एमपी के एथेनॉल प्लांट का चावल महाराष्ट्र–छत्तीसगढ़ में बिका: पूर्व मंत्री कांवरे की मिल घोटाले का सेंटर पॉइंट, 14 राइस मिलर्स के खिलाफ सबूत मिले - Madhya Pradesh News

Published on 25 जुल॰ 2026

मध्य प्रदेश में एथेनॉल के नाम पर गरीबों और कुपोषितों के 1160 करोड़ रुपए के फोर्टिफाइड चावल घोटाले के तार महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी जुड़ गए हैं।

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पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि छिंदवाड़ा के एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए आवंटित चावल महाराष्ट्र के गोंदिया और छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिलों की राइस मिलों तक भी पहुंचा है।

घोटाले में पूर्व मंत्री और बालाघाट भाजपा के जिलाध्यक्ष रामकिशोर कांवरे के परिवार की राइस मिल हर्ष इंडस्ट्रीज का नाम भी जुड़ गया है। मिल के पार्टनर विनोद शर्मा को पुलिस ने 24 जुलाई को गिरफ्तार कर लिया है।

कावरे के भाई कुमार और भतीजे अविनाश से भी कई दौर की पूछताछ की गई है। डीवीआर और अन्य दस्तावेज भी जब्त कर लिए गए हैं। भास्कर ने जब पूर्व मंत्री कांवरे से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया तो उन्होंने सवाल सुनने के बाद फोन काट दिया। वॉट्सएप पर भेजे गए मैसेज का भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे

पूर्व मंत्री रामकिशोर कांवरे

सूत्रों का कहना है कि चावल घोटाले में संलिप्तता उजागर होने के बाद कांवरे ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मदद मांगी थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। सरकार ने गरीबों और कुपोषित बच्चों के हिस्से के चावल के घोटाले की जांच में पुलिस को फ्री हैंड दिया है।

यही वजह है कि पुलिस ने कांवरे के परिजन के स्वामित्व वाली हर्ष इंडस्ट्रीज के पार्टनर विनोद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। कांवरे के परिजन से भी लंबी पूछताछ का दौर जारी है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि बालाघाट से करीब 10 किलोमीटर दूर टेकाड़ी गांव स्थित हर्ष इंडस्ट्रीज में एथेनॉल प्लांट का चावल मिलने के डिजिटल सबूत मिले हैं। इस घोटाले में गिरफ्तार एक अन्य राइस मिलर सुरेंद्र राणा को पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन का रिश्तेदार बताया जा रहा है।

हर्ष इंडस्ट्रीज में पहुंचा था एथेनॉल प्लांट का चावल

जांच में पता चला है कि छिंदवाड़ा के एवीजे एथेनॉल प्लांट के लिए वेयरहाउस से रवाना हुआ चावल का ट्रक हर्ष इंडस्ट्रीज पहुंचा था। पुलिस को इसके सीसीटीवी फुटेज मिले हैं। डीवीआर जब्त कर ली गई है। रजिस्टर में भी इसकी एंट्री मिली है।

इसी आधार पर पुलिस ने कड़ियां जोड़ते हुए हर्ष इंडस्ट्रीज के संचालकों पर शिकंजा कसा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि हर्ष इंडस्ट्रीज ही चावल घोटाले का सेंटर पॉइंट रही है।

कैसे लगी घोटाले की भनक?

एथेनॉल प्लांट की बजाय राइस मिल पहुंचे चावल के ट्रक

मामले का खुलासा 2 जून को नवेगांव वेयरहाउस (बालाघाट) से एवीजे एथेनॉल प्लांट (छिंदवाड़ा के बोरगांव) भेजे गए तीन ट्रक चावल की जांच के दौरान हुआ। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार इनका उपयोग एथेनॉल उत्पादन के लिए होना था।

हालांकि, 3 जून को इनमें से एक ट्रक बालाघाट की संचेती राइस मिल में मिला, जबकि बाकी दो ट्रक भी छिंदवाड़ा के एथेनॉल प्लांट तक नहीं पहुंचे। घटना सामने आने के बाद पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने जांच शुरू की।

50 दिन की जांच, 18 रसूखदार आरोपी, 12 गिरफ्तार

घोटाले की गहराई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस की 20 सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम 50 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं कर पाई है। अब तक 18 रसूखदार आरोपियों को पुलिस ने नामजद किया है। इनमें से 12 गिरफ्तार हो चुके हैं।

पुलिस के अलावा फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) के दिल्ली मुख्यालय के अधिकारी भी इस घोटाले की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा एफसीआई का रीजनल ऑफिस भी समानांतर जांच कर रहा है।

जांच का फोकस इस बात पर है कि एथेनॉल प्लांट के लिए 50 लाख मीट्रिक टन चावल का आवंटन करने में नीति को कहां-कहां और किस-किस ने दरकिनार किया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि जिन 21 एथेनॉल प्लांटों ने चावल खरीदा, उन्होंने वे बैग कब और किसे बेचे।

बालाघाट जिले के एफसीआई मैनेजर ने रीजनल मैनेजर को पुलिस जांच के हवाले से एक पत्र लिखा है। इसमें इन राइस मिलों और गोदामों की संलिप्तता का जिक्र किया गया है।

बालाघाट जिले के एफसीआई मैनेजर ने रीजनल मैनेजर को पुलिस जांच के हवाले से एक पत्र लिखा है। इसमें इन राइस मिलों और गोदामों की संलिप्तता का जिक्र किया गया है।

खाद्य मंत्री बोले- एफसीआई केंद्र की एजेंसी, हमारा रोल नहीं

राज्य के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत से जब भास्कर ने सवाल किया तो उन्होंने कहा कि इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं है। एफसीआई और एथेनॉल प्लांट दोनों ही केंद्र सरकार से जुड़े विषय हैं।