विश्व अंगदान दिवस: छत्तीसगढ़ में अब तक 15 कैडेवर डोनेशन, 69 को नया जीवन मिला, लंबी प्रक्रिया के साथ वेटिंग से बढ़ रहा दर्द... - Raipur News

Published on 13 अग॰ 2026
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  • Chhattisgarh Has Seen 15 Cadaver Donations So Far, With 69 Receiving New Life, The Long Process And Waiting Period Are Causing Increasing Pain.

रायपुर18 मिनट पहलेलेखक: नीरज मिश्रा

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किसी की जिंदगी अस्पताल की एक फाइल के क्लीयरेंस पर अटकी है तो कोई तीन साल से किडनी मिलने का फोन आने की राह देख रहा है। 21 साल के कामेश शर्मा की दोनों किडनी खराब है।

ट्रांसप्लांट के लिए एम्स के लगभग सभी विभागों से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन यूरोलॉजी विभाग का क्लीयरेंस बाकी है। प्रदेश में कामेश जैसे 204 मरीज अंग प्रत्यारोपण की वेटिंग लिस्ट में हैं। इनमें 188 यानी 92.2% को किडनी, 14 को लिवर और 2 को अपर लिंब की जरूरत है। प्रदेश में अब तक 15 कैडेवर डोनेशन हुए हैं। इनसे मिले अंगों ने 69 लोगों को नया जीवन दिया।

कैडेवर डोनर से किडनी और लिवर के साथ आंख, त्वचा, कॉर्निया और हार्ट वॉल्व जैसे अंग व ऊतक भी जरूरतमंदों को मिल सकते हैं। सिर्फ वेटिंग नंबर से नहीं मिलती डोनर की किडनी ब्रेन-डेड डोनर से किडनी मिलने पर मेडिकल फिटनेस, ब्लड ग्रुप, मैचिंग, प्राथमिकता और सरकारी नियमों के आधार पर पात्र मरीज चुना जाता है।

डोनर की दो किडनी में एक संबंधित अस्पताल और दूसरी जनरल पूल को मिलती है। इसलिए पंजीयन के बाद भी इंतजार लंबा हो सकता है। लिवर आवंटन में डोनर वाले अस्पताल के पात्र मरीज को प्राथमिकता मिलती है।

केस-1: सभी क्लीयरेंस मिले, फाइल यूरोलॉजी में अटकी: कामेश की मां कुसुम शर्मा ने बताया, ‘बेटे को क्रॉनिक किडनी डिजीज है। डॉक्टरों के मुताबिक ये जन्मजात है, पर हमें 28 जून 2024 को पता चला। तब से घर पर ही डायलिसिस चल रहा है। ट्रांसप्लांट के लिए लगभग सभी विभागों से क्लीयरेंस मिल चुका है। सिर्फ यूरोलॉजी की मंजूरी बाकी है। इससे प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही। लगातार डायलिसिस से उसे परेशानियां हो रही हैं।’

केस-2: 3 साल से किडनी का इंतजार: यामिनी साहू ने बताया, ‘जून 2023 में बीमारी पता लगी। रायपुर एम्स में इलाज शुरू हुआ। 10-12 बार हीमोडायलिसिस कराया गया। फिर घर पर पेरिटोनियल डायलिसिस चल रहा है। शरीर में पानी भरने से सांस में तकलीफ होती है। बीमारी से कॉलेज की पढ़ाई भी छूट गई। 2023 में ही कैडेवर किडनी के लिए पंजीयन और सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे, लेकिन अब तक किडनी नहीं मिली।’

राहत भी: सुनने की क्षमता खोई, ट्रांसप्लांट ने लौटाई| हर्षित की मां माहेश्वरी ने बताया, ‘2022 में बेटे की दोनों किडनी खराब हो गई। सप्ताह में तीन दिन डायलिसिस होता था। तभी उसकी सुनने की क्षमता चली गई। जून 2026 में एम्स में सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। अभी वह रिकवरी के दौर में है। जैसी मदद की उम्मीद थी, वैसी नहीं मिली।

भास्कर एक्सपर्ट - डॉ. वरुण अग्रवाल, संयुक्त संचालक, स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO), छत्तीसगढ़

अंगदान के बाद अंतिम संस्कार संभव प्रदेश में अंगदान बढ़ाने के लिए जागरूकता और काउंसलिंग जरूरी है। एक अंगदाता कई लोगों की जिंदगी बचा सकता है। अंगदान के बाद अंतिम संस्कार किया जा सकता है और डोनर के परिवार पर कोई खर्च नहीं आता।

किसी भी उम्र में अंग या ऊतक दान की संभावना हो सकती है। लोग SOTTO या NOTTO की वेबसाइट पर अंगदान का संकल्प ले सकते हैं। अपनी इच्छा परिवार को बताना भी जरूरी है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे अंगदान की प्रक्रिया आगे बढ़ा सकें।

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