अगस्त तक थमेगा नहीं मानसून...देश में बारिश का घाटा घटकर 14% पर आया, IMD ने जताया इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान

Published on 30 जुल॰ 2026

देश

  • Edited by: नितिन अरोड़ा
  • Updated Jul 30, 2026, 04:40 PM IST

Monsoon Rain Deficit Shrinks 14 Percent: भारत में अगस्त तक मानसून की तूफानी बारिश जारी रहने की संभावना है। गहरे दबाव के क्षेत्र और सोमाली जेट के प्रभाव से अखिल भारतीय वर्षा घाटा घटकर 14% रह गया है।

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अगस्त तक थमेगा नहीं मानसून...देश में बारिश का घाटा घटकर 14% पर आया, IMD ने जताया इन राज्यों में भारी बारिश का अनुमान (iStock)

IMD August Monsoon Forecast: भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार थमने का नाम नहीं ले रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मानसून की मजबूत वापसी के कारण अखिल भारतीय स्तर पर वर्षा का घाटा घटकर महज 14% रह गया है। शुरुआती हफ्तों में असमान और कम बारिश के बाद अगस्त के पहले पखवाड़े में मानसूनी हवाओं के और ज्यादा जोर पकड़ने का अनुमान जताया गया है, जिससे पूरे देश में जल भंडारण और कृषि गतिविधियों को बड़ा सहारा मिला है।

'गहरा दबाव' और 'सोमाली जेट' बने मानसूनी तेजी की मुख्य वजह

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस सीजन में मानसून की इस मजबूत पुनरावृत्ति का मुख्य कारण महाराष्ट्र के ऊपर बना एक बेहद मजबूत गहरा दबाव का क्षेत्र है।

-अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का असर: मानसून ट्रफ में स्थित इस गहरे दबाव ने अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ से बड़ी मात्रा में नमी खींची है।

-सोमाली जेट का प्रभाव: इस मानसूनी प्रणाली को 'सोमाली जेट' (निचले स्तर की तेज हवाओं का प्रवाह) से अतिरिक्त ताकत मिली है, जो अरब सागर से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर भारी नमी ले जा रही है।

-व्यापक बारिश का दौर: इस त्रिकोणीय मौसमी प्रभाव के कारण महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान में मूसलाधार बारिश दर्ज की गई है और यह सिस्टम अगले कुछ दिनों में पश्चिम की ओर बढ़ेगा। IMD ने मध्य और पश्चिमी भारत में भारी बारिश का अनुमान जताया है।

अगस्त में नए कम दबाव के क्षेत्र बनने की उम्मीद

IMD के वर्षा मैपिंग के अनुसार, मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम भारत में अब मौसमी बारिश सामान्य के करीब पहुंच गई है, हालांकि दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्व-पूर्वोत्तर भारत में अभी भी कुछ कमी बनी हुई है। भविष्य का पूर्वानुमान और प्रभाव:

-मौसम पूर्वानुमानकर्ताओं का कहना है कि अगस्त की शुरुआत में बंगाल की खाड़ी के ऊपर नए कम दबाव के क्षेत्र बनने की संभावना है, जो मानसूनी सक्रियता को बनाए रखेंगे।

-यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो आने वाले हफ्तों में कुल बारिश का घाटा और कम हो जाएगा, जिससे जलाशयों में जल स्तर बढ़ेगा, खरीफ फसलों की बुआई में तेजी आएगी और कृषि उत्पादकता को लेकर चिंताएं दूर होंगी।

Nitin Arora

नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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