'वो रात आज भी नहीं भूली, मैं मरने वाली थी', 14 साल बाद Manisha Koirala ने बयां किया अपनी जिंदगी का ऐसा दर्द

Published on 7 सित॰ 2026

Time Published: Monday, September 7, 2026, 13:58 [IST]

Manisha Koirala: 90 के दशक में बॉलीवुड पर राज करने वाली मनीषा कोइराला ने अपनी शानदार अदाकारी से एक अलग पहचान बनाई। सौदागर, अग्निसाक्षी, बॉम्बे और 1942: ए लव स्टोरी जैसी फिल्मों में अपनी दमदार परफॉर्मेंस से उन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। नेपाली मूल की इस एक्ट्रेस ने अपने करियर के दौरान कई बड़ी फिल्मों में काम किया और एक समय वह इंडस्ट्री की टॉप और सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेसेस में शुमार थीं।

स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर सं जंग जीत चुकी हैं मनीषा कोइराला
हालांकि मनीषा कोइराला की जिंदगी में एक ऐसा दौर भी आया, जिसने उन्हें अंदर तक झकझोर कर रख दिया था। साल 2012 में उन्हें स्टेज 4 ओवेरियन कैंसर होने की जानकारी मिली थी। उस वक्त वह निजी जिंदगी में भी मुश्किल दौर से गुजर रही थीं। कैंसर के इलाज के दौरान उन्हें लंबी सर्जरी, कीमोथेरेपी और कई इमोशनल चुनौतियों से गुजरना पड़ा था। करीब एक साल तक चले इलाज के बाद साल 2013 में उन्होंने कैंसर को मात दी थी।

Manisha Koirala

कैंसर का पता चलने वाली वो रात आज भी नहीं भूलीं मनीषा

-हाल ही में ब्रूट इंडिया के साथ बातचीत में मनीषा कोइराला ने कैंसर के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि जिस दिन उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला था, उसके बाद की रात उनके लिए बेहद मुश्किल थी।

-मनीषा कोइराला के मुताबिक उस रात उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह दुनिया में बिल्कुल अकेली रह गई हैं। बीमारी का डर इतना गहरा था कि उन्हें लगा कि शायद वह जिंदगी की जंग हार जाएंगी। मनीषा कोइराला ने कहा कि कैंसर का सामना करने के बाद उन्हें पहली बार समझ आया कि एक मरीज मानसिक तौर पर कितना अकेलापन महसूस कर सकता है।

भीड़ के बीच भी खुद को अकेला महसूस करती थीं मनीषा

-मनीषा कोइराला ने ये भी बताया कि बीमारी के दौरान अकेलापन केवल अस्पताल या घर तक सीमित नहीं था। लोगों के बीच मौजूद रहने के बावजूद कई बार उन्हें भीतर से अकेलापन महसूस होता था। एक्ट्रेस ने अपने सोशल लाइफ का जिक्र करते हुए कहा कि जब वह बॉलीवुड की पार्टियों में जाती थीं और लोगों के साथ घुलने-मिलने की कोशिश करती थीं, तब भी उन्हें लगता था कि वह पूरी तरह कनेक्ट नहीं कर पा रही हैं। हालांकि इंडस्ट्री का हिस्सा होने के कारण ऐसे इवेंट्स में जाना भी जरूरी था।

-मनीषा कोइराला ने उस दौर को अपनी जिंदगी का बेहद खराब और डरावना समय बताया। उनके मुताबिक जिंदगी कई तरह की परिस्थितियों और अनुभवों से मिलकर बनती है और कई बार इंसान भीड़ में घिरा होने के बावजूद खुद को अकेला महसूस करता है।

कमजोरी महसूस होने के बाद अस्पताल पहुंची थीं मनीषा

मनीषा कोइराला को शुरुआत में इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि वह इतनी गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। उन्होंने पहले भी एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उन्हें लगातार कमजोरी महसूस होने लगी, तब वह अपने भाई के साथ काठमांडू के एक अस्पताल गई थीं। जांच के बाद उन्हें अपनी बीमारी के बारे में पता चला था। इसके बाद वह भारत आईं और मुंबई के जसलोक अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हुईं। आगे के ट्रीटमेंट के लिए उन्हें अमेरिका जाना पड़ा था।

न्यूयॉर्क में हुई लंबी सर्जरी और कीमोथेरेपी

इलाज के लिए मनीषा कोइराला न्यूयॉर्क के मेमोरियल स्लोन केटरिंग कैंसर सेंटर पहुंची थीं। दिसंबर 2012 में उनकी सर्जरी हुई थी, जिसे सफल बताया गया था। इसके बाद उन्हें कीमोथेरेपी के कई दौर से गुजरना पड़ा और इलाज के चलते उन्होंने कई महीने न्यूयॉर्क में बिताए थे। लंबे इलाज और कठिन दौर से गुजरने के बाद मनीषा कोइराला ने आखिरकार कैंसर को मात दी। साल 2014 में उनके कैंसर-मुक्त होने की खबर सामने आई। बीमारी से जंग के अपने अनुभवों को उन्होंने किताब हील्ड में भी दर्ज किया है।

आज कैंसर सर्वाइवर के तौर पर मिसाल हैं मनीषा कोइराला

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जंग जीतने के बाद मनीषा कोइराला ने अपने अनुभवों को छिपाने के बजाय लोगों के साथ शेयर किया। वह कई मौकों पर कैंसर के दौरान अपने मानसिक संघर्ष, इलाज और जिंदगी को नए नजरिए से देखने के बारे में बात कर चुकी हैं। उनकी कहानी इस बात की मिसाल है कि जिंदगी में मुश्किल से मुश्किल वक्त आने के बाद भी उम्मीद और हिम्मत के साथ आगे बढ़ा जा सकता है।