जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम: प्रदेश में हर चौथा जन्म व 11वीं मौत का रजिस्ट्रेशन 1 साल बाद, 2025 में 4.98 लाख जन्म, 44,494 मौत लेट दर्ज - Jaipur News

Published on 17 अग॰ 2026

जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम:प्रदेश में हर चौथा जन्म व 11वीं मौत का रजिस्ट्रेशन 1 साल बाद, 2025 में 4.98 लाख जन्म, 44,494 मौत लेट दर्ज

जयपुर47 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद कुमार शर्मा

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1 साल बाद पंजीकरण के लिए मजिस्ट्रेट की मंजूरी

अब जन्म और मृत्यु पंजीयन में देरी परेशानी का सबब बन सकती है। एक साल बाद पंजीकरण पर मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी होगी। संसद में इस संबंध में ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित हुआ है।

सिविल रजिस्ट्रेशन प्रणाली के आंकड़ों के मुताबिक 2025 में प्रदेश में 19.83 लाख पंजीकृत हुए जन्म में से 4.98 लाख (25.11%) यानी हर चौथा और 5.11 लाख मौतों में से 44,494 (8.71%) यानी हर 11वीं का रजिस्ट्रेशन एक साल बाद हुआ। जन्म पंजीकरण में शहरी और मृत्यु पंजीकरण में ग्रामीण पीछे रहे।

वहीं, 21 दिन की तय अवधि में पंजीकरण करवाने में राजस्थान देश के 35 राज्य-केंद्र शासित प्रदेशों में 26वें और 24वें स्थान पर है। दोनों ही मामलों में राजस्थान राष्ट्रीय औसत से पीछे है। जन्म पंजीकरण में गुजरात 99.9% और मृत्यु पंजीकरण में चंडीगढ़ 98.1% के साथ शीर्ष पर हैं।

प्रतिशत के लिहाज से टॉप 5 जिले

जिलाकुल जन्मपंजीकरणप्रतिशत
डूंगरपुर51,95621,47241.3
उदयपुर1,12,45443,19438.4
जैसलमेर30,56611,17636.6
नागौर68,01424,69136.3
जालोर69,22224,70135.7
  • प्रदेश में 2025 में शहरों में पंजीकृत 9,68,136 जन्म में से 3,97,941 यानी 41.10% का पंजीकरण एक साल बाद हुआ।
  • ग्रामीण में 10,14,583 जन्म में से 99,940 यानी 9.85% के रजिस्ट्रेशन विलंब से हुए।
  • जन्म पंजीकरण में देरी के मामले में उदयपुर संख्या और डूंगरपुर प्रतिशत के लिहाज से सबसे आगे रहे।
  • जयपुर में 17.3% बच्चों का रजिस्ट्रेशन एक साल की देरी से हुआ और यह प्रदेश में 27वें स्थान पर, जबकि कोटा 6.7% के साथ सबसे नीचे है।

नियम: 21 दिन में पंजीकरण जरूरी

  • जन्म व मृत्यु के 21 दिन में रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण हो सकता है।
  • 1 वर्ष से अधिक की देरी पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट या उप-विभागीय मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी।
  • 2 वर्ष से अधिक की देरी पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य।
  • संबंधित प्राधिकारी या मजिस्ट्रेट के लिए घटना की सत्यता और प्रामाणिकता की जांच और निर्धारित शुल्क अनिवार्य किया है।
  • पुराने अधिनियम में शामिल दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के संदर्भ को बदलकर नए कानून (बीएनएसएस), 2023 के अनुरूप अपडेट किया गया है।
क्रमांक / रैंकराज्य / केंद्र शासित प्रदेश
1गुजरात
2पुडुचेरी
3चंडीगढ़
5तमिलनाडु
26राजस्थान
35नागालैंड
जिलासंख्या
उदयपुर43,194
जोधपुर31,083
जयपुर29,272
बाड़मेर25,990
जालोर24,701

अस्पतालों पर सख्ती

नए प्रावधानों में सभी अस्पतालों में होने वाले जन्म और मृत्यु की सूचना 21 दिन में संबंधित रजिस्ट्रार को भेजना जरूरी है।

निजी अस्पताल परिजनों पर जन्म पंजीकरण की जिम्मेदारी नहीं डाल सकेंगे, उन्हें रजिस्ट्रार को सूचना देनी होगी।

सख्त कानून जरूरी संशोधित कानून फर्जीवाड़ा रोकने की दिशा में बेहतर कदम है, लेकिन कुछ कमियों को दूर करना होगा। 21 दिन में जन्म पंजीकरण कराने के लिए आम नागरिकों को कई बार स्थानीय निकायों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और डिजिटल पोर्टल की कनेक्टिविटी भी चुनौती है। लोगों को नए नियमों की जानकारी नहीं है, इसलिए जागरूकता के साथ सिंगल विंडो सिस्टम मजबूत करना जरूरी है।- डॉ. गौरव लाटा, कम्युनिटी हेल्थ।

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