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151 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा... रास्ते में घने जंगल, पहाड़, पथरीली पगडंडियां और उफनती नदियां... लगातार बारिश से बढ़ी मुश्किलें और पैरों में पड़े छाले। इसके बावजूद 600 कांवड़ियों के कदम नहीं रुके। अमरकंटक से कांवड़ में भरा मां नर्मदा का जल लेकर निकला यह जत्था रविवार को भोरमदेव पहुंचा।
यहां भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर यात्रा का समापन किया गया। पंडरिया विधायक भावना बोहरा के नेतृत्व में 10 अगस्त को शुरू हुई यात्रा के अंतिम पड़ाव पर भोरमदेव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया। इस यात्रा की खास तस्वीर स्वतंत्रता दिवस पर देखने को मिली। 15 अगस्त को डोंगरिया में ध्वजारोहण के बाद कांवड़िए एक हाथ में तिरंगा और कंधे पर कांवड़ लेकर आगे बढ़े। डोंगरिया से बोड़ला, सुकवापारा, जैताटोला और चौरा होते हुए कांवड़िए भोरमदेव पहुंचे। रास्ते में ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने जगह-जगह पुष्पवर्षा और सेवा शिविर लगाकर कांवड़ियों का स्वागत किया।
पैरों में छाले, रास्ते में बारिश... लेकिन रुकी नहीं यात्रा: अमरकंटक से भोरमदेव तक का सफर कांवड़ियों के लिए आसान नहीं था। कई जगह जंगल के रास्ते मिले तो कहीं पथरीली चढ़ाई। बारिश के कारण नदी-नालों में पानी बढ़ गया। इसके बावजूद कांवड़िए लगातार आगे बढ़ते रहे। कई श्रद्धालुओं के पैरों में छाले भी पड़े, लेकिन यात्रा पूरी करने का संकल्प कमजोर नहीं हुआ। रास्तेभर हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे उत्साह बढ़ाते रहे।
इस अवसर पर पंडरिया की विधायक भावना बोहरा ने कहा कि यह यात्रा मेरे लिए केवल 151 किलोमीटर की पदयात्रा नहीं है। बल्कि छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि और सर्वमंगल की कामना के लिए किया गया एक संकल्प है। उन्होंने कहा कि जब दुर्गम जंगलों, पथरीली राहों और बािरश के सीजन में नदी के प्रवाह के बीच से होकर हम आगे बढ़े। तब महसूस हुआ कि जब मन में श्रद्धा और संकल्प मजबूत हो, तो कोई भी कठिनाई बड़ी नहीं होती।
कांवड़ियों के भोरमदेव पहुंचने के साथ ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ गई। विधायक भावना बोहरा के साथ कांवड़ियों ने अमरकंटक से लाए नर्मदा जल से भगवान भोरमदेव का अभिषेक किया। पूजा-अर्चना के बाद प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की गई।