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टाइफून बावी फिलीपींस, जापान और ताइवान के बाद अब चीन की ओर बढ़ रहा है। जिसको देखते हुए चीनी अधिकारियों ने शनिवार को 10 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। बता दें कि चीन में अब तक कुल 17 लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
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टाइफून बावी ने अख्तियार किया रौद्र रूप। (फोटो- ai)
बीते कई दशकों के सबसे शक्तिशाली तूफान में से एक बावी की वजह से इस समय एशिया के कई देशों की नींद उड़ी हुई है। चीन, ताइवान, जापान और फिलीपींस इस शक्तिशाली तूफान की चपेट में हैं। सबसे ज्यादा असर चीन के पूर्वी तटीय इलाकों में देखने को मिल रहा है,जहां चीनी सरकार ने बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का अभियान शुरू किया है। वहीं फिलीपींस में भूस्खलन और बाढ़ के कारण अब तक कम से कम 17 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में यह जानना बेहद अहम है कि आखिर टाइफून होते क्या हैं और इनका निर्माण कैसे होता है। साथ ही टाइफून बावी का निर्माण कैसे हुआ और इसकी कितनी रफ्तार है। वहीं इसका असर किन-किन देशों में सबसे ज्यादा है और प्रभावित देशों ने इससे निपटने के लिए क्या क्या तैयारियां की हैं....
सबसे पहले बात टाइफून बावी की
टाइफून बावी 2026 के प्रशांत टाइफून सीजन का तीसरा टाइफून और दूसरा सबसे शक्तिशाली तूफान माना जा रहा है। फिलीपींस में इसे स्थानीय नाम "इंडे" दिया गया है। बावी की शुरुआत 25 जून को प्रशांत महासागर में एक सामान्य मौसमीय हलचल के रूप में हुई थी। समुद्र का तापमान अधिक होने और हवाओं की अनुकूल परिस्थितियों के कारण यह धीरे-धीरे मजबूत होता गया। 2 जुलाई को जापान की मौसम एजेंसी ने इसे आधिकारिक तौर पर "बावी" नाम दिया और कुछ ही दिनों में यह तेजी से एक शक्तिशाली टाइफून में बदल गया। बता दें कि इस तूफान ने सबसे पहले उत्तरी मारियाना द्वीप समूह के रोटा द्वीप को प्रभावित किया और इसके बाद यह फिलीपींस,ताइवान,जापान में तबाही के बाद अब यह चीन की ओर बढ़ रहा है।

गुआम द्वीप क्षेत्र के करीब बढ़ते हुए टाइफून बावी, (सैटेलाइट तस्वीर,NOAA/AP)
अब बात टाइफून की, आखिर यह बला है क्या?
बता दें कि टाइफून एक बेहद शक्तिशाली समुद्री तूफान होता है,जो उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में बनता है। जब यह तटीय इलाकों की ओर बढ़ता है तो अपने साथ तेज हवाएं, मूसलाधार बारिश, ऊंची समुद्री लहरें और बाढ़ लेकर आता है। फिलीपींस, जापान, चीन और ताइवान जैसे देशों में ऐसे तूफानों का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है।

टाइफून बावी हुआ खतरनाक।
कैसे बनता है टाइफून?
टाइफून की शुरुआत समुद्र से होती है। जब समुद्र का पानी बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है,तो उससे बड़ी मात्रा में भाप उठने लगती है। यह भाप ऊपर जाकर बादलों में बदल जाती है और इसी दौरान बड़ी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है।
ऊर्जा बढ़ने के साथ उस क्षेत्र में हवा का दबाव कम होने लगता है और आसपास की तेज हवाएं उस ओर खिंचने लगती हैं। पृथ्वी के घूमने के कारण ये हवाएं गोल-गोल घूमना शुरू कर देती हैं और फिर धीरे-धीरे एक विशाल तूफान का रूप ले लेती हैं। अगर समुद्र लगातार गर्म बना रहे और मौसम की परिस्थितियां अनुकूल हों,तो यह तूफान बहुत जल्दी ताकतवर होकर टाइफून में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद यह तटीय इलाकों में पहुंचकर तेज हवाएं, भारी बारिश, ऊंची लहरें और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा कर सकता है।
बता दें कि यह है कि इसी तरह के तूफानों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। अटलांटिक महासागर में इन्हें हरिकेन, हिंद महासागर में चक्रवात और उत्तर-पश्चिमी प्रशांत महासागर में टाइफून कहा जाता है।

टाइफून बावी से चीन में बढ़ा खतरा।
चीन में 17 लाख से अधिक लोगों को निकाला गया
चीन के पूर्वी तटीय प्रांत झेजियांग में प्रशासन ने शनिवार सुबह तक 17 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, संभावित बाढ़ और समुद्री तूफान के खतरे को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा, शंघाई में भी उच्च जोखिम वाले इलाकों से लगभग 34,000 लोगों को हटाया गया है।
फुजियान प्रांत के समुद्र तटीय शहरों में भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। वहीं, निंगदे शहर में 3700 से अधिक लोगों को जोखिम वाले इलाकों से निकाला गया है। वहीं अगर बात पूरे फुजियान प्रांत की करें तो यहां 17,000 से ज्यादा बचावकर्मियों को आपात स्थिति से निपटने के लिए तैनात रखा गया है।
चीन के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र ने टाइफून को लेकर दूसरा सबसे बड़ा 'ऑरेंज अलर्ट' जारी किया है। इसके साथ ही भारी बारिश को देखते हुए इस वर्ष का पहला 'रेड रेनस्टॉर्म अलर्ट' भी जारी किया गया है। कई स्कूल बंद कर दिए गए हैं, फेरी सेवाएं रोक दी गई हैं, सैकड़ों उड़ानें रद्द की गई हैं और कई हाई-स्पीड ट्रेन सेवाओं को भी निलंबित किया गया है। चीन सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए झेजियांग और फुजियान प्रांतों को 4 करोड़ युआन (करीब 59 लाख डॉलर) की सहायता राशि भी जारी की है।
ताइवान के उत्तर से गुजर रहा है बावी
ताइवान के केंद्रीय मौसम प्रशासन के अनुसार,टाइफून बावी शनिवार को ताइवान के उत्तर से गुजर रहा था। इसके केंद्र के पास हवाओं की रफ्तार 144 किलोमीटर प्रति घंटे तक दर्ज की गई। मौसम विभाग का अनुमान है कि यह तूफान आगे बढ़ते हुए चीन के झेजियांग प्रांत में शनिवार देर रात या रविवार तड़के दस्तक दे सकता है।
ताइवान में तूफान के कारण कम से कम 113 लोग घायल हुए हैं। इनमें कई लोग फिसलन भरी सड़कों पर मोटरसाइकिल चलाते समय तेज हवाओं और बारिश की चपेट में आ गए। प्रशासन ने अब तक 14,200 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। ह्वालिएन और ताइचुंग जैसे इलाकों में बड़े पैमाने पर निकासी अभियान चलाया गया है। अधिकांश क्षेत्रों में स्कूल और सरकारी कार्यालय बंद कर दिए गए हैं।
जापान के ओकिनावा द्वीपों पर असर
टाइफून बावी का असर जापान के दक्षिणी द्वीपों तक भी पहुंच चुका है। ओकिनावा प्रांत के प्रशासन ने ऊंची समुद्री लहरों, तेज हवाओं और समुद्री जलस्तर बढ़ने को लेकर चेतावनी जारी की है। जापान के सार्वजनिक प्रसारक एनएचके के मुताबिक, क्षेत्र में 200 से अधिक उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। इशिगाकी समेत कई द्वीपों में तेज हवाएं और बारिश दर्ज की गई है।
फिलीपींस में भूस्खलन और बाढ़ से 17 लोगों की मौत
फिलीपींस में भी टाइफून बावी ने कहर बरपाया है। यहां इसके प्रभाव से कुल 17 लोगों की मौत हो गई है। यहां टाइफून भले ही सीधे नहीं टकराया,लेकिन इसने मौसमी मानसून को और अधिक शक्तिशाली बना दिया, जिससे भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाएं हुईं।
दक्षिणी सारंगानी प्रांत के मालापाटन कस्बे में शुक्रवार तड़के हुए भूस्खलन में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई और तीन लोग लापता हैं। वहीं लानाओ डेल सुर प्रांत के कलानोगास शहर में एक अन्य भूस्खलन में पांच लोगों की जान चली गई, जबकि छह लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
इसके अलावा बुधवार को बुकिडनॉन प्रांत में बाढ़ के पानी में डूबने से दो लोगों की मौत हो गई। फिलीपींस के नागरिक सुरक्षा विभाग के अनुसार, खराब मौसम के कारण हाल के दिनों में करीब 11,000 लोगों को 77 अस्थायी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है।
आगे क्या है खतरा?
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि टाइफून बावी चीन के पूर्वी तट से टकराने के बाद कमजोर पड़ सकता है, लेकिन इसके कारण भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और तेज हवाओं का खतरा कई दिनों तक बना रह सकता है। चीन, ताइवान और जापान के प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।