भोपाल3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों के जल्द निपटारे के लिए मध्यप्रदेश में अब फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) की रफ्तार बढ़ाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रदेश में 67 FTSC संचालित होने के बावजूद 31 मार्च 2026 तक 10,628 मामले लंबित हैं।
इनमें 9,278 मामले ऐसे हैं, जिनमें चार्जशीट दाखिल हुए दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। अब प्रत्येक FTSC में हर महीने औसतन करीब 14 दुष्कर्म-पॉक्सो मामलों के निपटारे के लक्ष्य के अनुसार काम कराने और कोर्टवार स्थिति की निगरानी की तैयारी है।
यह कवायद मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में दुष्कर्म-पॉक्सो मामलों के त्वरित निस्तारण को लेकर दिए गए निर्देशों के बाद तेज हुई है।
मध्यप्रदेश में FTSC के लिए स्वीकृत सभी 67 कोर्ट ही संचालित हैं। जनवरी से मार्च 2026 के बीच इन अदालतों में 10,533 नए मामले आए, जबकि इस अवधि में केवल 1,323 मामलों का निपटारा हो सका। इनमें महज 88 मामले ऐसे रहे, जिनका फैसला चार्जशीट दाखिल होने के दो महीने के भीतर हुआ। यानी निर्धारित समय-सीमा में निपटारे का प्रतिशत सिर्फ 7.16 फीसदी रहा।
अब जिलों से मांगी जाएगी कोर्टवार जानकारी
मध्यप्रदेश लोक अभियोजन संचालनालय ने सभी जिला अभियोजन कार्यालयों से FTSC और पॉक्सो कोर्ट की अद्यतन जानकारी निर्धारित प्रारूप में जुटाने को कहा है।
इसमें स्वीकृत और संचालित FTSC की संख्या के साथ लंबित मामलों की स्थिति, जनवरी से आगे प्राप्त नए मामले, निस्तारित मामलों की संख्या, दो महीने के भीतर हुए निस्तारण, मामलों की उम्र के अनुसार लंबित प्रकरण, दोषसिद्धि दर और DNA जांच की स्थिति की जानकारी शामिल की जा रही है।
खास तौर पर पांच साल से ज्यादा पुराने लंबित मामलों के कारण, DNA सैंपल लिए जाने और रिपोर्ट आने की स्थिति तथा DNA जांच में देरी के लिए जिम्मेदारी तय होने की जानकारी भी मांगी गई है। इससे यह पता लगाया जाएगा कि पुराने मामलों के लंबित रहने की वजह कोर्ट स्तर पर है, जांच प्रक्रिया में है या किसी अन्य स्तर पर।

मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के सीएम शामिल हुए थे।
लक्ष्य 13.75, यानी महीने में करीब 14 मामले
FTSC के लिए तय मानक के मुताबिक प्रत्येक कोर्ट को साल में 165 दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों का निपटारा करना है। इसका मासिक औसत 13.75 मामले, यानी करीब 14 मामले प्रति माह बैठता है।
इसके मुकाबले मध्यप्रदेश में जनवरी से दिसंबर 2025 के दौरान FTSC का औसत निस्तारण 6.11 मामले प्रति कोर्ट प्रति माह रहा। यानी निर्धारित औसत लक्ष्य की तुलना में कोर्टों की मौजूदा रफ्तार काफी कम है।
10,628 लंबित मामलों में 316 पांच साल से भी पुराने
लंबित मामलों की उम्र का विश्लेषण भी स्थिति की गंभीरता बताता है। मध्यप्रदेश में 31 मार्च 2026 तक लंबित 10,628 मामलों में 1,350 मामले दो महीने से कम पुराने, 4,026 मामले 2 से 12 महीने पुराने, 4,936 मामले 1 से 5 साल पुराने और 316 मामले पांच साल से ज्यादा पुराने हैं। यानी लंबित मामलों का बड़ा हिस्सा एक साल से अधिक पुराना है।
दो महीने में फैसला, फिर भी बड़ी संख्या में मामले पुराने
दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद दो महीने के भीतर फैसला देने पर जोर है। इसके बावजूद मध्य क्षेत्र के चार राज्यों में 31 मार्च 2026 तक लंबित 1,10,005 मामलों में 1,02,081 मामले ऐसे हैं, जिनमें चार्जशीट दाखिल हुए दो महीने से ज्यादा समय हो चुका है। मध्यप्रदेश में भी 10,628 लंबित मामलों में 9,278 मामले इस श्रेणी में हैं।
MP की दोषसिद्धि दर 23.32 फीसदी
रिपोर्ट में वर्ष 2025 की दोषसिद्धि दर भी दर्ज की गई है। मध्यप्रदेश में दुष्कर्म और पॉक्सो से जुड़े मामलों में दोषसिद्धि दर 23.32 फीसदी रही। मध्य क्षेत्र की औसत दर 23.97 फीसदी, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 17.43 फीसदी रही।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दुष्कर्म मामलों में समय पर DNA जांच होने से दोषसिद्धि दर में सुधार हो सकता है। इसके लिए राज्यों को DNA सैंपल लेने और उसकी जांच में देरी या लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था बनाने पर जोर दिया गया है।
शाह की बैठक में पुराने मामलों पर भी जोर
19 मई को छत्तीसगढ़ के बस्तर में केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में दुष्कर्म और पॉक्सो मामलों के त्वरित निस्तारण को प्रमुखता दी गई थी।
बैठक के बाद राज्यों से FTSC के कामकाज, लंबित मामलों और दो महीने की समय-सीमा में निस्तारण की स्थिति पर जानकारी जुटाई जा रही है। खासकर लंबे समय से लंबित मामलों को प्राथमिकता देकर निपटाने और जरूरत के मुताबिक विशेष अदालतों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है।
.