अब तक 1299 मौजा का सीमा सत्यापन: भूमि सर्वे; आवेदन नहीं देने वालों को फोन कर गांव में बुला रहे कर्मी, 631 मौजा का किस्तवार - Patna News

Published on 22 अक्टू॰ 2026

पटना22 मिनट पहले

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पटना जिले के 23 अंचलों के 1300 मौजा में जमीन सर्वे चल रहा है। ये मौजा ग्रामीण क्षेत्र के हैं। अबतक आवेदन नहीं देने वाले लोगों को सर्वे कर्मी फोन कर गांव बुला रहे हैं। जिला सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी (मुख्यालय) नीरज कुमार सेठ ने कहा कि जमीन के मूल दस्तावेज की जांच के समय तक उपस्थित लोगों का आवेदन लिया जाएगा। मूल दस्तावेज का कोई हिस्सेदार उपस्थित नहीं है तो उसका मोबाइल नंबर परिवार के सदस्यों से मांगा जा रहा है, ताकि उनको फोन कर बुलाया जाए। उनको बताया जा रहा है कि आप अपनी पैतृक संपत्ति के संबंध में सही जानकारी सर्वे कर्मियों को दें, जिससे सही दस्तावेज बनाया जा सके। जिले 1511 मौजा हैं। इनमें 41 मौजा टोपो लैंड और 170 नगर निकाय का हिस्सा हैं। ग्रामीण क्षेत्र के बाद पटना नगर निगम समेत अन्य नगर निकायों में जमीन सर्वे का काम शुरू होगा। वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र के 1300 मौजा में सर्वे हो रहा है। इनमें 1299 मौजा का सीमा सत्यापन, 631 का किस्तवार, 30 की खानापूरी पूरी हो गई है। जिन मोजा की खानापूरी पूरी हो चुकी है, उनकी प्रपत्र 6 में खेसरा पंजी लिखने का कार्य चल रहा है। अभी तक दो मौजा की खेसरा पंजी लिखी गई है। इसके पूरा होते ही रैयतों को लैंड पार्सल मैप और जमीन का ब्योरा वितरित किया जाएगा, जिस पर वे प्रपत्र-8 में दावा-आपत्ति दर्ज करा सकेंगे।

अमीनों की हड़ताल से काम प्रभावित

पटना समेत राज्य के सभी जिलों में 1200 से अधिक नियमित अमीन हड़ताल पर हैं। इससे जमीन सर्वे का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। कारण, अंचल में कामकाज सुचारू रहने के लिए सर्वे कार्यालय से अमीन की मांग की जा रही है। पटना जिले के बंदोबस्त कार्यालय में कार्यरत 321 अमीनों में से सभी 23 अंचलों को एक-एक दिया गया है। इसके बावजूद अंचलों से अमीन की मांग जारी है। इससे पटना जिले में चलने वाले सर्वे का कार्य धीमा हो गया है।

बिहार में सर्वे की स्थिति

बिहार में कैडस्ट्रल सर्वे ब्रिटिश शासनकाल के दौरान 1892 से 1920 के बीच कराया गया था। बिहार में रिविजनल सर्वे आधिकारिक तौर पर 1959-1965 के दौरान शुरू होकर 1985-1990 तक चला। बिहार विशेष भूमि सर्वे बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम-2011 लागू होने के बाद शुरू हुआ। इसका उद्देश्य 1960 के दशक के सर्वे के अधूरे रहने और भूमि विवादों को खत्म करना है। सितंबर 2024 से पूरे राज्य में नए सिरे से व्यापक डिजिटल सर्वे का काम तेजी से चल रहा है।

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