सीरिंज-मास्क जैसे सामानों से भी अस्पताल कर रहे मोटी कमाई: उफ! मरीजों पर बिल का बोझ; 15.50 वाली खून चढ़ाने की किट 221 में - Jaipur News

Published on 19 अक्टू॰ 2026

सीरिंज-मास्क जैसे सामानों से भी अस्पताल कर रहे मोटी कमाई:उफ! मरीजों पर बिल का बोझ; 15.50 वाली खून चढ़ाने की किट 221 में

जयपुर54 मिनट पहलेलेखक: संदीप शर्मा

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देश में कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर चल रही बहस के बीच अस्पतालों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले मेडिकल कंज्यूमेबल की कीमतों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ब्लड ट्रांसफ्यूजन सेट (बीटी सेट), सीरिंज, कैथेटर और ग्लव्स जैसी जरूरी चीजों की खरीद दर और मरीज से कीमतों के मुकाबले 400 से 1300 फीसदी तक मार्जिन वसूली जा रही है। भास्कर ने डिस्ट्रीब्यूटर से इलाज में काम आने वाले सामान खरीदे तो खुलासा हुआ। ग्लव्स, सीरिंज और कैथेटर जैसी चीजें जरूरत के अनुसार दिन में दो से तीन बार तक इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनकी कीमत भी इलाज के कुल खर्च में जुड़ती जाती है। दूसरी ओर, बड़े अस्पताल अस्पताल में एडमिट पेशेंट को ही दवा देते हैं। बाहर के डॉक्टर या किसी पर्चे पर दवा लेने जाता है तो उसे मना कर दिया जाता है। अस्पतालों का कहना है कि बाहर की दवा नकली हुई तो? कोल्ड चेन खराब हुआ तो? इंजेक्शन के रिएक्शन के बाद जिम्मेदार कौन होगा?

भास्कर ने दवा चढ़ाने और मास्क जैसे सामान डिस्ट्रीब्यूटर से खरीदे, सवाल : लूट कब तक चलेगी

क्र.सं.सामान का नामकिस काम आती हैकंपनी रेटडिस्ट्रीब्यूटर रेटएमआरपी (MRP)मरीज को कितने मेंमार्जिन %
1बीटी सेटखून चढ़ाने के लिए₹9₹15.50₹226₹221 (एमजीएच हॉस्पिटल)1325.81%
2यूरेथल कैथेटरयूरिन मरीजों को लगती है₹9.30₹12.50₹64₹60 (एमजीएच हॉस्पिटल)380%
3जेलोनेट (10-10 सेमी)ड्रेसिंग में काम आती है₹41.25₹55₹109₹102 (एमजीएच हॉस्पिटल)85.45%
4आईवी सेटखून चढ़ाने के काम आता है₹13₹18₹115₹112 (कई हॉस्पिटलों में)538.89%
5डिस्पोजेबेल सीरिंज 5एमएलदवा चढ़ाने के काम आता है₹3.50₹4.50₹22₹20 (कई हॉस्पिटलों में)344.44%
6आईवी कैनुला 20 गेज कादवा चढ़ाने के लिए₹20₹28₹165₹160 (कई हॉस्पिटलों में)471.43%
7सक्शन कैथेटरफेफड़ों और गले की सफाई₹12₹18₹95₹92 (कई हॉस्पिटलों में)411.25%
8नेबुलाइज मास्कनेबुलाइज करने के लिए₹40₹50₹320₹310 (कई हॉस्पिटलों में)520.00%
9ऑक्सीजन मास्कऑक्सीजन देने में कारगर₹33₹45₹240₹230 (कई हॉस्पिटलों में)416.20%

केन्द्र सरकार और एनपीपीए रेट कंट्रोलिंग को लेकर काम कर रही है। कैंसर की दवाओं पर कंट्रोलिंग शुरू हो गई है। उम्मीद है कि अन्य पर भी ऐसा होगा। इसके अलावा एनपीपीए की ओर से भी पैनी नजर रखी जा रही है। हमारी ओर से भी निर्देश दिए जा रहे हैं कि ओवर बिलिंग नहीं हो। - अजय फाटक, ड्रग कंट्रोलर

नियम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो तभी रोक लगेगी

दवाओं की डिस्ट्रीब्यूटर-कंपनी रेट और एमआरपी के बीच बड़ा अंतर गंभीर है। लेकिन यह रेट सरकारी नियमों एवं औषधि मूल्य नियंत्रण व्यवस्था के तहत तय है। जिसमें अनेक स्तरों पर सुधार की आवश्यकता है। तो वह किया जाना चाहिए और यदि नियम पर्याप्त हैं, तो उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होना चाहिए। निष्पक्ष विश्लेषण और जिम्मेदार पक्षों की जवाबदेही तय कर मरीजों को राहत दी जा सकती है। डॉ. विजय कपूर, अध्यक्ष, निजी अस्पताल एसो.

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