्त विभाग तब तक पीछे नहीं हटेगा, जब तक कि ईरानी शासन का खजाना खाली न हो जाए और उसकी युद्ध मशीन को सहारा देने वाला हर वित्तीय स्रोत पूरी तरह से काट न दिया जाए।'
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विभाग ने ईरान पर क्या आरोप लगाए?
वहीं, एक्स के एक अन्य पोस्ट में, अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा कि 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट' के तहत की गई इस ताजा कार्रवाई का लक्ष्य ईरान के उन कथित प्रयासों को रोकना था, जिनके जरिए वह एक इराकी बैंक का इस्तेमाल करके अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था। विभाग का आरोप है कि यह बैंक ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों को भी मदद देता था।
वित्त विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में क्या है?
दरअसल, गुरुवार (स्थानीय समय) को जारी वित्त विभाग की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इन कदमों का निशाना वे वित्तीय संस्थान, ऑफशोर बैंक, तेल मध्यस्थ और विदेशी मुद्रा नेटवर्क हैं, जो कथित तौर पर ईरान को प्रतिबंधों से बचने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंड ट्रांसफर करने में मदद कर रहे हैं।
यह कार्रवाई किसके तहत की?
विभाग ने बताया कि यह कार्रवाई 'एग्जीक्यूटिव ऑर्डर 13902' के तहत की जा रही है, जो ईरानी अर्थव्यवस्था के कुछ खास क्षेत्रों जिनमें वित्तीय और पेट्रोलियम क्षेत्र शामिल हैं को निशाना बनाता है। जिन संस्थाओं को निशाना बनाया गया है, उनमें इराक स्थित 'इंटरनेशनल डेवलपमेंट बैंक फॉर इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस' (IDB) शामिल है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इस बैंक पर आरोप लगाया है कि यह ईरान को वित्तीय सुविधाएं मुहैया कराता है। उसे अमेरिकी डॉलर तक पहुंच दिलाता है। विभाग का आरोप है कि इस बैंक के ईरान की सरकारी संस्थाओं और इराक में ईरान-समर्थित मिलिशिया समूहों के साथ संबंध हैं।
इन प्रतिबंधों के दायरे में ईरान स्थित 'जजीरेह इंटरनेशनल बैंक कंपनी' और 'चाबहार इंटरनेशनल बैंक ओवरसीज कंपनी' भी हैं। ट्रेजरी विभाग के अनुसार, ये दोनों 'ऑफशोर' बैंक हैं, जो क्रमशः 'बैंक मेल्लत' और 'बैंक शहर' से जुड़े हुए हैं।
सैयद रूहोल्लाह रजावी पर क्या आरोप है?
विभाग ने ईरानी नागरिक सैयद रूहोल्लाह रजावी की पहचान एक ऐसे तेल मध्यस्थ के रूप में की है, जिसने कथित तौर पर ईरानी तेल बेचने और उससे मिली रकम को गुप्त बैंकिंग नेटवर्क के जरिए वापस ईरान भेजने में मदद की। विभाग के अनुसार, उसने पहले भी 'नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी' और उसकी सहायक कंपनी नाफ्टिरान 'नाफ्टिरान इंटरट्रेड कंपनी' की ओर से हर महीने लाखों बैरल तेल की विदेशों में शिपमेंट कराने में मदद की थी।
बाकि सात पर क्या आरोप है?
रजावी और उससे जुड़ी दो ईरानी कंपनियों 'तेजारत गोस्तार एटलस पर्सियन किश कंपनी' और 'फ़र्जनेगन एनर्जी पार्स कंपनी' - को भी इन नए प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है। इसके अलावा, वित्त विभाग ने ईरान के 'शहर बैंक' से जुड़ी 'फराब सोरोघ केशम कंपनी' के सात कर्मचारियों पर भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। इन पर आरोप है कि इन्होंने हांगकांग और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद 'शेल कंपनियों' (फर्जी कंपनियों) के जरिए, ईरानी तेल बेचने वाली कंपनियों और दलालों से जुड़े विदेशी मुद्रा लेन-देन में समन्वय किया था।