इंदौर37 मिनट पहले
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बिजली कंपनी के कैम्पस में खड़ी इमारत।
इंदौर में कुछ महीनों से फायर सेफ्टी के नाम पर लगातार दुकानें सील की जा रही हैं। अब तक 151 से ज्यादा इमारतें सील की जा चुकी हैं, लेकिन निगम और प्रशासन की सख्ती सिर्फ निजी बिल्डिंग तक ही सीमित है। पोलोग्राउंड स्थित म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के जीपीएच कैम्पस में सात मंजिला रेसिडेंशियल बिल्डिंग लगभग तैयार है। इसके लिए न तो निगम से नक्शा पास कराया गया न निर्माण की अनुमति ली गई है और न ही फायर एनओसी ली गई। भास्कर ने सवाल किए तो अफसर सात दिन तक फाइलें देखने का बहाना ही बनाते रहे, लेकिन बता कुछ नहीं पाए।
बिजली कंपनी ने इस भवन के निर्माण की मंजूरी 7 मई 2022 को दी थी। चार करोड़ से अधिक की इमारत अब तैयार है। बिल्डिंग का फायर प्लान 2021 में स्वीकृत हुआ, लेकिन नियमानुसार बिजली कंपनी को निर्माण कार्य शुरू करने के पहले प्रोविजनल फायर एनओसी लेना थी। उसका आवेदन तक नहीं किया गया। भास्कर ने जब पड़ताल शुरू की तो पता चला निगम से बिल्डिंग परमिशन भी नहीं ली गई है।
फायर एनओसी से सरकारी भवनों को कोई छूट नहीं- पूर्व फायर ऑफिसर रविकांत मिश्रा बताते हैं, नेशनल बिल्डिंग कोड-पार्ट-4 में फायर एनओसी सभी के लिए अनिवार्य है। सात मंजिला बिल्डिंग में आरसीसी का फायर टैंक और अंडरग्राउंड संपवेल होना जरूरी है। फायर एनओसी तभी मिलती है जब बिल्डिंग परमिशन व प्लान के साथ आवेदन किया जाए। इस बिल्डिंग का कोई आवेदन ही नहीं आया।
जांच के बाद कार्रवाई करेंगे
बिना बिल्डिंग परमिशन और फायर एनओसी के लिए किसी भी विभाग को बिल्डिंग बनाने की कोई छूट शासन स्तर पर नहीं दी गई है। यह बिल्डिंग कैसे बनी, हम इसकी जांच करवाते हैं और कार्रवाई भी करेंगे। - क्षितिज सिंघल, निगमायुक्त
लिफ्ट की भी कोई परमिशन नहीं ली गई
इस आवासीय बिल्डिंग में कुल 24 फ्लैट्स हैं, यानी छह मंजिलों पर 4-4 फ्लैट और तल मंजिल पर पार्किंग है। यहां पर लिफ्ट भी लगी है लेकिन इसकी भी अनुमति विभाग ने नहीं ली। दूसरी तरफ छत पर फ्लैट्स में पानी सप्लाय के लिए 1000-1000 लीटर की पीवीसी टंकियां ही रखी हुई हैं। इतना ही नहीं अंडरग्राउंड संपवेल भी नहीं बनाया गया है।
कागज में सेफ्टी, हकीकत में फायर टैंक नहीं बनाया
बिजली कंपनी के पास इस भवन का फायर प्लान है। 25 फरवरी 2021 के प्लान में 25 हजार लीटर का ओवर हेड वाटर टैंक दिखाया गया है। 7 फायर बॉक्स, 7 हाइड्रेंट वाल्व, टू-वे फायर ब्रिगेड इनलेट जैसे तमाम प्रावधान है। बिजली कंपनी के सिविल अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। फायर सिस्टम की संख्या तक तय थी, लेकिन हकीकत में छत पर ऐसा कोई टैंक ही नहीं बनाया है।
सवाल सुनते ही दफ्तर में बैठे ईई बोले- बीमार होने से छुट्टी पर हूं
- भास्कर ने सीजीएम प्रकाश सिंह चौहान से बात की तो वे बोले, जब काम शुरू हुआ होगा तब परमिशन ली गई होगी। मुझसे पहले रिंकेश वैश्य और उनसे पहले संतोष टैगोर सीजीएम के चार्ज में थे। भास्कर ने दोनों से बात की, लेकिन उन्हें भी न बिल्डिंग परमिशन की जानकारी थी और न फायर एनओसी के बारे में कुछ बता सके।
- ईई अजीज बूटवाला से बात की तो वे बोले, मुझे वायरल हो गया है और छुट्टी पर हूं। जबकि वे शाम 6 बजे तक ऑफिस में थे।
- एसई डीके वैध ने शुक्रवार को बोला- फाइल में सारी परमिशन होना चाहिए, मैं भोपाल आया हूं। फिर बोले- सोमवार को बताऊंगा। मंगलवार को कहा कि बुधवार दोपहर 12 बजे तक कॉल कर पूरी स्थिति स्पष्ट कर दूंगा और फाइल दिखा दूंगा। लेकिन बुधवार को उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और न कॉल रिसीव किया।
सीधी बात
प्रकाश सिंह, सीजीएम, म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कंपनी
बिना बिल्डिंग परमिशन के यह इमारत कैसे खड़ी हो गई?
- फाइल चेक करवाते हैं।
बिल्डिंग को फायर एनओसी भी नहीं मिल रही है?
- फायर एनओसी को लेकर प्रक्रिया जरूर हुई होगी।
फायर टैंक नहीं, लिफ्ट भी बना अनुमति लगा दी गई?
- इंजीनियर पता लगा रहे हैं।
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