Sep 10, 2026 05:53 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

मुख्य बातें
- Crude Oil Prices: ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के भी पार चला गया है
- जबकि, WTI की कीमत 97.20 डॉलर प्रति बैरल पर थी
- इससे भारत की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं

कच्चे तेल की कीमतें फिर से आसमान छूने लगी हैं।
ईरान ने कसम खाई कि वह और तेज जंग के लिए तैयार है। इस वजह से तेल की कीमतों में लगी आग अब और भड़क गई है। ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के भी पार चला गया है। जबकि, WTI की कीमत 97.20 डॉलर प्रति बैरल पर थी। इससे भारत की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पेट्रोल-डीजल के अलावा कच्चे तेल से बनने वाले हर प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ने की आशंका प्रबल हो गई है। पेंट, प्लॉस्टिक से लेकर नेल पॉलिश तक की कीमतों पर कच्चे तेल के रेट का असर पड़ने वाला है।
दूसरी ओर अपनी जरूरत का 90 प्रतिशत तेल आयात करने की वजह से भारत का आयात बिल बढ़ेगा। पहले ही जितना कच्चा तेल खरीदने के लिए अब हमें ज्यादा डॉलर चुकाना पड़ेगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का सिलसिला क्या एक बार फिर शुरू हो जाएगा?
फिलहाल खुदरा पेट्रोल और डीजल के दाम में तीन महीने से ज्यादा समय से कोई बदलाव नहीं हुआ है। आज भी बेंचमार्क दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये लीटर और डीजल के दाम 95.20 रुपये लीटर हैं। पिछली बार 25 मई को कीमतों में संशोधन किया गया था, जब पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा किया गया था। चार बार में पेट्रोल-डीजल के दाम 7.50-7.50 रुपये बढ़े थे।
पेट्रोल-डीजल पर ₹23 लीटर तक का नुकसान
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड जैसी ईंधन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पडे़गा।
अभी सरकारी तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब ₹5 और डीजल पर ₹23 प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। पीटीआई के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पाने के कारण इन कंपनियों को पहले ही जमा हुए घाटे का सामना करना पड़ रहा है।
ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी के सामने ईरान पीछे हटने वाला नहीं है और अगर अमेरिका उसके क्षेत्र पर हमले जारी रखता है तो वह अपने हमले और तेज कर देगा।
नवंबर बाद क्या खत्म होगी जंग
पिछले हफ्ते में फिर से शुरू हुई लड़ाई ने अपेक्षाकृत शांति के दौर को खत्म कर दिया है और तेल की कीमतों को ऊपर धकेल दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भविष्यवाणी की है कि यह जंग नवंबर के मध्यावधि चुनावों के बाद ही खत्म होगी और उससे पहले पेट्रोल की कीमतों में कोई बड़ी राहत नहीं मिलेगी। इससे यह संकेत मिलता है कि इस सात महीने से चल रहे संघर्ष में जल्द कोई कमी आने की संभावना नहीं है।
जंग से पहले, दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल और LNG होर्मुज के रास्ते दुनियाभर के ग्राहकों तक पहुंचता था। फारस की खाड़ी से कुछ क्रूड तेल की निर्यात जलडमरूमध्य के रास्ते होती रहती है, अक्सर ऐसे टैंकरों पर जिनके ट्रांसपोंडर बंद होते हैं, लेकिन जहाजों को हमले का लगातार खतरा बना रहता है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
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