नेपाल में ग्लेशियर फटने से तबाही, फुटेज में देंखे 1200 से ज्यादा मौतें: भारत ने भेजी 74 टन राहत सामग्री; डॉक्टरों से लेकर सुरंग एक्सपर्ट तक जुटे

Published on 4 सित॰ 2026

नेपाल में ग्लेशियर फटने से तबाही, फुटेज में देंखे 1200 से ज्यादा मौतें: भारत ने भेजी 74 टन राहत सामग्री; डॉक्टरों से लेकर सुरंग एक्सपर्ट तक जुटे

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में आई इस आपदा में अब तक 1200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़ के पानी ने शहरों, सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने नेपाल के लिए राहत और बचाव अभियान तेज किया है। बाढ़ आने के कुछ ही घंटों के भीतर भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने का सिलसिला शुरू कर दिया गया था। 3 सितंबर तक भारत पांच खेपों में कुल 74 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है। इसमें करीब 5 टन जरूरी दवाइयां भी शामिल हैं।

राहत सामग्री के साथ नेपाल भेजे गए विशेषज्ञ

भारत की मदद केवल खाद्य सामग्री, दवाइयों और दूसरी जरूरी वस्तुओं तक सीमित नहीं है। राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए भारत ने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ विशेषज्ञ टीमों को भी नेपाल भेजा है।इन टीमों में बचाव दल, सुरंग विशेषज्ञ और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। इसका मकसद आपदा से प्रभावित इलाकों में राहत-बचाव कार्य को तेजी देना और मुश्किल परिस्थितियों में फंसे लोगों की तलाश में मदद करना है।

सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में मदद

बाढ़ के कारण कई इलाकों में बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कुछ लोग सुरंगों और अन्य संरचनाओं में फंसे बताए जा रहे हैं। ऐसे स्थानों पर राहत और बचाव अभियान सामान्य परिस्थितियों से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।भारत की ओर से भेजे गए सुरंग विशेषज्ञ ऐसे ही कठिन ऑपरेशनों में तकनीकी मदद कर रहे हैं। बचाव दल का फोकस मलबे और क्षतिग्रस्त संरचनाओं में फंसे लोगों तक पहुंचने पर है।

शवों की पहचान में भी भारत की मदद

आपदा में बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद मृतकों की पहचान भी बड़ी चुनौती बन गई है। भारत ने इस काम में मदद के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञ भी नेपाल भेजे हैं।इन विशेषज्ञों की मदद से शवों की पहचान के लिए DNA जांच समेत वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग मिल रहा है। इससे परिवारों को अपने लापता परिजनों के बारे में जानकारी मिलने और शवों की पहचान करने में मदद हो सकती है।

बेली ब्रिज से पुनर्निर्माण में भी सहयोग

बाढ़ में कई पुलों और सड़क संपर्कों को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में राहत सामग्री और बचाव टीमों की आवाजाही बनाए रखना भी चुनौती है। भारत ने नेपाल को बेली ब्रिज उपलब्ध कराने में भी मदद की है।इन पुलों का इस्तेमाल क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों को फिर से जोड़ने और जरूरी आवाजाही बहाल करने में किया जा सकता है। यानी भारत की सहायता राहत सामग्री पहुंचाने से लेकर बुनियादी ढांचे की बहाली तक कई स्तरों पर जारी है।

नेपाल के प्रधानमंत्री ने भारत को धन्यवाद दिया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में भारत की सहायता के लिए धन्यवाद दिया है। उन्होंने आपदा के दौरान भारत की ओर से भेजी गई राहत सामग्री और विशेषज्ञ सहायता का उल्लेख किया।इस तरह नेपाल में आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बीच भारत की मदद कई मोर्चों पर जारी है। राहत सामग्री, दवाइयों और मेडिकल टीमों के अलावा बचाव, सुरंग विशेषज्ञता, फोरेंसिक जांच और पुल निर्माण जैसी क्षमताओं के जरिए भारत आपदा के बाद नेपाल के राहत और पुनर्निर्माण प्रयासों में सहयोग कर रहा है।

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